AI से जॉब जाने के सवाल पर पीएम मोदी ने क्या कहा? बताया भारत की क्‍या तैयारी, पढ़ें पूरा इंटरव्यू

1 hour ago

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्‍या सच में नौकर‍ियां खा जाएगा? भारत पर इसका क्‍या असर होगा? भारत इनसे न‍िपटने के लिए क्‍या तैयारी कर रहा है? ऐसे ही सवालों का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द‍िया. AI को लेकर दुन‍ियाभर में मची हलचल के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने ANI को द‍िए खास इंटरव्‍यू में कहा, जहां दुनिया एआई से दूरियां बढ़ने को लेकर चिंतित है, वहीं भारत इसका उपयोग दूरियां मिटाने के लिए कर रहा है. हम इसे भविष्य की समस्या नहीं बल्कि आज की जरूरत के तौर पर देख रहे हैं. सवाल जवाब के जर‍िये समझ‍िए पूरा इंटरव्‍यू…

एआई से जॉब मार्केट में अन‍िश्च‍ितता पर

पीएम मोदी ने कहा, मैं समझता हूं कि हमारे युवाओं को AI से जॉब मार्केट में बदलाव की चिंता है. लेकिन तैयारी ही डर का सबसे अच्छा इलाज है. इसी वजह से हम लोगों को AI के लिए स्किलिंग और री-स्किलिंग में निवेश कर रहे हैं. सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी स्किलिंग पहलों में से एक शुरू की है. हम इसे भविष्य की समस्या की तरह नहीं बल्कि आज की जरूरत की तरह देख रहे हैं. सही स्किल्स और तैयारी के साथ हमारे युवा भविष्य की नौकरियों का नेतृत्व करेंगे.

तकनीक से काम खत्‍म होने के सवाल पर क्‍या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, AI एक फोर्स मल्टीप्लायर है, जिससे डॉक्टर, वकील और शिक्षक भी ज्यादा लोगों तक पहुंच पाएंगे और मदद कर पाएंगे. इतिहास गवाह है कि तकनीक से काम खत्म नहीं होते, बस उनका स्वरूप बदलता है और नई तरह की नौकरियां बनती हैं. कुछ नौकरियां बदल सकती हैं, लेकिन डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से भारत की अर्थव्यवस्था में नई टेक्नोलॉजी वाली नौकरियां भी जुड़ेंगी. सदियों से इनोवेशन और तकनीकी बदलावों को लेकर नौकरियां खत्म होने का डर रहा है, लेकिन इतिहास बताता है कि हर बार इनोवेशन से नए मौके मिलते हैं. AI के दौर में भी यही होगा.

भारत जॉब्‍स बचाने की कैसे कर रहा तैयारी?

प्रधानमंत्री ने कहा, भारत इस बदलाव के लिए पहले से तैयार है. स्टैनफोर्ड ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में भारत तीसरे नंबर पर है, जो AI रिसर्च, टैलेंट और इकॉनमी में मजबूत ग्रोथ दिखाता है. इनोवेशन और इनक्लूजन के साथ AI भारत की वर्कफोर्स को मजबूत करेगा. पीएम मोदी ने कहा, इनोवेशन और इनक्लूजन को मिलाकर हमें भरोसा है कि AI भारत की वर्कफोर्स को मजबूत करेगा. सही स्किल्स और तैयारी के साथ हमारे युवा भविष्य की नौकरियों का नेतृत्व करेंगे.

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट पर

एआई समिट पर पीएम मोदी ने कहा, इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 भारत की भूमिका को ग्लोबल AI एजेंडा तय करने वाले एक अहम प्लेटफॉर्म के रूप में मजबूत करता है. यह समिट पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस के तीन सूत्रों और सात चक्रों पर आधारित है, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए विकास केंद्रित फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाता है. समिट भारत को ग्लोबल AI सहयोग में एक साझेदार और संयोजक के रूप में स्थापित करता है, जिससे साझा मानक, सहयोगी फ्रेमवर्क और पब्लिक गुड के लिए स्केलेबल सॉल्यूशंस मिलते हैं. यह संवाद से डिलीवरी की ओर बढ़ने का संकेत है और जिम्मेदार, समावेशी और विकास केंद्रित AI के लिए भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है.

एआई के गलत इस्तेमाल पर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई के गलत इस्तेमाल, जैसे डीपफेक और कमजोर समूहों पर खतरे को लेकर चिंता जताई और कहा कि भारत अपने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मजबूत कर रहा है. इसमें एआई से बनी सामग्री पर वॉटरमार्किंग, डेटा सुरक्षा बढ़ाना और IndiaAI सेफ्टी इंस्टीट्यूट की स्थापना शामिल है ताकि एआई का नैतिक और जिम्मेदार इस्तेमाल बढ़ाया जा सके. पीएम मोदी ने कहा कि भारत एआई में इनोवेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ गलत इस्तेमाल रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की वकालत कर रहा है, और सुरक्षित व समावेशी ‘AI for All’ के लिए ग्लोबल सहयोग और जिम्मेदार गवर्नेंस जरूरी है.

भारत कैसे बना रहा सुरक्षित टूल

पीएम मोदी ने कहा, टेक्नोलॉजी एक ताकतवर टूल है, लेकिन यह सिर्फ इंसानी इरादों को बढ़ाता है. हमें सुनिश्चित करना है कि यह अच्छाई के लिए इस्तेमाल हो. एआई इंसानी क्षमताओं को बढ़ा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा इंसानों के हाथ में होना चाहिए. दुनियाभर में समाज इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि एआई का इस्तेमाल और गवर्नेंस कैसे हो. भारत दिखा रहा है कि मजबूत सुरक्षा उपायों के साथ इनोवेशन भी जारी रह सकता है.

इनोवेशन और स‍िक्‍योर‍िटी पर भारत का रुख

प्रधानमंत्री ने कहा, भारत की प्रतिबद्धता ग्लोबली भी है. जैसे एविएशन और शिपिंग में ग्लोबल नॉर्म्स हैं, वैसे ही एआई में भी दुनिया को साझा सिद्धांत और स्टैंडर्ड्स की जरूरत है. 2023 GPAI डिक्लरेशन, पेरिस एआई चर्चा या मौजूदा समिट में भारत ने हमेशा इनोवेशन के साथ सुरक्षा उपायों की वकालत की है.

आतंक अपराध पर इस्‍तेमाल होने लगा तो…

प्रधानमंत्री ने एआई पर ग्लोबल कॉम्पैक्ट की जरूरत बताई, जिसमें मजबूत सुरक्षा, इंसानी निगरानी और पारदर्शिता के साथ इनोवेशन हो ताकि एआई का गलत इस्तेमाल डीपफेक, अपराध या आतंकवाद में न हो. इसके लिए हमें एआई पर ग्लोबल कॉम्पैक्ट चाहिए, जिसमें इंसानी निगरानी, डिजाइन में सुरक्षा, पारदर्शिता और डीपफेक, अपराध व आतंकवाद में एआई के इस्तेमाल पर सख्त रोक शामिल हो. भारत एआई रेगुलेशन में ज्यादा स्ट्रक्चर्ड गवर्नेंस की ओर बढ़ रहा है. जनवरी 2025 में IndiaAI सेफ्टी इंस्टीट्यूट की शुरुआत के साथ, देश ने एआई सिस्टम्स की नैतिक, सुरक्षित और जिम्मेदार तैनाती के लिए एक समर्पित व्यवस्था बनाई है.

एआई से बच्‍चों बुजुर्गों की सुरक्षा पर

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे एआई और एडवांस होता जाएगा, उसकी सुरक्षित इस्तेमाल की जिम्मेदारी भी बढ़ती जाएगी. जैसे-जैसे एआई एडवांस होता है, हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ती है. भारत का तरीका खास है क्योंकि यह स्थानीय जोखिम और सामाजिक हकीकत पर ध्यान देता है. नया रिस्क असेसमेंट फ्रेमवर्क राष्ट्रीय सुरक्षा और कमजोर समूहों को नुकसान, जैसे महिलाओं को टारगेट करने वाले डीपफेक, बच्चों की सुरक्षा और बुजुर्गों पर खतरे को भी ध्यान में रखता है.

भारत ने क्‍या ल‍िए एक्‍शन

पीएम मोदी ने कहा, डीपफेक वीडियो की बढ़ती संख्या से इन सुरक्षा उपायों की जरूरत सबको दिख रही है. इसके जवाब में भारत ने एआई से बनी सामग्री पर वॉटरमार्किंग और हानिकारक सिंथेटिक मीडिया हटाने के नियम जारी किए हैं. कंटेंट सुरक्षा के साथ, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट डिजिटल इकोसिस्टम में डेटा सुरक्षा और यूजर अधिकारों को मजबूत करता है.

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