इतना टैरिफ क्यों, ग्रीनलैंड क्यों चाहिए, भारत से... दावोस में दिए ट्रंप के ये 9 तर्क पढ़ लीजिए

2 hours ago

स्विट्जरलैंड के खूबसूरत पहाड़ी शहर दावोस में चल रहा वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. दुनिया भर के नेता, कारोबारी दिग्गज और नीति-निर्माता यहां इकट्ठा होकर भविष्य की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और पर्यावरण जैसे बड़े मुद्दों पर मंथन कर रहे हैं. लेकिन इस बार की सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीब सवा घंटे लंबा, जोशीला और विवादास्पद संबोधन और दावोस में दिए गए बयान.

ट्रंप ने अपने इस दमदार भाषण में अमेरिका की आर्थिक वापसी से लेकर टैरिफ की रणनीति, ग्रीनलैंड की सामरिक अहमियत, तेल-गैस डील्स, भारत के साथ मजबूत रिश्ते, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बजाय फॉसिल फ्यूल पर फोकस, और रूस-यूक्रेन युद्ध को जल्द खत्म करने की अपनी योजना तक कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की है. आइए अब ट्रंप के इन प्रमुख बयानों को सवाल-जवाब के रोचक अंदाज में समझते हैं, जहां इस समय के हर बड़े मुद्दे पर ट्रंप ने अपने बयानों को दुनिया के सामने रखा है. तो सवालों के जर‌िए समझते हैं दुनिया के सबसे ताकतवर नेता ट्रंप के 9 मामलों पर 9 तर्क.

सवाल 1: अमेरिका ने इतना टैरिफ  पूरी दुनिया में क्यों लगाए?
ट्रंप का जवाब:
ट्रंप के मुताबिक टैरिफ अमेरिका को “लूट” से बचाने का हथियार हैं. उन्होंने कहा कि दशकों तक दूसरे देश अमेरिकी बाज़ार में बिना टैक्स सामान बेचते रहे, जबकि अमेरिका को भारी व्यापार घाटा उठाना पड़ा.
उनका दावा है कि टैरिफ से अमेरिका का मंथली ट्रेड डेफिसिट 77% तक घटा, निर्यात बढ़ा और घरेलू उद्योग—खासतौर पर स्टील और मैन्युफैक्चरिंग—फिर से जिंदा हुए.
ट्रंप के शब्दों में, “हम टैक्स अपने लोगों पर नहीं, बाहर से आने वाले सामान पर लगाते हैं, ताकि अमेरिकी मज़दूर और कंपनियां मज़बूत हों.”

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सवाल 2: ग्रीनलैंड अमेरिका को क्यों चाहिए?

ट्रंप का जवाब:
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने साफ कहा कि यह खनिज या ‘रेयर अर्थ’ की लड़ाई नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है.
उनका तर्क है कि ग्रीनलैंड अमेरिका, रूस और चीन के बीच रणनीतिक रूप से बेहद अहम जगह पर स्थित है और उसे सही ढंग से केवल अमेरिका ही सुरक्षित रख सकता है.
ट्रंप बोले, “दूसरे विश्व युद्ध में हमने ग्रीनलैंड को बचाया, बेस बनाए और बाद में डेनमार्क को लौटा दिया. आज हालात बदल चुके हैं—मिसाइल, न्यूक्लियर और नई जंग की तकनीक के दौर में यह इलाका हमारे लिए जरूरी है.”
उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका बल प्रयोग नहीं करेगा, लेकिन उसकी सैन्य ताकत “अनस्टॉपेबल” है.

सवाल 3: तेल और गैस पर इतना ज़ोर क्यों?

ट्रंप का जवाब:
ट्रंप के अनुसार सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा के बिना कोई भी देश मजबूत नहीं हो सकता. उन्होंने ग्रीन एनर्जी नीतियों को “ग्रीन न्यू स्कैम” कहा और दावा किया कि इससे यूरोप में बिजली महंगी और उद्योग कमजोर हुए.
अमेरिका में तेल-गैस उत्पादन बढ़ाकर उन्होंने पेट्रोल के दाम कई राज्यों में $2 से नीचे लाने का दावा किया.
उनका कहना है, “जब हमारे पास तेल, गैस और न्यूक्लियर जैसे विकल्प हैं, तो हम खुद को महंगी और अस्थिर ऊर्जा पर क्यों निर्भर करें?”

सवाल 4: अमेरिका इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को क्यों नहीं अपनाना चाहता?

ट्रंप का जवाब:
ट्रंप EV के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनका कहना है कि इसे जबरन थोपना गलत है.
उनका तर्क है कि EV के लिए जरूरी बैटरी, कच्चा माल और सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा है.
उन्होंने कहा, “हम अपने उद्योग और लोगों को ऐसी टेक्नोलॉजी पर निर्भर नहीं कर सकते, जो हमें दूसरी ताकतों के हाथों कमजोर बना दे.”
ट्रंप के मुताबिक अमेरिका में पेट्रोल, हाइब्रिड, न्यूक्लियर और दूसरी तकनीकों को साथ-साथ चलना चाहिए.

सवाल 5: हथियार उद्योग को बढ़ावा क्यों?

ट्रंप का जवाब:
ट्रंप ने कहा कि मजबूत सेना ही शांति की गारंटी है.
उन्होंने NATO देशों पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका ने वर्षों तक लगभग पूरा खर्च उठाया, जबकि बाकी देश पीछे रहे.
उनके मुताबिक, उन्होंने NATO देशों को GDP का 5% रक्षा पर खर्च करने के लिए मजबूर किया, जिससे गठबंधन मजबूत हुआ.
हथियार कंपनियों पर सख्ती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब मुनाफे से ज्यादा तेज और प्रभावी उत्पादन जरूरी होगा.

सवाल 6: भारत से अमेरिका के रिश्ते कैसे हैं?

ट्रंप का जवाब:
ट्रंप ने भारत को “महत्वपूर्ण साझेदार” बताया.
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ा है.
उनका दावा है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान जैसे तनावों को भी बातचीत से सुलझाने में भूमिका निभाई.
ट्रंप के मुताबिक, “भारत एक बड़ा बाज़ार है, एक बड़ी ताकत है और अमेरिका उसके साथ मजबूत रिश्ते चाहता है.”

सवाल 7: रूस-यूक्रेन युद्ध अब तक खत्म क्यों नहीं हुआ?

ट्रंप का जवाब:
ट्रंप ने इस युद्ध के लिए सीधे तौर पर बाइडन प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया.
उनका कहना है कि अगर वे राष्ट्रपति होते, तो यह युद्ध शुरू ही नहीं होता.
उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष—रूस और यूक्रेन—से वे बातचीत कर रहे हैं और उनका मकसद सिर्फ एक है: जानें बचाना.
ट्रंप बोले, “यह युद्ध अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि यूरोप के लिए बड़ा संकट है. हर महीने हजारों जवान मर रहे हैं. मैं इसे रोकना चाहता हूं.”

सवाल 8: NATO से अमेरिका नाराज़ क्यों है?

ट्रंप का जवाब:
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका NATO का सबसे बड़ा बोझ उठाता रहा, लेकिन बदले में उसे भरोसा नहीं मिला कि संकट के वक्त सभी साथ खड़े होंगे.
ग्रीनलैंड के मुद्दे को भी उन्होंने इसी संदर्भ में रखा और कहा कि अमेरिका सुरक्षा देता है, इसलिए उसे अपने हित सुरक्षित करने का हक है.

सवाल 9: क्या अमेरिका दुनिया पर दबदबा बनाना चाहता है?

ट्रंप का जवाब:
ट्रंप ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत सहयोगी देखना चाहता है.
उनके शब्दों में, “जब अमेरिका मजबूत होता है, तो दुनिया मजबूत होती है.”

निष्कर्ष

दावोस 2026 में ट्रंप का यह बयान सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि उनकी नीतियों का खुला बचाव था. टैरिफ से लेकर ग्रीनलैंड तक, ऊर्जा से लेकर युद्ध तक—हर मुद्दे पर ट्रंप ने एक ही लाइन पकड़ी: अमेरिका पहले, लेकिन ताकत के साथ शांति.
अब यह दुनिया तय करेगी कि ट्रंप के ये तर्क उसे कितने मंजूर हैं.

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