Last Updated:January 01, 2026, 14:28 IST
Career Trends 2026: साल 2026 में कई बदलाव देखने को मिलेंगे. अभी तक जो कोर्स डिमांड में थे, उनकी मांग अचानक से कम हो जाएगी. ज्यादातर स्टूडेंट्स ऑफबीट या एआई से जुड़े कोर्सेस में दिलचस्पी दिखाएंगे.
Career Trends 2026: नए साल में करियर ट्रेंड्स में बड़ा बदलाव नजर आएगानई दिल्ली (Career Trends 2026). क्या आपको याद है जब हर घर की एक ही कहानी होती थी- बेटा/बेटी इंजीनियर बनेगा या डॉक्टर. लेकिन 2026 की दहलीज पर खड़े भारत में यह कस्टम अब इतिहास के पन्नों में दफन होता दिख रहा है. आज का स्टूडेंट किसी भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय अपनी राह खुद चुनने का हौसला दिखा रहा है. यही वजह है कि कल तक जिन कोर्सेस में एडमिशन के लिए लंबी लाइन लगती थी, आज वहां सन्नाटा पसरा है. पारंपरिक डिग्रियों का चमकता हुआ ताज अब धीरे-धीरे फीका पड़ता जा रहा है.
आज की ‘जेन जी’ पीढ़ी थ्योरी के पन्नों में कैद होने के बजाय स्किल्स के आसमान में उड़ना चाहती है. यह बदलाव केवल इत्तेफाक नहीं, बल्कि शिक्षा जगत की बड़ी करवट है. जहां माता-पिता का पुराना ‘करियर प्रेशर’ अब धुंधला पड़ रहा है, वहीं छात्र उन कोर्सेस से तौबा कर रहे हैं जो आज के ‘स्मार्ट वर्ल्ड’ से मेल नहीं खाते. अब सिविल इंजीनियरिंग की फाइल्स धूल फांक रही हैं और सिंपल बी.कॉम बोरिंग लगने लगा है. जानिए 2026 में किन कोर्सेस की साख गिरेगी.
2026 में कम होगी इन कोर्सेस की डिमांड
नए साल में एजुकेशन और करियर सेक्टर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे. अब स्टूडेंट्स ट्रडिशनल कोर्सेस के बजाय फ्यूचर रेडी यानी जॉब रेडी कोर्सेस पर फोकस करेंगे. जानिए इस साल किन कोर्सेस की डिमांड कम हो जाएगी.
पारंपरिक इंजीनियरिंग कोर्सेस
एक दशक पहले तक सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को ‘सदाबहार’ माना जाता था. हालांकि, 2026 के रुझान बताते हैं कि इन क्षेत्रों में छात्रों का रुझान कम हुआ है. इसका मुख्य कारण कंप्यूटर साइंस और डेटा साइंस की तरफ झुकाव है. स्टूडेंट्स को लगता है कि पारंपरिक इंजीनियरिंग में नौकरी के अवसर सीमित हैं और सैलरी ग्रोथ की स्पीड भी काफी धीमी है. इस वजह से वे इन कोर्सेस से किनारा कर रहे हैं.
जनरल बीए और बीकॉम
बिना किसी विशेषज्ञता के सामान्य बीए या बीकॉम करने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है. आज के समय में ‘जनरलिस्ट’ की तुलना में ‘स्पेशलिस्ट’ की अधिक मांग है. छात्र अब सिर्फ बीकॉम के बजाय बीकॉम (ऑनर्स) या प्रोफेशनल कोर्सेज (जैसे डिजिटल मार्केटिंग या फाइनेंशियल एनालिटिक्स) चुन रहे हैं. थ्योरी बेस्ड पुराने सिलेबस आज की कॉर्पोरेट दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपर्याप्त साबित हो रहे हैं.
टीचर ट्रेनिंग और शिक्षा से जुड़े कोर्सेज
हाल के वर्षों में बीएड और अन्य शिक्षण संबंधी कोर्सेज के प्रति उत्साह में कमी देखी गई है. इसका एक बड़ा कारण भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और निजी स्कूलों में कम सैलरी मिलना है. छात्र अब टीचिंग के बजाय कॉर्पोरेट ट्रेनिंग, एड-टेक प्लेटफॉर्म्स या कंटेंट क्रिएशन जैसे क्षेत्रों में करियर बनाना पसंद कर रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और उच्च पैकेज मिलता है.
इन कोर्सेस के प्रति झुकाव कम क्यों हो रहा है?
पुराना सिलेबस: कई कोर्सेस का सिलेबस आज की डिजिटल क्रांति के हिसाब से अपडेट नहीं हुआ है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव: AI से कई पारंपरिक जॉब्स पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे छात्र डरे हुए हैं. स्किल बनाम डिग्री: अब कंपनियां डिग्री के बजाय उम्मीदवार के पास मौजूद स्किल्स (जैसे कोडिंग, डिजाइनिंग, क्रिटिकल थिंकिंग) को ज्यादा महत्व दे रही हैं. फ्रीलांसिंग का आगाज: आज का युवा 9 से 5 की नौकरी के बजाय फ्रीलांसिंग और रिमोट वर्क को प्राथमिकता दे रहा है. इसके लिए पारंपरिक कोर्सेस जरूरी नहीं रह गए हैं.मौजूदा स्टूडेंट्स करियर ओरिएंटेड कोर्सेस को वैल्यू दे रहे हैं. वे सिर्फ किताबी ज्ञान वाले कोर्सेस से पीछे हटने लगे हैं. इसलिए आने वाले समय में केवल वही कोर्सेस सफल होंगे, जो छात्रों को फ्यूचर स्किल्स से लैस करेंगे.
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First Published :
January 01, 2026, 14:28 IST

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