Last Updated:February 10, 2026, 16:25 IST
एम्स नई दिल्ली पहला ऐसा सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहां एक साल में 10,000 से ज्यादा बड़ी सर्जरी सफलतापूर्वक की गई हैं. इनमें रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी भी शामिल है. यहां ओपन सर्जरी से लेकर लैप्रोस्कोपिक, इनवेसिव और रोबोटिक सभी प्रकार की सर्जरी की सुविधा एक ही विभाग में मौजूद है.

AIIMS New Delhi 10000 surgeries: हाल ही में दुनियाभर के टॉप 10 अस्पतालों में छठे स्थान पर आए एम्स के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है. इस अस्पताल के सर्जरी ब्लॉक ने एक साल में 10 हजार से ज्यादा बड़ी सर्जरी पूरी की हैं. इतना ही नहीं यह भारत का पहला अस्पताल है जहां रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी की जाती है और एक दर्जन से ज्यादा ऐसी जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जाती हैं, जो किसी अन्य अस्पताल में एक ही जगह पर मिलना मुश्किल हैं.
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली के सर्जरी विभाग ने साल 2025 में 10,000 से ज्यादा बड़ी सर्जरी सफलतापूर्वक करने की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह उन्नत, किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है. साल 2021 में शुरु होने के बाद से एम्स के सर्जरी ब्लॉक का काफी विस्तार हुआ है. पहले यहां 5 ऑपरेशन थिएटर थे, अब वहां 8 पूरी तरह से काम करने वाले ऑपरेशन थिएटर हैं. इनमें एक आधुनिक रोबोटिक सर्जरी यूनिट और एक अलग आपातकालीन (इमरजेंसी) ऑपरेशन थिएटर भी शामिल है. इससे मरीजों की बड़ी संख्या को सुरक्षित और अच्छे परिणामों के साथ इलाज करना संभव हो पाया है.
यहां होती हैं इतने तरह की सर्जरी
इस उपलब्धि की खास बात यह है कि एक ही विभाग में कई तरह की सर्जरी की जाती हैं. सर्जरी ब्लॉक में जनरल सर्जरी, पेट और आंतों की सर्जरी, हार्मोन से जुड़ी सर्जरी, छाती की सर्जरी, कोलोन व रेक्टम की सर्जरी, मोटापा कम करने की सर्जरी, नसों की सर्जरी, स्तन सर्जरी और जटिल अंग प्रत्यारोपण जैसी सर्जरी की जाती हैं.
यह सभी सर्जरी, ओपन सर्जरी, लैप्रोस्कोपिक, मिनिमली इनवेसिव और रोबोटिक तकनीकों से की जाती हैं. साल 2025 की एक बड़ी उपलब्धि रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी की शुरुआत रही. इसके साथ ही एम्स दिल्ली देश का पहला सरकारी अस्पताल बन गया जहां यह आधुनिक तकनीक उपलब्ध है. इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में अत्याधुनिक इलाज आम लोगों तक पहुंच पाया है.
बता दें कि एम्स को भारत में ट्रांसप्लांट सर्जरी की नींव रखने वाला संस्थान माना जाता है. पिछले कई दशकों से यहां के डॉक्टरों ने देश भर में ट्रांसप्लांट कार्यक्रम शुरू करने में अहम भूमिका निभाई है और कई सरकारी अस्पतालों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दी है. आज भी एम्स का ट्रांसप्लांट कार्यक्रम देश के सबसे सक्रिय और प्रभावशाली कार्यक्रमों में से एक है.
इलाज के साथ-साथ, सर्जरी विभाग मेडिकल शिक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह एम्स का सबसे बड़ा सर्जिकल शिक्षण विभाग है, जहां हर साल बड़ी संख्या में एमबीबीएस, पोस्टग्रेजुएट और सुपर-स्पेशियलिटी डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जाता है. यहां तैयार किया गया ज्ञान पूरे संस्थान में साझा किया जाता है, जिससे लगातार सुधार होता रहता है.
सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सुनील चंबर ने कहा कि एम्स ने 2006 में ही सर्जिकल स्किल्स और सिमुलेशन लैब की स्थापना कर दी थी, जो उस समय सरकारी क्षेत्र में एक नई पहल थी. इस केंद्र ने पूरे भारत से आए सर्जनों को लैप्रोस्कोपिक और कम चीरा लगाने वाली सर्जरी का प्रशिक्षण दिया है, जिससे देशभर में सुरक्षित सर्जरी को बढ़ावा मिला है.
चंबर ने आगे कहा, ‘एक साल में 10,000 से ज्यादा बड़ी सर्जरी करना सिर्फ संख्या की बात नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि जब अच्छी नीति, मजबूत ढांचा और कुशल डॉक्टर साथ हों, तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी प्रभावशाली हो सकती है. सबसे अच्छी बात यह है कि यह सब उच्च स्तर की सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखते हुए किया गया है.’
इस मामले में यूरोप और अमेरिका की बराबरी
डॉ. चंबर ने कहा कि नियोजित (प्लांड) बड़ी सर्जरी में मृत्यु दर सिर्फ 0.3 प्रतिशत रही, जबकि आपातकालीन सर्जरी में यह 7.89 प्रतिशत थी. ये आंकड़े यूरोप और उत्तर अमेरिका के बड़े अस्पतालों के बराबर हैं. इससे साबित होता है कि भारत की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का इलाज दे सकती हैं.
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प्रिया गौतमSenior Correspondent
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्...और पढ़ें
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First Published :
February 10, 2026, 16:25 IST

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