Last Updated:August 06, 2025, 18:53 IST
Nimisha Priya Death Sentence Case: भारत सरकार केरल की नर्स निमिषा प्रिया की यमन से रिहाई के प्रयास में लगी है. आरोप लगाया गया है कि एक विधायक और व कुछ अन्य लोग निमिषा की रिहाई में अड़ंगा डाल रहे हैं.

नई दिल्ली. केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी को रद्द कराकर उसे वापस लाने के प्रयास में भारत सरकार लगी हुई है. इसी बीच एक ऐसा दावा सामने आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया. दावा किया जा रहा है कि केरल के ही एक विधायक और उनसे जुड़े कुछ लोग निमिषा प्रिया को यमन में रिहा कराने में रोड़े अटका रहे हैं. आज मलयालम भाषा की प्रमुख वेबसाइट मातृभूमि की रिपोर्ट में निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल के कोषाध्यक्ष के कूराचंद्र ने यह दावा किया है कि विधायक यमन में रहने वाले पादरी पॉल और सैमुअल जिरोम की मदद से निमिषा की रिहाई को टलवाने में लगे हैं.
ब्लड मनी अंतिम वक्त में क्यों बढ़ी?
विधायक का नाम नहीं बताया गया लेकिन कहा गया कि मृतक तलाल आबदो मेहदी का परिवार पहले एक मिलियन डॉलर की ब्लड मनी पर निमिषा को माफ करने को तैयार था. सब कुछ तय शर्तों के मुताबिक ही हो रहा था. इसी बीच पादरी पॉल और जिरोम बीच में आ गए. उन्होंने ब्लड मनी को बढ़ाने की बात कह दी. इसके बाद मामला अधर में अटक गया. फिर मृतक का परिवार अचानक तिलमिला गया और उसने समझौता करने से ही इनकार कर दिया. उनका अब यह कहना है कि निमिषा को हर हाल में फांसी दी जाए.
विधायक ने राज्यपाल से क्यों मिले?
के कूराचंद्र की तरफ से कहा गया कि विधायक अगर अड़ंगा लगाना बंद कर दें तो निमिषा जल्द से जल्द छूटकर वापस स्वदेश लौट सकती है. सवाल पूछा गया कि इस मामले में विधायक ने राज्यपाल से मुलाकात क्यों की. यमन के कानून के अनुसार हत्या के मामले में किसी भी अपराधी को ब्लड मनी चुकाने के बाद छोड़ा जा सकता है. ब्लड मनी वो रकम होती है जो अपराधी और मृतक के परिवार के बीच तय होती है. दोनों पक्षों की रजामंदी से ही ब्लड मनी का भुगतान कर अपराधी को मुक्त किया जा सकता है.
क्या है निमिषा प्रिया केस?
निमिषा प्रिया केरल मूल की भारतीय नर्स है. उन्हें साल 2017 में यमन में अपने बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या के आरोप में फंस गईं. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने महदी को नशीला पदार्थ देकर बेहोश करने की कोशिश की थी ताकि अपना पासपोर्ट वापस लिया जा सके, लेकिन ओवर-डोज के चलते गलती से उसकी मौत हो गई. यमनी अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई और वे 2018 से सना जेल में बंद हैं. उनकी रिहाई के लिए ब्लड मनी की मांग है, जिसे भारत सरकार और परिवार जुटाने की कोशिश में हैं. यमन के साथ भारत के सीधे डिप्लोमैटिक संबंध नहीं हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल पहले भी यह कह चुके हैं कि प्रेंडली देशों के सहयोग से यमन की जेल में बंद निमिषा की रिहाई के प्रयास किए जा रहे हैं.
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...
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First Published :
August 06, 2025, 18:53 IST