Next Deputy CM after Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र की राजनीति में अजित दादा का जाना एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे भरना किसी भी दल या परिवार के लिए आसान नहीं होगा. बुधवार को हुए दुखद विमान हादसे के बाद आज जब बारामती में अजित पवार का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, तो सबकी निगाहें इस बात पर टिक गईं कि अब उनकी विरासत कौन संभालेगा? कौन एनसीपी कोटे से महाराष्ट्र का अगला उपमुख्यमंत्री बनेगा? क्या महाराष्ट्र का वित्त मंत्रालय अब किसी और के पास आएगा या फिर जो एनसीपी कोटे से डिप्टी सीएम बनेगा उसे ही मिलेगा? अजित पवार न केवल वित्त विभाग संभाल रहे थे, बल्कि वे महायुति सरकार के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ थे. अब एनसीपी अजित गुट के भीतर उत्तराधिकार की जंग और सरकार में खाली हुए डिप्टी सीएम पद को भरने की कवायद तेज हो सकती है. जानें कौन-कौन नाम डिप्टी सीएम की रेस में हैं.
सुनेत्रा पवार संभालेंगी कमान?
राजनीतिक गलियारों में इस समय सबसे प्रबल नाम सुनेत्रा पवार का है. अजित पवार की पत्नी और वर्तमान राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को पार्टी के भीतर ‘वहिनी’ के नाम से जाना जाता है. सूत्रों के मुताबिक प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं ने सुनेत्रा पवार के नाम पर शुरुआती सहमति जताई है. पार्टी का एक बड़ा वर्ग मानता है कि बारामती में अपनी पकड़ बनाए रखने और सहानुभूति की लहर का लाभ उठाने के लिए सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाना सबसे सुरक्षित विकल्प होगा. वे अजित पवार की खाली हुई बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़कर विधायक बन सकती हैं.
पार्थ पवार का दावा कितना मजबूत?
अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया. यद्यपि वे परिवार के स्वाभाविक वारिस माने जाते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में मिली हार और प्रशासनिक अनुभव की कमी उनके आड़े आ सकती है. पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि उन्हें संगठन में अहम पद देकर तैयार किया जाना चाहिए, लेकिन सीधे डिप्टी सीएम की कुर्सी देना जल्दबाजी हो सकती है. हालांकि, शरद पवार के साथ परिवार के बढ़ते तालमेल को देखते हुए पार्थ को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
रेस में शामिल 5 बड़े चेहरे
1- प्रफुल्ल पटेल (कार्यकारी अध्यक्ष)
दिल्ली की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले प्रफुल्ल पटेल पार्टी के संकटमोचक माने जाते हैं. वे गठबंधन के सहयोगियों बीजेपी और शिवसेना-शिंदे गुट के साथ समन्वय बनाने में माहिर हैं. अगर पार्टी परिवार के बाहर के चेहरे को चुनती है तो पटेल सबसे भरोसेमंद विकल्प हो सकते हैं.
2- छगन भुजबल (ओबीसी चेहरा)
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कद्दावर ओबीसी नेता छगन भुजबल के पास प्रशासनिक अनुभव का भंडार है. वे आक्रामक वक्ता हैं और विपक्ष को करारा जवाब देने की क्षमता रखते हैं. हालांकि, उनकी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं उनके लिए चुनौती बन सकती हैं.
3- सुनील तटकरे (प्रदेश अध्यक्ष)
सुनील तटकरे संगठन के आदमी माने जाते हैं. रायगढ़ और कोंकण क्षेत्र में उनकी जबरदस्त पकड़ है. वे अजित पवार के सबसे भरोसेमंद साथियों में से एक रहे हैं. वे सरकार और संगठन के बीच सेतु का काम कर सकते हैं.
4- धनंजय मुंडे (युवा और लोकप्रिय चेहरा)
बीड से आने वाले धनंजय मुंडे के पास जबरदस्त जनसमर्थन है. वे अजित पवार की कार्यशैली की कार्बन कॉपी माने जाते हैं. यदि पार्टी किसी युवा और गतिशील नेतृत्व की तलाश करती है, तो मुंडे एक डार्क हॉर्स छुपारुस्तम साबित हो सकते हैं.
5- दिलीप वल्से पाटिल (अनुभवी प्रशासक)
शांत स्वभाव और गहरी कानूनी समझ रखने वाले वल्से पाटिल पवार परिवार के बेहद करीब हैं. वे पूर्व में गृह मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं. सरकार चलाने की उनकी समझ निर्विवाद है.
मुख्यमंत्री और बीजेपी का रुख
डिप्टी सीएम कौन होगा, इसका अंतिम फैसला महायुति के साथ-साथ एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा. बीजेपी नेतृत्व चाहेगा कि जो भी व्यक्ति डिप्टी सीएम बने, वह आगामी चुनावों में वोट दिलाने की क्षमता रखता हो. देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार की ट्यूनिंग बहुत अच्छी थी, ऐसे में फडणवीस भी अपनी पसंद के किसी नाम पर मुहर लगवा सकते हैं.
क्या होगा शरद पवार का असर?
अजित पवार के निधन के बाद सबसे बड़ा ट्विस्ट शरद पवार का रुख हो सकता है. चर्चा है कि दोनों एनसीपी गुटों का विलय हो सकता है. यदि ऐसा होता है तो सुप्रिया सुले या शरद पवार द्वारा सुझाया गया कोई नाम भी चर्चा में आ सकता है. हो सकता है अजित पवार के भतीजे रोहित पवार भी डिप्टी सीएम के तौर पर उभर सकते हैं. लेकिन इसकी संभावना कम है. बारामती की जनता और कार्यकर्ता चाहते हैं कि पवार परिवार एकजुट रहे. फिलहाल, गेंद एनसीपी की कोर कमेटी के पाले में है. सुनेत्रा पवार का पलड़ा भारी दिख रहा है क्योंकि वे परिवार और पार्टी को जोड़े रखने की क्षमता रखती हैं. अगले 48 घंटों में दिल्ली और मुंबई में होने वाली बैठकें महाराष्ट्र की इस नई ‘पावर पॉलिटिक्स’ की दिशा तय करेंगी.

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