गुजरात: 39.41 करोड़ की इंटर-स्टेट साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार

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गुजरात: 39.41 करोड़ की इंटर-स्टेट साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार

Last Updated:March 04, 2026, 06:33 IST

गुजरात सीआईडी (क्राइम) की स्टेट साइबर क्राइम सेल ने 39.41 करोड़ रुपये की इंटर-स्टेट साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया. अहमदाबाद के अमित गंगेरा और रितेश कुमार पटेल गिरफ्तार.

 39.41 करोड़ की इंटर-स्टेट साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश, दो गिरफ्तारZoom

गुजरात में साइबर फ्रॉड के दो अपराधी गिरफ्तार हुए हैं.

गुजरात के सीआईडी (क्राइम) की स्टेट साइबर क्राइम सेल ने एक बड़ी इंटर-स्टेट साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें पीड़ितों से कुल 39.41 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की गई. मंगलवार को अधिकारियों ने बताया कि इस रैकेट से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार आरोपी अहमदाबाद के विनजोल क्षेत्र के निवासी हैं. अमित गंगेरा (38) एक हेयर सैलून चलाता है और रितेश कुमार पटेल (42) स्टेशनरी का व्यापार करता है. जांच में पता चला कि ये दोनों 59 साइबर क्राइम शिकायतों से जुड़े थे, जो देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज की गईं. इन मामलों में कुल ठगी की राशि लगभग 39,41,26,382 रुपये है.

पुलिस ने तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रेल एनालिसिस और ह्यूमन इंटेलिजेंस इनपुट्स के आधार पर इनकी गिरफ्तारी की. आरोपियों ने आर्थिक तंगी में फंसे व्यापारियों को निशाना बनाया और उन्हें कमीशन देकर उनके बैंक अकाउंट किराए पर लिए. इन अकाउंट्स के जरिए फ्रॉड से मिली रकम को रूट किया जाता था, ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो. मोबाइल फोन की जांच से 11 से ज्यादा बैंक अकाउंट्स की जानकारी मिली और कई सिम कार्ड्स का इस्तेमाल सामने आया. नेशनल साइबरक्राइम पोर्टल पर वेरिफिकेशन से इन अकाउंट्स की विभिन्न राज्यों की शिकायतों से कनेक्शन कन्फर्म हुई. सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र (13), कर्नाटक (10), हरियाणा (5), दिल्ली, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश (प्रत्येक 4), गुजरात, केरल और तेलंगाना (प्रत्येक 3), आंध्र प्रदेश, लद्दाख और ओडिशा (प्रत्येक 2), जबकि झारखंड, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में एक-एक मामला दर्ज था.

रैकेट विभिन्न तरीकों से ठगी करता था – डिजिटल अरेस्ट स्कैम, इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग फ्रॉड, UPI से जुड़ी ठगी, ट्रेनिंग स्कैम और पार्ट-टाइम जॉब ऑफर. सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए पीड़ितों से संपर्क किया जाता, उन्हें कम समय में ज्यादा रिटर्न का लालच दिया जाता. फिर बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई जाती, जो अलग-अलग अकाउंट्स से घुमाकर छिपाई जाती.एक अधिकारी ने कहा, “गिरफ्तारी तकनीकी एनालिसिस और डिजिटल ट्रैकिंग से हुई. ऐसे गैंग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.” आगे जांच में मनी ट्रेल का विश्लेषण किया जाएगा ताकि अन्य शामिल लोगों का पता लगे.ऑपरेशन में पुलिस ने तीन मोबाइल फोन और 5 लाख रुपये नकद जब्त किए.गुजरात में साइबर क्राइम के खिलाफ हाल के महीनों में कई बड़ी कार्रवाइयां हुई हैं, लेकिन यह केस इंटर-स्टेट नेटवर्क की गहराई दिखाता है. अधिकारी चेतावनी देते हैं कि लोग ऑनलाइन ऑफर्स पर भरोसा करने से पहले सतर्क रहें और संदिग्ध ट्रांसफर से बचें.

First Published :

March 04, 2026, 06:33 IST

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