Tarique Rahman: बांग्लादेश में आम चुनाव के बाद भी सियासी घमासान जारी है. बीएनपी नेता तारिक रहमान को देश का प्रधानमंत्री पद संभाले अभी कुछ ही दिन हुए हैं लेकिन विपक्षी खेमे ने उनपर निशाना साधना शुरू कर दिया है. जानकारी के मुताबिक, अंतरिम सरकार में मुख्य सलाहकार की भूमिका निभाने वाले मोहम्मद यूनुस के समर्थकों ने पीएम तारिक रहमान पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
भारत, आवामी लीग और BNP के बीच हुई मिलीभगत: नाहिद इस्लाम
नेशनल सिटीजन पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने दावा किया है कि इस चुनाव में भारत, आवामी लीग और बीएनपी के बीच मिलीभगत हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं और देश में आवामी लीग के दफ्तर दोबारा खुलने लगे हैं, जो जनआंदोलन की भावना के खिलाफ है.
नाहिद इस्लाम ने कहा कि अगर बीएनपी भी वही राजनीति दोहराने की कोशिश करेगी, जिसका आरोप वह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर लगाती रही है तो उसका भी विरोध किया जाएगा. उन्होंने सरकार से मांग की कि आवामी लीग के खुले सभी कार्यालय तत्काल बंद कराए जाएं, अन्यथा उनकी पार्टी खुद कार्रवाई करेगी. इस्लाम ने शेख हसीना को फासीवादी बताते हुए कहा कि उन्हें दोबारा बांग्लादेश की राजनीति में जगह नहीं दी जाएगी.
2024 में गिर गई थी हसीना की सरकार
गौरतलब है कि जुलाई 2024 में शुरू हुए व्यापक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और अंतरिम सरकार का गठन हुआ था. उस दौर में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली व्यवस्था पर भारत विरोधी एजेंडा चलाने और पाकिस्तान के साथ निकटता बढ़ाने के आरोप लगे थे. अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं भी चर्चा में रहीं थी.
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अब सत्ता परिवर्तन के बाद काफी कुछ बदलता दिख रहा है. प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत के साथ रिश्ते सामान्य करने की पहल की है. बांग्लादेश के नए खेल मंत्री ने भी भारतीय क्रिकेट बोर्ड से संबंध सुधारने की इच्छा जताई है. Prothom Alo की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी सरकार बनने के बाद कई जिलों में आवामी लीग के दफ्तर फिर से खोले गए हैं. बता दें कि अंतरिम सरकार के दौरान आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था जिसके चलते पार्टी चुनाव नहीं लड़ सकी थी. ऐसे में अब उसके दफ्तरों का दोबारा खुलना देश में नई बहस को जन्म दे रहा है.

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