वो देश जहां देवताओं और रूहों से है छातों का संबंध, बीमारियों में भी आता है काम

2 weeks ago

छतरी... यह शब्द पढ़ते ही आपके जहन में यह तसव्वुर आया होगा कि इसका इस्तेमाल धूप और बारिश से बचने के लिए किया जाता है. आपका ऐसा सोचना गलत भी नहीं है लेकिन एक देश ऐसा है जहां पर छतरियों के बेहद मुकद्दस यानी पवित्र माना जाता है और इसका संबंध देवताओं और रूहों जोड़ा जाता है. चलिए जानते हैं आज इस दिलचस्प जानकारी के बारे में.

हिंदुस्तान में आम तौर पर बारिश या फिर तेज धूप के समय में लोगों को छतियों का इस्तेमाल करते हुए देखा होगा और जब काम खत्म हो जाता है तो उसे घर के किसी कोने में डाल दिया जाता है. कई बार तो छतरी को ढूंढने को लिए भारी मेहनत करनी होती है, क्योंकि पिछली बार हमने छतरी कहां रखी थी याद ही नहीं रहता है.

देवताओं और आत्माओं का छातों से संबंध

हालांकि जापान एक ऐसा देश हैं जहां छतरियों को बहुत पवित्र माना जाता है. BBC उर्दू ने हाल ही में इससे संबंधित एक रिपोर्ट पेश की है. रिपोर्ट में बताया गया कि जापान में छातों का संबंध आध्यात्मिक और ताकत से है. एक जापानी प्रोफेसर के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि जापानी परंपराओं के मुताबिक छाता एक ऐसी चीज है जो देवताओं और आत्माओं को आकर्षित करती है.

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जापान में छाते कब से चलन में हैं?

11वीं सदी के दौरान जापान के अंदर छतरियों का चलन शुरू हुआ. उस समय तक छतरियों का इस्तेमाल धूप या फिर बारिश से बचने की बजाए रूहानी और सियासी तौर पर किया जाता था. शुरुआत में छतरियां सिर्फ धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों के लिए हुआ करती थीं और उस समय दरबान या नौकर इन छतरियों को पकड़कर इनकी सेवा करते थे. जापानियों का मानना है कि छाते की छांव वो जगह है जहां रूहें उतरती हैं.

जापान में छातों की अहमियत

हर साल कई ऐसी आयोजन भी होते हैं जिनमें छातों की अहमियत को दर्शाया जाता है. हर साल 16 अगस्त की शाम इन छतियों का थामकर सांस्कृति डांस भी किया जाता है. ऐसा करने वाले लोगों का मानना है कि इससे रूहों को वापस अपने जहान में जाने का रास्ता दिखाई देता है. इसके अलावा भी कई तरह की मान्यताओं जापान में छतरियों को लेकर हैं.

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