Last Updated:January 28, 2026, 17:42 IST
एम्स नई दिल्ली के ट्रांसजेंडर क्लिनिक में हर साल 300 नए मरीज आ रहे हैं. ये मरीज अपना जेंडर बदलवाने के लिए आ रहे हैं. इसके लिए यहां न केवल इन्हें हार्मोनल थरेपीज दी जा रही हैं बल्कि सर्जरी और काउंसलिंग की भी सुविधा मौजूद है. इस बारे में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट प्रो. राजेश खडगावत डॉ. मनीष बंसल और प्रो. प्रताप सरन से जानते हैं..
एम्स नई दिल्ली में हर साल 300 मरीज जेंडर चेंज कराने के लिए आ रहे हैं. समाज में ट्रांसजेंडरों के साथ व्यवहार जग-जाहिर है, उन्हें अलग तरह से ट्रीट किया जाता है क्योंकि उनका शरीर तो अलग जेंडर प्रदर्शित करता है लेकिन उनकी सोच दूसरे जेंडर की तरह व्यवहार करती है. एम्स के डॉक्टरों की मानें तो ट्रांसजेंडर या नॉन-बाइनरी व्यक्ति भी किसी अन्य बच्चे की तरह ही जन्म लेते हैं. जैसे लड़के-लड़के के रूप में और लड़कियां-लड़की के रूप में पैदा होती हैं, वैसे ही ये बच्चे भी शारीरिक रूप से सामान्य होते हैं लेकिन धीरे-धीरे उन्हें यह एहसास होता है कि उनकी जेंडर पहचान उनके जन्म के समय निर्धारित लिंग से मेल नहीं खाती. उन्हें लगता है कि उन्हें अलग तरह से लड़का या लड़की होना चाहिए था, और इसी सोच के साथ वे एम्स नई दिल्ली के ट्रांसजेंडर क्लीनिक में आते हैं, जहां उनका इलाज किया जा रहा है. एम्स में रोजाना ऐसे मामले आ रहे हैं और जेंडर बदलवा रहे हैं.
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ट्रांसजेंडर क्लिनिक में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. डॉक्टरों की मानें तो इस क्लीनिक में हर साल लगभग 300 नए मरीज रजिस्टर होते हैं और करीब 600 मरीज फॉलो-अप इलाज के लिए दोबारा आते हैं. सबसे खास बात है कि अपने जेंडर से असंतुष्ट ये इन मरीजों में अधिकांश की उम्र 20–30 वर्ष बीच है. यह भारत में जेंडर-अफर्मिंग स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बढ़ती जागरूकता, स्वीकार्यता और पहुंच को दर्शाता है.
इस बारे में एम्स दिल्ली के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रो.राजेश खडगावत कहते हैं कि एम्स ऐसा संस्थान है जो एक ही छत के नीचे ट्रांसजेंडर के लिए समग्र देखभाल प्रदान करता है, इसमें हार्मोनल थेरेपी, मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन और सर्जिकल इंटरवेंशन शामिल हैं. उन्होंने कहा कि अब मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. एम्स ट्रांसजेंडर उपचार के लिए एक समन्वित, बहु-विषयक दृष्टिकोण उपलब्ध कराता है.
कैसे किया जाता है इलाज?
एंडोक्राइनोलॉजी की भूमिका को समझाते हुए प्रो. खडगावत ने बताया कि जेंडर से जुड़ी शारीरिक विशेषताएं काफी हद तक हार्मोन पर निर्भर करती हैं. जब कोई ट्रांसजेंडर व्यक्ति हमारे पास आता है, तो उसका पहले हार्मोनल इलाज किया जाता है. जैसे जन्म के समय महिला माने गए किसी व्यक्ति को पुरुष के रूप में ट्रांजिशन करना हो तो हम महिला हार्मोन को कम करते हैं और बाहर से पुरुष हार्मोन देते हैं. इन हार्मोनल उपचारों से धीरे-धीरे शारीरिक बदलाव आते हैं.
उन्होंने आगे बताया कि फीमेल-टू-मेल ट्रांजिशन में चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ उगने लगती है और आवाज भारी होती जाती है, जबकि मेल-टू-फीमेल ट्रांजिशन में स्तनों का विकास होता है और शरीर की बनावट में बदलाव आने लगता है. मन से स्त्री सोच के साथ ही उसका शरीर भी स्त्रीत्व दर्शाता है.
क्या सर्जरी और काउंसलिंंग की भी पड़ती है जरूरत?
जेंडर बदलाव की इस प्रक्रिया में सिर्फ एंडोक्राइनोलॉजी ही नहीं बल्कि साइकेट्री और सर्जरी की भी विशेष भूमिका होता है. एम्स दिल्ली में साइकेट्री विभाग के प्रमुख प्रो. प्रताप सरन ने बताया कि क्लिनिक तीन चरणों में मूल्यांकन करता है. उन्होंने कहा, ‘पहले हम यह तय करते हैं कि जेंडर असंगति मौजूद है या नहीं. दूसरे चरण में कम से कम एक साल तक व्यक्ति को मॉनिटर किया जाता है ताकि उनकी जेंडर पहचान में निरंतरता सुनिश्चित हो सके. इस अवलोकन अवधि में रियल-लाइफ या सामाजिक ट्रांजिशन भी शामिल होता है.
प्रो. सरन ने समझाया कि व्यक्ति को उस जेंडर के रूप में सामाजिक जीवन जीना और कार्य करना होता है, जिससे वह खुद को जोड़ता है. इस निरंतर प्रक्रिया के बाद ही हम प्रमाण-पत्र जारी करते हैं, जिससे वे बड़े जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी करा सकें.'
किन अंगों की सर्जरी संभव होती है?
वहीं सर्जरी को लेकर एम्स दिल्ली के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रो. मनीष सिंघल ने बताया कि जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी मरीज की जरूरतों के अनुसार कई चरणों में की जाती है. इनमें स्तन सर्जरी से लेकर जटिल जननांग पुनर्निर्माण, जिसमें पेनिस रिकंस्ट्रक्शन भी शामिल है, जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं. महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कवर की जाती हैं, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है.
एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि हर साल बड़ी संख्या में नए पंजीकरण और फॉलो-अप मरीजों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए दीर्घकालिक और निरंतर स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत है. हालांकि बहु-विषयक विशेषज्ञता, नैतिक प्रोटोकॉल और सरकार-समर्थित वित्तीय सहायता के साथ, एम्स दिल्ली समावेशी, साक्ष्य-आधारित और संवेदनशील ट्रांसजेंडर देखभाल के एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है.
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प्रिया गौतमSenior Correspondent
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्...और पढ़ें
Location :
Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
January 28, 2026, 17:42 IST

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