ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध अब तय माना जा रहा है तारीख आ चुकी है. दिन आ चुका है. और दोनों तरफ से तैयारी पूरी हो चुकी है. किसकी क्या तैयारी है? कौन क्या कर रहा है? ये सबकुछ आज हम आपको विस्तार से बताएंगे. दिखाएंगे. लेकिन आज हमारे विश्लेषण में सबसे बड़ा सवाल ये है..रमजान के पाक महीने में ट्रंप..एक मुस्लिम देश पर हमला करते हैं तो बाकी मुस्लिम देश क्या करेंगे? इस सवाल का विश्लेषण हम आपके लिए आज करेंगे..लेकिन उससे पहले आपको महायुद्ध के 5 बड़े संकेतों के बारे में जानना चाहिए.
सिर्फ 24 घंटे पहले वॉशिंगटन में अमेरिकी सेना के अधिकारियों और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच एक गुप्त मीटिंग हुई, जिसमें अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान पर हमले के लिए शनिवार को सबसे सही वक्त बताया है. इसके अलावा डॉनल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से कहा है..वो डिएगो गार्सिया का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए करेंगे. यानी ट्रंप ने दुनिया के सामने ईरान पर हमले की योजना का खुलासा किया है.
ईरान भी हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़श्कियन ने साफ साफ कहा वो शहीद होने के तैयार हैं. लेकिन पीछे नहीं हटेंगे.
ईरान ने अपने परमाणु और सैन्य ठिकानों को सुरक्षित रखने के लिए किलेबंदी भी शुरू कर दी है. सेटेलाइट तस्वीरों से इसका खुलासा हुआ है.
आज रूस ने भी ईरान के सहयोग का संकेत देते हुए..गल्फ ऑफ ओमान में ईरान के साथ नौसैनिक अभ्यास किया है. जिससे अमेरिका के खिलाफ ईरान का हौसला मजबूत हुआ है.
ईरान और अमेरिका दोनों ने की युद्ध की तैयारी
इसका मतलब अमेरिका और ईरान दोनों ने युद्ध की अधिकतम तैयारी कर ली है और दोनों के बीच वार्ता में बात नहीं बनने से धैर्य भी टूटता दिख रहा है. और ये सब कुछ हो रहा है..रमजान के पवित्र महीने में सिर्फ एक दिन पहले रमजान की शुरूआत हुई है. इस्लाम में इसे सबसे पवित्र महीना माना जाता है और आज दुनिया भर की एजेंसियां दावा कर रही हैं. सिर्फ 48 घंटे बाद अमेरिका और ईरान के बीच विनाशकारी और अनियंत्रित युद्ध की शुरुआत होने जा रही है. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं. क्या एक मुस्लिम मुल्क ईरान पर डॉनल्ड ट्रंप रमजान के महीने में हमला करने जा रहे हैं. क्या अमेरिकी सेनाएं रमजान के महीने में ईरान के लोगों का खून बहाएगी और क्या मिडिल ईस्ट में मौजूद मुस्लिम देश इस काम में अमेरिका की मदद करेंगे क्या जो मुल्क इस्लाम के नाम पर नेटो जैसा संगठन बनाने को तैयार थे.
रमजान के पवित्र महीने में मिटेगा मुस्लिम मुल्क का अस्तित्व?
वो रमजान के महीने में एक मुस्लिम मुल्क के अस्तित्व के लिए खतरा बन जाएंगे. इन सभी सवालों का जवाब समझने के लिए आज आपको जानना चाहिए... अमेरिका ने मुस्लिम देशों के सैन्य अड्डों में ईरान के खिलाफ किन किन घातक हथियारों की तैनाती की है. आज आपको अमेरिका और ईरान के मददगार देशों के रुख के बारे में भी जानना चाहिए...जो रमजान में सबसे बड़े खूनखराबे का संकेत दे रहे हैं. आज वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले गोल्ड और ऑयल ने भी युद्ध शुरू होने की भविष्यवाणी कर दी है. जिससे पूरी दुनिया में उथल पुथल मच गई है. लेकिन सबसे पहले आप एक मैप के जरिए समझिए. रमजान के महीने में अमेरिका ने ईरान को कैसे चारों तरफ से घेर लिया है और मुस्लिम देशों की मदद के बगैर कैसे ये हमला संभव नहीं है.
अमेरिका के चक्रव्यूह में घिरा ईरान
ईरान के चारों तरफ अमेरिका का चक्रव्यूह नजर आ रहा है. कतर के अल उदीद एयरबेस में यूएस सेंट्रल कमांड का बड़ा हब मौजूद है. यहां पर अमेरिका सबसे आधुनिक F-22 रैप्टर और एफ 35 जैसे स्टेल्थ विमान मौजूद हैं और अगर अमेरिका की सेना शनिवार को ईरान पर बड़ा हमला करना चाहती है. तो अल उदीद एयरबेस के इस्तेमाल के बगैर ये हमले की धार कुंद हो जाएगी. इस मैप में आपको सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयर बेस भी नजर आ रहा है. इस एयर बेस में अमेरिका के F-15 और F-35 फाइटर जेट के अलावा..रिफ्यूलर और टोही विमान भी तैनात हैं और अमेरिका ने सउदी में एयर डिफेंस मिसाइलों की संख्या भी बढ़ाई है.
बहरीन में भी अमेरिकी नौसेना की 5th फ्लीट तैनात
मिडिल ईस्ट में अमेरिका का बड़ा सहयोगी यूएई भी है. यहां के अल धफरा एयर बेस में अमेरिका के F-22 और F-35 फाइटर जेट तैनात हैं. पिछली बार इजरायल के हमले में यूएई ने खुफिया जानकारियां साझा की थीं. मिडिल ईस्ट में इजरायल के पड़ोसी मुस्लिम देश जॉर्डन के मुवाफ़्फ़क सल्ती एयर बेस भी अमेरिकी लड़ाकू विमानों का घर है. यहां पर अमेरिकी वायुसेना के F-35A और F-15E लड़ाकू विमान तैनात हैं. पिछले युद्ध में जार्डन ने अपने एयर स्पेस में इजरायल पर दागे गए ईरान के ड्रोन भी गिराए थे. इसके अलावा बहरीन में अमेरिकी नौसेना की 5TH फ्लीट तैनात है. यहां से अमेरिका ईरान पर गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और सबमरीन से टॉरपीडो अटैक कर सकता है.
अमेरिका का सबसे घातक वॉरशिप USS अब्राहम लिंकन तैनात
इसके अलावा अरब सागर में अमेरिका का सबसे घातक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप USS अब्राहम लिंकन मौजूद है. गल्फ ऑफ ओमान और पर्शियन गल्फ में अमेरिका के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात हैं. जो एक साथ ईरान पर मिसाइलें बरसा सकते हैं. इसी तैयारी के दम पर अमेरिका की सेनाओं ने ईरान पर शनिवार को सबसे बड़े हमले के लिए हामी भर दी है . तो क्या मुस्ल्मि मुल्कों ने रमजान के महीने में ईरान पर हमला करने की इजाजत दे दी है. क्योंकि सउदी अरब..कतर, बहरीन, यूएई और जॉर्डन तैयार नहीं हुए..तो ईरान पर अमेरिकी हमला सफल नहीं हो पाएगा. इससे पहले याद कीजिए..सउदी अरब..और कतर जैसे देशों ने ईरान पर हमले का विरोध किया था. ये जानकारी हमने आपको DNA में दी थी. लेकिन पिछले कुछ दिनों में हालात तेजी से बदले हैं. उस समय ईरान ने हमले में अमेरिका का साथ देने पर इन देशों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी . लेकिन अब इन देशों में अमेरिका ने एयर डिफेंस सिस्टम की नई बैटरियां तैनात कर दी हैं.
अमेरिका और ईरान ने नहीं जारी किया कोई बयान
कतर और सउदी अरब की सुरक्षा को फूलप्रूफ कर दिया गया है . और पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के तनाव पर इन देशों ने कोई बयान भी जारी नहीं किया है . ऐसे में इस बात की आशंका जाहिर की जा रही है कि अमेरिका के दबाव के सामने ये देश टूट सकते हैं . और ट्रंप अगर..अपनी सेना की सलाह पर रमजान के महीने में ईरान को निशाना बनाते हैं तो इन देशों को भी अमेरिका का साथ देना पड़ेगा. इसलिए ये जंग..ईरान से ज्यादा, उन मुस्लिम देशों के लिए इम्तिहान है, जो खुद को मुस्लिम देशों का खलीफा मानते हैं. जो इस्लाम के नाम पर..मुस्लिम देशों की एकजुटता की बात करते हैं. जिन्हें मजहब के नाम पर किसी गैर-मुस्लिम देश के खिलाफ होने वाला प्रोपेगेंडा भी सच लगता है. ये मुस्लिम देश..अब पूरी कोशिश में जुट गए हैं कि किसी तरह रमजान के महीने में ईरान पर होने वाले संभावित हमले को टाला जाए.
48 घंटे में ईरान पर हमले को लेकर क्यों मची है खलबली?
आपको ये भी जानना चाहिए..आखिरकार 48 घंटे के अंदर ईरान पर अमेरिकी हमले की खबर क्यों चर्चा में है . तो अमेरिकी मीडिया ने व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाले से बड़ा दावा किया है...जिसके मुताबिक,,,,राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना के बड़े अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की . इस मीटिंग में डॉनल्ड ट्रंप ने इन अधिकारियों से ईरान पर हमले पर राय मांगी . और इसी मीटिंग में सैन्य अधिकारियों ने ईरान पर हमले की सबसे उपयुक्त तारीख राष्ट्रपति को बता दी. ट्रंप को बताया गया...किस दिन अमेरिका की सेनाएं ईरान पर इतिहास का सबसे बड़ा हमला कर सकती हैं . आज आपको भी इस तारीख और संभावित हमले की तीव्रता के बारे में जानना चाहिए . इस रिपोर्ट के मुताबिक
ट्रंप ने अकेले में मिलिट्री कार्रवाई के पक्ष और विपक्ष में बहस की
सैन्य अधिकारियों से ईरान के खिलाफ उनकी तैयारियों की जानकारी ली
इसके अलावा अमेरिका अपनी नौसैनिक ताकत का लगभग एक-तिहाई हिस्सा मिडिल ईस्ट में तैनात कर चुका है .
मिडिल ईस्ट के अमेरिकी बेसों में इस वक्त 120 से ज्यादा आधुनिक अमेरिकी फाइटर जेट्स भी सक्रिय हैं .
इनमें से 50 से ज्याद जेट्स पिछले 24 घंटे के अंदर यहां पर पहुंचे हैं . कुछ जेट्स कतर और बहरीन में भी उतरे हैं .
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को बताया गया है...अमेरिकी सेनाएं इतनी तैनाती के बाद वीकेंड तक ईरान पर हमला करने के लिए तैयार है.
यानी शनिवार को ईरान पर हमला होने की संभावनाएं सबसे ज्यादा हैं .
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के खिलाफ संभावित हमला आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली सैन्य अभियान होगा.
यानी ऐसा शक्तिशाली हमला आज तक दुनिया ने ना देखा होगा..ना ही किसी सेना ने ऐसा हमला करने के बारे में सोचा होगा.
अमेरिकी सेना की रणनीति एक साथ ईरान के हजारों लक्ष्यों को निशाना बनाने की है .
जिसमें मिलिट्री, परमाणु और पॉलिटिकल टारगेट शामिल हैं.
यानी पहले ही हमले में ईरान के हथियारों और इस हथियारों को कंट्रोल करने वाले दिमाग को नष्ट कर दिया जाएगा .
अगर योजना सफल रही तो मिडिल ईस्ट के दूसरे मुस्लिम देशों को ईरान से हमले का डर भी नहीं रहेगा
अमेरिकी सेनाओं ने हमले का ग्रीन सिग्नल दिया
कुल मिलाकर..अमेरिकी सेनाओं की ओर से इस बार हमले की हरी झंडी दे दी गई है . आखिरी फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति को करना है. अब जैसे ही डॉनल्ड ट्रंप आदेश देंगे...वैसे ही हमला शुरू हो जाएगा. इस मीटिंग के बाद मिडिल ईस्ट और आस पास मौजूद अमेरिकी बेसों में मौजूद अमेरिकी सेनाएं पूरी तरह वॉर रेडी मोड में हैं. मित्रों, ऐसा हो ही नहीं सकता..जिन देशों में अमेरिकी बेस हैं...उनको हमले की जानकारी ही ना हो. इस बीच एक अहम जानकारी ये है कि अमेरिका का एक खास ड्रोन ईरान के हाई वैल्यू टारगेट की लिस्ट बनाने के काम में लग गया है .
मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 120 से भी ज्यादा फाइटर जेट तैनात
हमने आपको बताया इस वक्त मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 120 से ज्यादा फाइटर जेट तैनात हैं..लेकिन ईरान की टेंशन बढ़ाने वाली एक और तस्वीर बुल्गारिया से आई है . आज बुल्गारिया के सोफिया एयरपोर्ट के रनवे पर अमेरिकी वायुसेना के विमान खड़े दिखाई दिए . बुल्गारिया..अमेरिका का नेटो सहयोगी है...जो दक्षिण-पूर्वी यूरोप में स्थित है...जबकि तेहरान पश्चिमी एशिया में स्थित है. दोनों के बीच तुर्किए का क्षेत्र आता है. सोफिया एयरबेस से अमेरिकन फाइटर जेट सिर्फ 2 घंटे में तेहरान तक पहुंच सकते हैं . यानी अमेरिका...हमलों की तीव्रता बढ़ाने के लिए अपने सैन्य संसाधनों को मिडिल ईस्ट के साथ साथ साउथ यूरोप में भी तैनात कर रहा है . इसका मतलब साफ है..अमेरिका इस बार ईरान के साथ लंबे युद्ध की तैयारी के साथ मैदान में उतरा है .

1 hour ago
