10 लाख नकद और सोने से भी नहीं भरा मन, दहेज की भेंट चढ़ी एक बेटी; 4 साल के मासूम को कौन देगा न्याय?

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10 लाख और सोना भी कम पड़ा, दहेज की आग में जली बेटी, 4 साल का बेटा अनाथ

Last Updated:March 05, 2026, 09:25 IST

Bengaluru Dowry Death Case: बेंगलुरु में 35 साल की पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुषमा की मौत ने दहेज प्रथा की कड़वी सच्चाई को फिर सामने ला दिया है. परिवार का आरोप है कि शादी में 10 लाख रुपए नकद और सोने के गहने देने के बावजूद ससुराल वालों की मांग खत्म नहीं हुई. लगातार प्रताड़ना के बाद सुषमा ने कथित तौर पर अपनी जान दे दी. पीछे छूट गया है चार साल का मासूम, अब उसके लिए न्याय की मांग उठ रही है.

10 लाख और सोना भी कम पड़ा, दहेज की आग में जली बेटी, 4 साल का बेटा अनाथZoom

बेंगलुरु में 35 वर्षीय पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुषमा की संदिग्ध मौत के बाद दहेज प्रताड़ना का मामला सामने आया. (AI फोटो)

बेंगलुरु: दहेज एक ऐसा अभिशाप है जो हर दिन बेटियों की जान ले रहा है. देश के हर हिस्से में दहेज लोभियों की भरमार है. इन्हीं दहेज लोभियों ने आज बेटियों का जीना मुहाल कर रखा है. इस बार खबर बेंगलुरु से है जहां शादी के वक्त 10 लाख रुपए नकद दिए गए. सोने के गहने भी दिए गए. बेटी ने खुद की कमाई से कार तक खरीदी. परिवार को लगा कि अब उनकी बेटी खुश रहेगी. लेकिन कुछ साल बाद वही बेटी दहेज की मांग और घरेलू झगड़ों के बीच ऐसी स्थिति में पहुंच गई कि उसने अपनी जिंदगी खत्म कर ली. बेंगलुरु के सोलादेवनहल्ली इलाके की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर दहेज की भूख कब खत्म होगी. पीछे रह गया है चार साल का एक मासूम बच्चा, जिसकी दुनिया अचानक उजड़ गई है. अब सवाल यह भी है कि उसकी मां को न्याय कौन दिलाएगा.

मृतका की पहचान 35 साल की पी. सुषमा के रूप में हुई है, जो पहले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थीं. कुछ साल पहले उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी. परिवार का आरोप है कि शादी के समय 10 लाख रुपए नकद और सोने के गहने देने के बावजूद ससुराल वालों की मांगें खत्म नहीं हुईं. पति और सास लगातार और दहेज की मांग करते रहे. आए दिन घर में झगड़े होते थे. अंत में हालात इतने खराब हो गए कि सुषमा ने कथित तौर पर फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. इस मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है.

दहेज की मांग और घरेलू कलह ने छीनी एक और जिंदगी

पुलिस के मुताबिक सुषमा की शादी पांच साल पहले पुनीत कुमार से हुई थी. पुनीत एक निजी कंपनी में काम करता है. दोनों का चार साल का बेटा है. सुषमा के पिता टीडी प्रभाकरमूर्ति पुलिस विभाग में अधिकारी थे. उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है कि शादी के समय उन्होंने 10 लाख रुपए नकद और सोने के गहने दिए थे. इसके बावजूद ससुराल पक्ष की ओर से दहेज की मांग जारी रही.

पिता का आरोप है कि सुषमा ने अपनी कमाई से एक कार भी खरीदी थी, लेकिन इसके बाद भी पति और सास की मांगें खत्म नहीं हुईं. परिवार का दावा है कि सुषमा को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था. हाल के महीनों में घर में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े बढ़ गए थे. इसी तनाव के कारण सुषमा ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. पुलिस के अनुसार सोमवार को सुषमा और उसकी सास कल्पना के बीच खाना बनाने को लेकर विवाद हुआ था. आरोप है कि सास ने उसे खाना बनाने से रोका और कई तरह से तंग किया. परिवार का कहना है कि यह झगड़ा काफी बढ़ गया था. अगले ही दिन सुषमा अपने घर में फंदे से लटकी मिलीं.

पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?

पुलिस ने मृतका के पिता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है. पति पुनीत कुमार को दहेज मृत्यु के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. यदि दहेज प्रताड़ना और हत्या के आरोप साबित होते हैं तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

परिवार ने क्या आरोप लगाए हैं?

सुषमा के पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को लगातार दहेज के लिए परेशान किया जाता था. उनका कहना है कि शादी के समय 10 लाख रुपए नकद और सोने के गहने दिए गए थे. इसके बावजूद पति और सास की ओर से बार-बार अतिरिक्त दहेज की मांग की जाती थी. परिवार को शक है कि सुषमा की हत्या की गई और बाद में इसे आत्महत्या का रूप दिया गया.

इस घटना का सबसे बड़ा असर किस पर पड़ा है?

इस घटना का सबसे बड़ा असर सुषमा के चार साल के बेटे पर पड़ा है. इतनी छोटी उम्र में उसने अपनी मां को खो दिया. परिवार का कहना है कि बच्चे को अभी यह भी समझ नहीं है कि उसकी मां अब कभी वापस नहीं आएगी. यही वजह है कि परिवार अब सिर्फ न्याय की मांग कर रहा है ताकि भविष्य में किसी और बेटी के साथ ऐसा न हो.

दहेज की कड़वी सच्चाई फिर आई सामने

भारत में दहेज लेना और देना कानूनन अपराध है, लेकिन इसके बावजूद ऐसे मामले लगातार सामने आते रहते हैं. सुषमा की मौत ने एक बार फिर समाज को आईना दिखाया है. सवाल यह है कि जब पढ़े-लिखे और नौकरी करने वाले परिवारों में भी दहेज की मांग खत्म नहीं हो रही, तो इस सामाजिक बुराई को खत्म कैसे किया जाएगा. फिलहाल सुषमा का परिवार न्याय की उम्मीद में पुलिस और कानून की ओर देख रहा है.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें

First Published :

March 05, 2026, 09:25 IST

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