Last Updated:January 06, 2026, 06:16 IST
Crude Price in 2026 : एसबीआई रिसर्च ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि जून तक क्रूड की कीमत 50 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है. इससे देश के आयात बिल को घटाने में तो मदद मिलेगी ही, डॉलर के मुकाबले रुपये में भी 3 फीसदी से ज्यादा मजबूती आ सकती है.
जून तक क्रूड की कीमत 50 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है.नई दिल्ली. वेनेजुएला संकट के बीच ग्लोबल मार्केट से बड़ी खबर आ रही है. एसबीआई रिसर्च ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में इस साल महत्वपूर्ण कमी आ सकती है और जून 2026 तक इसके 50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है. क्रूड की कीमतों में गिरावट की रफ्तार तेज हो सकती है, जिससे वित्तवर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति निश्चित रूप से 3.4 फीसदी से नीचे रहेगी. इसका मतलब है कि तेल सस्ता होने के साथ महंगाई भी कम रहेगी.
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा की कम कीमतों का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर अनुकूल प्रभाव होगा. देश की सालाना जीडीपी वृद्धि दर पर इसका अपेक्षित प्रभाव लगभग 0.1 फीसदी से 0.15 फीसदी के आसपास रहेगा. वर्ष 2022 के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का रुख रहा है. रिपोर्ट में इस बात पर भी ध्यान दिलाया गया कि वेनेजुएला की हाल की घटना ने कीमतों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं की है. पिछले एक सप्ताह से ब्रेंट क्रूड की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है.
भारत को कैसे मिलेगा फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के आयात बास्केट में तेल की कीमतें सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं, इसलिए आयात बिल में कमी आने का असर रुपये पर पड़ेगा. पिछले आंकड़ों से पता चलता है कि यदि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की आधार कीमत 90.28 रुपये मानी जाए, तो कीमतों में 14 फीसदी की गिरावट के चलते रुपये में तीन फीसदी की मजबूती आ सकती है. ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 87.5 के स्तर पर आ सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 06, 2026, 06:16 IST

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