भगवान को तो बख्श देते... सबरीमाला चोरी केस में SC ने किसकी कर दी बोलती बंद?

1 day ago

Last Updated:January 05, 2026, 17:06 IST

Sabarimala Gold Theft Case: सबरीमाला स्वर्ण घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व बोर्ड सदस्य केपी शंकर दास को कड़ी फटकार लगाई. मंदिर की स्वर्ण-परत वाली प्लेटों में हेराफेरी के आरोपी दास ने हाई कोर्ट की टिप्पणियां हटाने की गुहार लगाई थी. जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि बोर्ड सदस्य के रूप में वे इस लूट के जिम्मेदार हैं. मामले की SIT रिपोर्ट 19 जनवरी को पेश होगी.

भगवान को तो बख्श देते... सबरीमाला चोरी केस में SC ने किसकी कर दी बोलती बंद?सुप्रीम कोर्ट ने सख्‍त रुख अख्तियार किया.

नई दिल्ली. आस्था के उस पावन धाम में जहां भक्त अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा और सोना भगवान के चरणों में अर्पित कर देते हैं, वहां रक्षक ही भक्षक बन गए? आपने कम से कम भगवान और मंदिर को तो छोड़ दिया होता. यह मर्मभेदी टिप्पणी देश की सर्वोच्च अदालत ने उन लोगों के लिए की है, जिन पर केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर के सोने की चोरी का आरोप है. मामला इतना गंभीर है कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने आरोपी की याचिका सुनते ही अपनी नाराजगी जाहिर कर दी.

क्या है सबरीमाला गोल्‍ड चोरी केस?
यह पूरा विवाद सबरीमाला मंदिर की स्वर्ण-परत वाली तांबे की प्लेटों (Gold-plated Copper Plates) और अन्य कलाकृतियों की चोरी और हेराफेरी से जुड़ा है. दरअसल, मंदिर के जीर्णोद्धार के समय इन कलाकृतियों को इलेक्ट्रोप्लेटिंग और मरम्मत के लिए सौंपा गया था, लेकिन जब ये वस्तुएं वापस आईं, तो उनमें सोने की मात्रा पहले के मुकाबले काफी कम पाई गई. केरल हाई कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को संदेह है कि मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने मंदिर के सोने को निजी लाभ के लिए बाजार में बेच दिया और बड़े पैमाने पर हेराफेरी की.

सुप्रीम कोर्ट में क्यों मिली फटकार?
देवासोम बोर्ड के पूर्व सदस्य केपी शंकर दास ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनकी मांग थी कि केरल हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ जो प्रतिकूल टिप्पणियां की हैं उन्हें हटा दिया जाए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से साफ इनकार कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा:

·  जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते: बोर्ड के सदस्य होने के नाते शंकर दास मंदिर में हुई इस लूट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं.

·  सिर्फ उम्र का मिला फायदा: हाई कोर्ट ने शंकर दास को राहत उनकी उम्र और खराब सेहत को देखकर दी थी, न कि केस की योग्यता (Merits) के आधार पर.

·  अपराध की गंभीरता: जस्टिस बेंच ने टिप्पणी की कि यह अपराध बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर मंदिर और देवता की संपत्ति से खिलवाड़ हुआ है.

19 जनवरी को आएगी SIT रिपोर्ट
केरल हाई कोर्ट की देवासोम बेंच ने SIT को जांच पूरी करने के लिए छह सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है. पुलिस ने अब तक हुई जांच की अंतरिम प्रगति से कोर्ट को अवगत कराया है. अब पूरी नजर 19 जनवरी पर टिकी है जब SIT अपनी अंतरिम जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करेगी. इस मामले ने न केवल केरल की राजनीति में भूचाल ला दिया है बल्कि मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें

First Published :

January 05, 2026, 17:05 IST

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