मिग-29 से मात खा गया सुखोई-57? रूसी 5th जेन फाइटर में आखिर क्या थी कमी, राफेल मार गया बाजी!

1 hour ago

Last Updated:January 22, 2026, 13:31 IST

मिग-29 से मात खा गया SU-57? रूसी 5th जेन जेट में क्या कमी, राफेल मार गया बाजी!भारत 114 राफेल खरीदने की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सुखोई-57 को क्यों खारिज किया गया.

भारत सरकार फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के फैसले पर जल्द ही मुहर लगाने वाली है. यह करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये का डिफेंस डील है. राफेल एक 4.5 पीढ़ी का जेट है. चीन और पाकिस्तान 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स से लैस हैं. ऐसे में भारत पर अपने एयरफोर्स को अत्याधुनिक जेट्स से लैस करने का दबाव काफी अधिक है. भारत के पास राफेल के साथ 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स सुखोई-57 और अमेरिका एफ-35 का विकल्प था. लेकिन, फिलहाल के लिए राफेल को ही फाइनल किया जा रहा है. हालांकि, अभी तक सुखोई-57 पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. कुछ एक्सपर्ट दावा कर रहे हैं कि भारत सुखोई-57 के भी 60 यूनिट खरीद सकता है. यह उसकी प्लानिंग का हिस्सा है.

इस बीच एक रिपोर्ट आई है. यह रिपोर्ट यूक्रेन के एक पायलट के बयान पर आधारित है. इसमें सुखोई-57 को लेकर बेहद गंभीर दावे किए गए हैं. वेबसाइट united24media.com पर यह रिपोर्ट छपी है.

क्या थी रूस की प्लानिंग?

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस ने अपने पांचवीं पीढ़ी के इस फाइटर जेट को यूक्रेन के साथ जंग में नुमाइश करने का फैसला किया था. ताकि इस नुमाइश के आधार पर इस जेट की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग की जा सके. रूस ने इस जेट को 16 साल पहले बनाया था. लेकिन, आज तक इस जेट को अपेक्षित ग्राहक नहीं मिले हैं. वह इस जेट को भारत को बेचने की पुरजोर कोशिश कर रहा है. लेकिन, बीते 16 सालों में रूस इस जेट के लिए केवल एक देश अल्जेरिया के साथ डील कर पाया है. इस डील को फरवरी 2025 में कंफर् किया गया था.

यूक्रेन के पायलट ने क्या दावा किया?

मिग-29 लड़ाकू विमान के यूक्रेनी पायलट ने नाम न छापने की शर्त पर रेडियो स्वोबोडा (Radio Svoboda) को बताया कि रूसी सेना ने डोनेत्सके इलाके में एसयू-57 की तैनाती की थी. उसका मकसद था कि इस फाइटर जेट को जंग के मैदान में टेस्ट किया जाए और फिर दुनिया के सामने उसकी मार्केटिंग की जाए. इसके लिए जरूरी था कि सुखोई-57 यूक्रेन के विमानों को मार गिराए. लेकिन, यूक्रेन की सेना सचेत थी. उसने एसयू-57 के हर एक मूवमेंट की स्टडी कर रखी थी. इसके बाद उसने काउंटर रणनीति बनाई और रूस को उसके मकसद में कामयाब होने से रोक दिया. सुखोई-57 यूक्रेन को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाया. उसका मिशन पूरा नहीं हुआ. इस तरह रूस दुनिया के सामने इस जेट के लिए ढिंढोरा नहीं पीट पाया.

मिग-29 भी रूसी फाइटर जेट्स हैं. सोवियत संघ के दौरा से ही ये जेट उसकी सेना में हैं. सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन के एयरफोर्स के पास भी ऐसे कई फाइटर जेट हैं.

सुखोई-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है. फोटो- रायटर

सुखोई-57 को लेकर सवाल

रूस सुखोई-57 को पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट बताता है. लेकिन, कुछ रिपोर्ट इस जेट की फुल स्टील्थ क्षमता पर सवाल उठाते हैं. इस जेट में इज्डेलिये117 (Izdeliye 117) इंजन लगा है. इसके एवियोनिक्स को अपग्रेड किया गया है लेकिन, पश्चिमी देशों के रक्षा विशेषज्ञ जंगी मैदान में इसके परफॉर्मेंस पर सवाल उठाते हैं.

राफेल वाया सुखोई-57

पब्लिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध डेटा की माने तो सुखोई-57 एक बेहद ताकतवर फिफ्थ जेन फाइटर जेट हैं. इसकी स्पीड 2 मैक से अधिक है जबकि राफेल की स्पीड 1.8 मैक की है. सुखोई-57 के भीतर हथियार छिपे होते हैं. इसमें आसमान में गोते लगाने यानी मैनेवरिंग की क्षमता भी शानदार है. डॉग फाइट की स्थिति में यह किसी भी अन्य फाइटर जेट पर भारी पड़ सकता है. इस मामले में राफेल, सुखोई से थोड़ा उन्नीस है. लेकिन, राफेल के पक्ष में यह बात जाती है कि वह वार टेस्टेड जेट है. जबकि सुखोई-57 के बारे में सभी दावे अभी तक कागजी है. यूक्रेन युद्ध में रूस इस जेट का बहुत इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है.

भारत फ्रांस से 114 राफेल खरीदने की तैयारी में है. फोटो- रायटर

कौन ज्यादा कीमत

जहां तक कीमत की बात है तो सुखोई-57 पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट होने के बावजूद राफेल से सस्ता है. एक सुखोई-57 की कीमत 80 मिलियन यानी करीब 720 करोड़ रुपये बतायी जा रही है. वहीं राफेल की कीमत 120 मिलियन यानी करीब 1100 करोड़ रुपये है. ये रॉ फाइटर जेट्स की कीमत है. इसमें हथियारों के दाम शामिल नहीं है.

सुखाई पर राफेल भारी?

भारतीय एयरफोर्स की ओर से सुखोई-57 की जगह राफेल को चुनने के पीछे कई तर्क हैं. इसमें सबसे बड़ा तर्क यह है कि राफेल को जंग के मैदान में टेस्ट किया जा चुका है. इसमें बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर है. ये तेजी से भारत को मिल सकते हैं. इस फाइटर जेट को लेकर एक तरह की जियोपॉलिटिक स्टैबलिटी है. फ्रांस सीधे तौर पर किसी जंग में नहीं उलझा और निकट भविष्य में भी उसके किसी जंग में उलझने की संभावना बहुत कम है. ऐसे में उसके साथ डील होने पर सप्लाई में कोई अड़चन नहीं आएगी. दूसरी तरफ रूस जंग में उलझा हुआ है. इस कारण उसका पूरा इको-सिस्टम चरमरा गया है. वह काफी पहले हो चुके कई डील को पूरा नहीं कर पा रहा है. इसमें भारत द्वारा खरीदा गया एस-400 डिफेंस सिस्टम भी शामिल है. इसके साथ ही सुखोई-57 के इंजन और स्टील्थ क्षमता से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिला है.

About the Author

संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें

First Published :

January 22, 2026, 13:28 IST

homenation

मिग-29 से मात खा गया SU-57? रूसी 5th जेन जेट में क्या कमी, राफेल मार गया बाजी!

Read Full Article at Source