Last Updated:January 22, 2026, 18:05 IST
Gold Loan in India : भारत में सोने की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं और इसी के साथ गोल्ड लोन की डिमांड भी बढ़ती जा रही है. आलम ये है कि भारतीयों ने 4 लाख करोड़ का सोना गिरवी रख दिया है.
देश में गोल्ड लोन की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है. नई दिल्ली. सोने की आसमान छूती कीमतों के बीच भारतीय नागरिकों ने अपना करीब 4 लाख करोड़ रुपये का सोना गिरवी रख दिया है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया कि जिस तरह से गोल्ड के भाव लगातार बढ़ रहे हैं, अगले साल तक गिरवी रखे सोने की कीमत 40 फीसदी और बढ़ सकती है. अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह सोना भारतीयों ने रखा कहां और इसे गिरवी रखने के पीछे का कारण क्या है.
क्रिसिल के अनुसार, गोल्ड लोन में विशेषज्ञता रखने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की प्रबंधन आधीन संपत्तियां इस वित्तवर्ष और अगले वित्त वर्ष के बीच लगभग 40 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज करने के लिए तैयार हैं, जो मार्च 2027 तक 4 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएंगी. यह बढ़ोतरी ऊंची सोने की कीमतों, सुरक्षित क्रेडिट की ओर रुझान और विकसित रेगुलेटरी माहौल के चलते होगी, जो वित्तवर्ष 2023 से 2025 के बीच दर्ज 27 फीसदी सीएजीआर से कहीं ज्यादा है.
9 महीने 68 फीसदी बढ़े दाम
क्रिसिल रिपोर्ट के मुताबिक, इस वित्तवर्ष के पहले नौ महीनों में सोने की कीमतें करीब 68 फीसदी बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं. इससे गिरवी रखे गए सोने का मूल्य बढ़ता है, जिससे कर्जदाताओं को अधिक कर्ज बांटने में मदद मिलती है. इसके अलावा, असुरक्षित कर्ज जैसे क्षेत्रों से क्रेडिट की सीमित उपलब्धता के बीच, उधारकर्ता अन्य फंडिंग स्रोतों की तलाश कर रहे हैं. इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए गोल्ड लोन एनबीएफसी (बड़ी और मझोली दोनों) बैंकों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद अपने बाजार में विस्तार कर रही हैं.
बढ़ रहा गोल्ड लोन का कारोबार
क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक अपर्णा किरुबाकरण ने कहा कि बड़ी गोल्ड लोन एनबीएफसी, जिनकी ब्रांड इमेज मजबूत है, वे अपने मौजूदा ब्रांच नेटवर्क में पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही हैं. वहीं, मझोली कंपनियां दोहरी रणनीति अपना रही हैं, एक तरफ ब्रांच नेटवर्क बढ़ा रही हैं और दूसरी तरफ बड़ी एनबीएफसी और बैंकों के लिए ओरिजिनेटिंग पार्टनर के तौर पर काम कर रही हैं. नियामकीय मोर्चे पर, छोटी राशि के गोल्ड लोन के लिए लोन-टू-वैल्यू (एलटीवी) मानदंडों को सरल बनाना, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, एनबीएफसी को कर्ज देने के लिए अतिरिक्त अवसर देगा.
रिजर्व बैंक ने सख्त कर दिए हैं नियम
रिपोर्ट में यह भी जोर दिया गया कि गोल्ड लोन एनबीएफसी को जोखिम प्रबंधन और संचालन प्रक्रियाओं पर सख्त नियंत्रण रखना होगा, जिसमें गिरवी रखे गए सोने की शुद्धता, वजन और प्रामाणिकता की जांच शामिल है. इसके अलावा, ब्रांच स्तर पर समय-समय पर आंतरिक ऑडिट जरूरी होंगे, ताकि नीलामी के समय कोई अनहोनी न हो. रिजर्व बैंक ने ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के लिए इन नियमों को सख्त बना दिया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 22, 2026, 18:05 IST

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