Last Updated:March 05, 2026, 19:45 IST
आज भारत में ज्यादातर डिजिटल पेमेंट्स यूपीआई के जरिए होते हैं और लोग सेकंडों में पैसा भेज देते हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इसके पीछे कौन सा सिस्टम काम करता है. असल में यूपीआई की स्पीड इसके रियल टाइम आर्किटेक्चर और सेंट्रलाइज्ड सिस्टम की वजह से संभव हो पाती है. जब कोई यूजर पे बटन दबाता है तो उसके पीछे कई सिस्टम एक साथ काम करते हैं. बैंक, ऐप और एनपीसीआई के नेटवर्क के बीच कुछ ही सेकंड में डेटा का आदान प्रदान होता है, जिसकी वजह से पैसा तुरंत दूसरे अकाउंट में पहुंच जाता है.

नई दिल्ली. भारत में डिजिटल पेमेंट का चेहरा तेजी से बदल चुका है और इस बदलाव के केंद्र में है यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस. कुछ साल पहले तक बैंक ट्रांसफर में समय लगता था, लेकिन आज यूपीआई के जरिए पैसा कुछ ही सेकंड में दूसरे खाते में पहुंच जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह इसका रियल टाइम टेक्नोलॉजी सिस्टम है जिसे नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ऑपरेट करता है. असल में यूपीआई पूरी तरह नई तकनीक नहीं है बल्कि यह इमीडिएट पेमेंट सर्विस यानी आईएमपीएस की बुनियाद पर बना है. आईएमपीएस एक ऐसा बैंकिंग नेटवर्क है जो चौबीसों घंटे और सातों दिन काम करता है.
जहां पहले के सिस्टम जैसे नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर और रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट बैच में काम करते थे और ट्रांसफर में समय लग सकता था, वहीं आईएमपीएस तुरंत ट्रांजैक्शन पूरा कर देता है. यूपीआई इसी तेज नेटवर्क को एक आसान मोबाइल इंटरफेस के जरिए यूजर्स तक पहुंचाता है.
जब आप ‘पे’ दबाते हैं तो क्या होता है
जैसे ही कोई यूजर अपने मोबाइल ऐप पर ‘पे’ बटन दबाता है, पूरा सिस्टम एक साथ एक्टिव हो जाता है. सबसे पहले ऐप यूजर से यूपीआई पिन लेकर उसे सुरक्षित तरीके से एन्क्रिप्ट करके एनपीसीआई के सेंट्रल सिस्टम तक भेजता है. इसके बाद एनपीसीआई भेजने वाले बैंक को संदेश देता है कि खाते से पैसा डेबिट किया जाए. बैंक बैलेंस चेक करता है और पैसा काट लेता है. जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है, एनपीसीआई तुरंत पाने वाले बैंक को सूचना भेज देता है.
पाने वाला बैंक उस रकम को संबंधित अकाउंट में क्रेडिट कर देता है और कुछ ही सेकंड में दोनों पक्षों को सफल ट्रांजैक्शन का मैसेज मिल जाता है. यह पूरी प्रक्रिया आमतौर पर दो से पांच सेकंड के भीतर पूरी हो जाती है.
वीपीए से आसान हुआ पूरा सिस्टम
यूपीआई की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसमें लंबा अकाउंट नंबर या आईएफसी कोड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती. इसकी जगह एक सरल पहचान का इस्तेमाल किया जाता है जिसे वर्चुअल पेमेंट एडरेस (वीपीए) कहा जाता है. यह बिल्कुल ईमेल आईडी की तरह होता है, जैसे example@bank. इसकी वजह से यूजर अपनी बैंक डिटेल्स शेयर किए बिना भी आसानी से पैसे भेज सकता है.
पैसा तुरंत पहुंचता है, लेकिन हिसाब बाद में होता है
यूपीआई के पीछे एक और महत्वपूर्ण तकनीकी व्यवस्था काम करती है जिसे डेफर्ड नेट सेटलमेंट कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि यूजर के खाते में पैसा तुरंत दिखाई देता है और वह तुरंत इस्तेमाल भी किया जा सकता है. लेकिन बैंकों के बीच जो असली वित्तीय सेटलमेंट होता है, वह बाद में बड़े स्तर पर एक साथ किया जाता है. इससे ट्रांजैक्शन तेज भी रहता है और सिस्टम पर दबाव भी कम पड़ता है. इसी वजह से आज UPI भारत के सबसे तेज और भरोसेमंद डिजिटल पेमेंट सिस्टम के रूप में उभर चुका है और करोड़ों लोग रोजाना इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
March 05, 2026, 19:45 IST

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