Cuba Fuel Crisis: कैरेबियाई देश क्यूबा पर आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा है. देश वर्तमान समय में इतिहास के सबसे भीषण दौर से गुजर रहा है. आलम ऐसा है कि इस वक्त देश में न तेल है, न बिजली और न ही लोगों के पास पर्याप्त खाना. इस छोटे से देश की ऐसी स्थिति का कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए 'तेल ब्लॉककेड' मतलब तेल की नाकेबंदी और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को बताया जा रहा है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबो को 'Failed Nation' बताते हुए दबाव और बढ़ा दिया है.
ईंधन की भारी किल्लत का देश पर असर
अमेरिका पिछले 60 सालों से क्यूबा पर कड़ा प्रतिबंध और सीमित राजनयिक संबंध बनाई हुई है, जिससे क्यूबा की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है. इतना ही अमेरिका ने क्यूबा को होने वाली तेल की सप्लाई पर कड़ा पहरा बिठा दिया है. क्यूबा पहले वेनेजुएला और फिर मेक्सिको से तेल की सप्लाई करता था, लेकिन अब अमेरिका ने उन देशों पर भी प्रतिबंधों की तलवार लटका दी है. इसका नतीजा ये हुआ कि क्यूबा में ईंधन का स्टॉक लगभग खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है. इसके साथ-साथ सड़कों पर कूड़ा उठाने वाले ट्रक खड़े हो गए हैं, जिससे शहरों में गंदगी के कारण स्वास्थ्य संकट पैदा हो रहा है. वहीं पेट्रोल पंपों पर महीनों तक चलने वाली लंबी वेटिंग लिस्ट है और ऐप के जिरए अपनी बारी आने का लोग इंताजर करने पर मजबूर हैं.
WFP ने दी भुखमरी की चेतावनी
क्यूबा में केवल तेली की कमी का संकट ही नहीं है. बल्कि देश में बिजली संकट और पर्याप्त भोजन की कमी से भी लोग परेशान हैं. दरअसल तेल की कमी होने का सीधा असर देश के पावर ग्रिड पर पड़ता है. ऐसे में क्यूबा के बड़े हिस्से में रोजाना घंटों बिजली कट रहे हैं. बिजली न होने से उद्योग ठप होने के साथ-साथ आम लोगों का खाना बनाना और रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईंधन की कमी के कारण ताजे भोजन की ढुलाई नहीं हो पा रही है, जिससे देश में भुखमरी जैसे हालात बन सकते हैं.
ट्रंप की डील
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को बर्बाद करने का पक्का इरादा बना लिया है. इसको लेकर क्यूबा में प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ उन्होंने क्यूबा के साथ व्यापार कर रहे दूसरे देशों पर भी भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी है. ट्रंप का कहना है कि क्यूबा एक विफल राष्ट्र है और उसे बचने के लिए अमेरिका के साथ डील करनी ही होगी. वहीं दूसरी तरफ, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एक्सपर्ट ने अमेरिका के इस हरकत को इंटरनेशनल लॉ के खिलाफ और एक इन ह्यूमन एक्ट बताया है.

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