India Russia Aircraft Deal: हिंद महासागर से लेकर दूरदराज सरहदी इलाकों तक, भारत की निगरानी और मारक क्षमता को नई ऊंचाई देने की तैयारी शुरू हो गई है. भारत और रूस मिलकर एक ऐसे मल्टी-रोल एयरक्राफ्ट के संयुक्त निर्माण पर आगे बढ़ रहे हैं, जो जरूरत पड़ने पर समंदर की गहराइयों में छिपे दुश्मन तक पर नजर रख सकेगा. IL-114-300 नाम का यह टर्बोप्रॉप विमान सिर्फ यात्री या कार्गो एयरक्राफ्ट नहीं, बल्कि भविष्य में एक खतरनाक मैरीटाइम पेट्रोल और एंटी-सबमरीन प्लेटफॉर्म भी बन सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर 2025 की मुलाकात के बाद इस परियोजना को नई रफ्तार मिली है. अब HAL और रूस की UAC के बीच MoU साइन हो चुका है और ROSTEC इसकी तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता (Feasibility Study) पर काम कर रहा है. रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी का अगला बड़ा अध्याय मान रहे हैं.
क्या है IL-114-300 और क्यों है यह खास?
IL-114-300, सोवियत दौर के IL-114 का आधुनिक संस्करण है, जिसे नए जमाने की जरूरतों के हिसाब से अपग्रेड किया गया है. इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी और कठिन इलाकों में उड़ान भरने की क्षमता है. 64 यात्रियों की क्षमता और 1000 किमी से ज्यादा की रेंज वाला यह विमान छोटे रनवे और STOL ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है, जो इसे नॉर्थ ईस्ट, अंडमान-निकोबार और पहाड़ी इलाकों के लिए बेहद उपयोगी बनाता है.
इस प्रोजेक्ट का सबसे अहम पहलू है इसका मैरीटाइम पेट्रोल वर्जन.
क्यों भारत-रूस इस प्रोजेक्ट पर एकजुट हुए?
एक तरफ रूस अपने पुराने An-24 और An-26 विमानों को बदलना चाहता है, तो दूसरी तरफ भारत आत्मनिर्भर भारत के तहत एविएशन सेक्टर में विदेशी निर्भरता घटाना चाहता है. पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस एशिया की ओर झुका है और भारत उसके लिए भरोसेमंद साझेदार बनकर उभरा है. वहीं भारत को ATR जैसे आयातित विमानों का सस्ता और सामरिक विकल्प मिल सकता है.
कैसे होगा संयुक्त निर्माण और भारत को क्या मिलेगा?
HAL और UAC के बीच हुए समझौते के तहत भारत में स्थानीय प्रोडक्शन लाइन लगाने की संभावना है. बेंगलुरु या नासिक में इसका निर्माण हो सकता है. इस समझौते में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) पर खास जोर है, जिससे कंपोजिट मटीरियल, डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल और एवियोनिक्स जैसे अहम हिस्से भारत में ही विकसित किए जा सकें.
IL-114-300 की संयुक्त प्रोडक्शन पर HAL-UAC के बीच MoU. ROSTEC करेगा तकनीकी, लागत और सर्टिफिकेशन स्टडी. 40–50% स्वदेशीकरण का लक्ष्य. मैरीटाइम पेट्रोल और एंटी-सबमरीन वेरिएंट पर चर्चा. भारतीय नौसेना के लिए कम लागत वाला MPA विकल्प. UDAN योजना के तहत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा.समंदर में क्यों बन सकता है ‘उड़ता हुआ किला’?
इस प्रोजेक्ट का सबसे अहम पहलू है इसका मैरीटाइम पेट्रोल वर्जन. इसमें सर्च रडार, EO/IR सेंसर, सोनाबॉय और एंटी-सबमरीन हथियार लगाए जा सकते हैं. यह विमान भारत की EEZ, समुद्री लुटेरों, संदिग्ध जहाजों और दुश्मन पनडुब्बियों पर नजर रख सकेगा. कम लागत और लंबी उड़ान क्षमता इसे P-8I जैसे महंगे जेट्स का सपोर्ट प्लेटफॉर्म बना सकती है.
कम लागत और लंबी उड़ान क्षमता इसे P-8I जैसे महंगे जेट्स का सपोर्ट प्लेटफॉर्म बना सकती है.
आम आदमी और अर्थव्यवस्था को क्या फायदा?
इस परियोजना से हजारों नौकरियां पैदा होंगी, MSME सेक्टर को ऑर्डर मिलेंगे और एविएशन R&D को बढ़ावा मिलेगा. क्षेत्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ेगी, जिससे छोटे शहरों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और टिकट की कीमतें भी काबू में रह सकती हैं.
चुनौतियां क्या हैं और आगे की राह?
सबसे बड़ी चुनौती है रूसी इंजन और भारतीय मेंटेनेंस सिस्टम का तालमेल, साथ ही DGCA और EASA सर्टिफिकेशन. ROSTEC की रिपोर्ट 2026 तक आने की उम्मीद है, जिसके बाद निवेश और टाइमलाइन तय होगी. लक्ष्य है 2028 तक पहला भारतीय निर्मित IL-114-300 उड़ान भरे.
IL-114-300 सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि रणनीति, तकनीक और आत्मनिर्भरता का संगम है. अगर यह प्रोजेक्ट जमीन पर उतरा, तो भारत को एक ऐसा ‘उड़ता हुआ किला’ मिलेगा, जो आसमान से समंदर की गहराइयों तक दुश्मन पर नजर रख सकेगा.

3 hours ago
