Last Updated:August 06, 2025, 18:17 IST

तिरुवनंतपुरम: केरल हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को करारा झटका दिया है. कोर्ट ने दो टूक कहा कि जब सड़कें टूटी हों, सर्विस रोड अव्यवस्थित हो, और ट्रैफिक जाम से जनता परेशान हो, तो टोल वसूलने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है. यह फैसला एडापल्ली से मन्नुथी (NH-544) तक के हाईवे पर टोल कलेक्शन के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनाया गया. इस हिस्से में अंडरपास, फ्लाईओवर और ड्रेनेज वर्क की वजह से भारी ट्रैफिक जाम है. इसके अलावा, सर्विस रोड भी लंबे समय से खराब हालत में है. ऐसे में लोगों ने सवाल उठाया कि जब सफर ही सुरक्षित और सुगम नहीं, तो फिर टोल क्यों?
कोर्ट का स्पष्ट संदेश: जनता को ठगा नहीं जा सकता
जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक और जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन की डिवीजन बेंच ने कहा कि NHAI और उसके एजेंट्स का कर्तव्य है कि वे जनता को सुरक्षित, निर्बाध और व्यवस्थित एक्सेस दें. अगर यह नहीं हो रहा, तो टोल वसूलना कानूनन गलत है. कोर्ट ने आदेश दिया कि अगले चार हफ्तों तक टोल कलेक्शन तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाए. इस दौरान केंद्र सरकार को पब्लिक की शिकायतों को सुनते हुए समाधान निकालना होगा.
बेंच ने कहा कि जनता और सरकार के बीच एक भरोसे का रिश्ता होता है. जब सरकार उस भरोसे को तोड़ती है, तो फिर वह जनता पर जबरदस्ती टोल नहीं थोप सकती. कोर्ट ने दो टूक कहा, ‘कोई भी कॉन्ट्रैक्ट या समझौता जनता के हितों से ऊपर नहीं हो सकता. जब सड़कें इस्तेमाल लायक नहीं हैं, तो केवल कॉन्ट्रैक्ट का हवाला देकर टोल लेना सरासर अन्याय है.’
‘सलाह देने के बाद भी अनदेखी’
कोर्ट ने NHAI के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई. जजों ने कहा कि फरवरी 2025 से ही जनता की शिकायतें सामने आ रही थीं. कई बार अवसर देने के बावजूद NHAI ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. यह जनता के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने अब तक ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस मैनेजमेंट स्टैंडर्ड नहीं बनाए हैं. यह लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जा सकती.
‘टोल का मतलब बेहतर सुविधा होता है, सजा नहीं’
कोर्ट ने कहा कि टोल का मतलब होता है कि जनता को अच्छी सड़क, ट्रैफिक फ्री सफर और सुरक्षा मिले. लेकिन अगर रास्ता ही टूटा है, गड्ढों से भरा है, या निर्माण कार्य के कारण घंटों ट्रैफिक जाम है, तो ये टोल नहीं, जुर्माना जैसा हो गया.
बेंच ने केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए कि वह NHAI, राज्य के चीफ सेक्रेटरी और निजी पार्टनर (कंसेशनएयर) से चर्चा कर इसका हल निकाले. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरत हो तो प्रो-रेटा कटौती (partial toll) या पूरी तरह से टोल माफ करने जैसे विकल्प भी देखे जाएं.
Deepak Verma is a journalist currently employed as Deputy News Editor in News18 Hindi (Digital). Born and brought up in Lucknow, Deepak's journey began with print media and soon transitioned towards digital. He...और पढ़ें
Deepak Verma is a journalist currently employed as Deputy News Editor in News18 Hindi (Digital). Born and brought up in Lucknow, Deepak's journey began with print media and soon transitioned towards digital. He...
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Location :
Thiruvananthapuram,Kerala
First Published :
August 06, 2025, 18:17 IST