'पति का नाम हसबैंड-हसबैंड, पिता का नाम फादर-फादर...' आरजेडी ने फोड़ा 'एटम बम'?

3 weeks ago

Last Updated:August 06, 2025, 19:18 IST

Bihar Assembly Elections and SIR News: बिहार में मतदाता सूची विवाद बढ़ता जा रहा है. आरजेडी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि मधु कुमारी के पति का नाम हसबैंड हसबैंड और माता का नाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया लिखा है.

'पति का नाम हसबैंड-हसबैंड, पिता का नाम फादर-फादर...' आरजेडी ने फोड़ा 'एटम बम'?आरजेडी ने इलेक्शन कमीशन पर फिर ये आरोप लगाया.

पटना. बिहार में मतदाता सूची विवाद नया रूप लेता जा रहा है. आरजेडी इलेक्शन कमीशन पर हर रोज कुछ न कुछ ऐसा आरोप लगाती है, जिससे बखेड़ा खड़ा हो जाता है. आरजेडी ने मंगलवार को एक बार फिर से चुनाव आयोग पर एक ऐसा आरोप लगाया है, जिससे बवाल बढ़ सकता है. आरजेडी की मीडिया सेल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें मधु कुमारी नाम की महिला का पति का नाम हसबैंड हसबैंड लिखा और माता का नाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया लिखा है. आरजेडी का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. अब इंतजार है इलेक्शन कमीशन की तरफ से उस जवाब का, जिससे यह साबित हो जाएगा कि आरजेडी का यह आरोप ‘सुतली बम’ था या फिर ‘एटम बम’ साबित होगा?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान चरम पर है. राष्ट्रीय जनता दल चुनाव आयोग पर इस प्रक्रिया के खामियों को उजागर करने का दावा कर रही है और तीखा हमला बोला रही है. आरजेडी इसे ‘वोटबंदी’ करार दे रही है. आरजेडी का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के जरिए गरीब, दलित, और मुस्लिम वोटरों को मतदाता सूची से हटाया जा रहा है, जिसका सीधा असर महागठबंधन के वोट बैंक पर पड़ेगा. दूसरी ओर, एनडीए और चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची की शुद्धता के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं.

आरजेडी का इलेक्शन कमीशन पर बड़ा आरोप

RJD ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा, “पति का नाम: हसबैंड हसबैंड, माता का नाम: इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया. इस पोस्ट में RJD ने SIR प्रक्रिया को ‘NRC का बैकडोर और वोटिंग अधिकारों की डकैती’ करार दिया. तेजस्वी यादव ने इसे और हवा देते हुए कहा, ‘यह प्रक्रिया दलित, पिछड़े, और प्रवासी मजदूरों के खिलाफ साजिश है. अगर एक सीट से 1% वोटर भी हटे तो 3,200 वोटों का नुकसान होगा, जो कई सीटों पर नतीजे बदल सकता है.’

आरजेडी के आरोप में कितना है दम?

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार में SIR प्रक्रिया शुरू की, जिसका मकसद मतदाता सूची से गैर-नागरिकों और मृत व्यक्तियों के नाम हटाना और पात्र नागरिकों को जोड़ना था. चुनाव आयोग के मुताबिक, ‘2003 के बाद यह पहला बड़ा पुनरीक्षण है.’ इस प्रक्रिया में अब तक 61 से 64 लाख नाम हटाए गए हैं, जिनमें 18 लाख मृत वोटर और 26 लाख ऐसे लोग शामिल हैं जो बिहार से बाहर या अन्य क्षेत्रों में चले गए हैं. आयोग ने 11 दस्तावेजों की सूची जारी की है, जिसमें आधार, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र शामिल नहीं हैं, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं.

झूठ दावा पर क्या आरजेडी पर कार्रवाई संभव?

आरजेडी ने कहा है कि चुनाव आय़ोग की यह प्रक्रिया गरीबों और प्रवासियों के लिए अव्यावहारिक है. जन्म प्रमाणपत्र या मैट्रिक प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज ग्रामीण बिहार में हर किसी के पास नहीं हैं. तेजस्वी यादव ने इसे ‘BJP-RSS की साजिश’ करार देते हुए दावा किया कि सीमांचल जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम और दलित वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है, जहां 47% मुस्लिम आबादी है.

मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया के खिलाफ आरजेजी, कांग्रेस, टीएमसी, एआईएमआईएम और इंडिया एलांइस के अन्य दल सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं. 7 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू की और चुनाव आयोग को आधार, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों को शामिल करने की सलाह दी. आरजेडी और अन्य याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया चुनाव से ठीक पहले शुरू करना संदिग्ध है और इससे लाखों वोटरों के अधिकार छिन सकते हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया और इसीआई को प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच अब आरजेडी ने इसे बिहार चुनाव 2025 में मुद्दा बना लिया है. इसका असर बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर पड़ सकता है. इसी को लेकर अब आरजेडी ने मुद्दा बनाकर नया ‘बम’ फोड़ा है, जिसमें एक मतदाता का नाम मधु कुमारी कुमारी है और हसबैंड का नाम हसबैंड-हसबैंड है. माता का नाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया, मकान संख्या 1130, उम्र 22 साल लिखा है. इस बारे में चुनाव आयोग का रिएक्शन आने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो ही जाएगा साथ में पता चल जाएगा ॉक यह आरजेडी का ‘सुतली बम’ था या फिर ‘एटम बम’?

रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...और पढ़ें

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...

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First Published :

August 06, 2025, 19:18 IST

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