World War III: 5 जगहों पर सुलग रही चिंगारी, 2026 में ही भड़केगा तीसरा विश्वयुद्ध, अमेरिकी एक्सपर्ट के दावे से हड़कंप

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Last Updated:January 27, 2026, 12:04 IST

World War III Could Breakout in 2026: एक अमेरिकी एक्सपर्ट डॉक्टर रॉबर्ट फार्ले ने 2026 में World War III की आशंका जताई है. इसमें ग्रीनलैंड, यूक्रेन, ताइवान, ईरान, भारत-पाकिस्तान को संभावित युद्ध केंद्र बताया गया है. इन पांचों जगहों पर चिंगारी सुलग रही है. लेकिन, ये चिंगारी कभी शोले में बदल सकती है. ऐसे 2026 में तीसरे विश्वविद्ध की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता है.

 5 जगहों पर सुलग रही चिंगारी, 2026 में भड़केगा तीसरा विश्वयुद्ध!द्वितीय विश्वयुद्ध के वक्त पूरी दुनिया में भीषण तबाही मची थी. करीब एक करोड़ों लोगों की मौत हुई थी.

World War III Could Breakout in 2026: दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में जारी जंग और तनावपूर्ण स्थिति के कारण इस वक्त तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडराने लगा है. आज दुनिया इतिहास के एक सबसे असुरक्षित दौर से गुजर रही है. वैश्विक नियम और नैतिकता पर आधारित व्यवस्था तेजी से टूट रही है. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से दुनिया की चौधरी की कुर्सी पर बैठा अमेरिका अब वैश्विक संघर्षों को रोकने में रुचि नहीं ले रहा. ऐसे में 2026 में गंभीर वैश्विक संघर्ष या फिर तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत की आशंका बढ़ गई है. ये बातें कोई आम व्यक्ति नहीं बल्कि अमेरिका के एक बड़े एक्सपर्ट ने कही है. अमेरिकी विशेषज्ञों ने पांच ऐसे फ्लैशपॉइंट्स की पहचान की है, जहां छोटी चिंगारी किसी बड़े युद्ध में बदल सकती है. ये बातें डॉक्टर रॉबर्ट फार्ले ने कही है. फार्ले ने कूटनीति मामलों की वेबसाइट 19fortyfive.com पर एक लेख लिखा है. लेख का शीर्षक है- 5 Places World War III Could Breakout in 2026. फार्ले पैटर्शन स्कूल में सुरक्षा और कूटनीति मामलों के एक्सपर्ट हैं. उन्होंने वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से 2004 में पीएचडी की उपाधि ली है.

1. ग्रीनलैंड

इस सूची में सबसे पहला नाम ग्रीनलैंड का है. पिछले साल तक ग्रीनलैंड को युद्ध का केंद्र मानना बेतुका लगता था. अमेरिका और डेनमार्क (जो ग्रीनलैंड का प्रशासन करता है) सहयोगी हैं और अमेरिकी सेना वहां स्वतंत्र रूप से काम करती है. लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की मांग की है और सैन्य बल के इस्तेमाल की धमकी दी है. हालांकि पिछले दिनों ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की बात टाल दी और यूरोप पर टैरिफ लगाने की धमकी दी, लेकिन दावोस में वह टैरिफ से भी पीछे हट गए. दूसरी तरफ यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में अपने संयुक्त बल तैनात कर अपनी गंभीरता दिखाई है. हालांकि युद्ध की संभावना कम है, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय बलों के बीच टकराव ट्रांसअटलांटिक संबंधों को तोड़ सकता है और यह बड़े पैमाने पर विनाशकारी हो सकता है.

2. यूक्रेन

रूस-यूक्रेन युद्ध जल्द ही 5वें साल में प्रवेश करेगा. रूस धीरे-धीरे लेकिन लगातार आगे बढ़ रहा है, जबकि कीव हवाई हमलों का सामना करते हुए दृढ़ है. 2025 में शांति वार्ताएं विफल रहीं क्योंकि अमेरिका रूस को गंभीरता से बातचीत के लिए तैयार नहीं कर सका. रूस की आर्थिक मुश्किलें युद्ध को प्रभावित कर रही हैं, जिससे पुतिन को अधिक आक्रामक कदम उठाने पड़ सकते हैं. अगर मोर्चा ढहने लगा तो यूक्रेन यूरोपीय सहयोगियों से मदद मांगेगा और कुछ देशों ने सैनिक भेजने का सुझाव भी दिया है. फ्रांस और ब्रिटेन रूस के शैडो फ्लीट टैंकरों पर सख्ती कर रहे हैं. अगर रूसी और यूरोपीय सैनिक यूक्रेन या समुद्र में टकराए तो परिणाम भयानक होंगे.

3. ताइवान

पश्चिमी प्रशांत में ताइवान सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है. चीन अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है, जबकि अमेरिका घरेलू और क्षेत्रीय मुद्दों में उलझा है. ताइवान की सैन्य तैयारी धीमी है और अमेरिका की रक्षा प्रतिबद्धता अब स्पष्ट नहीं दिखती. ट्रंप को ताइवान की रक्षा की जरूरत नहीं लगती. चीन ताइवान को अपना अलग प्रांत मानता है और बल प्रयोग को वैध ठहराता है. अगर आर्कटिक और पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका व्यस्त रहा तो चीन हमला करने का मौका तलाश सकता है.

4. ईरान

2025 की शुरुआती जंगों ने ईरान को कमजोर कर दिया. सहयोगी नहीं बचे, जनता में असंतोष चरम पर है. ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा रहने पर हमलों की धमकी दी है. क्षेत्रीय सहयोगी अमेरिकी हमलों के खिलाफ हैं, क्योंकि ईरान प्रतिशोध या पतन का खतरा पैदा कर सकता है. कमजोर होने के बावजूद ईरान के पास हमला करने के हथियार हैं. रूस और चीन ने तेहरान के अस्तित्व में भारी निवेश किया है. रूस यूक्रेन में व्यस्त है और चीन हाथ पर हाथ धरे है, लेकिन क्षेत्रीय अराजकता उसे इस खेल में खींच सकती है.

5. भारत-पाकिस्तान

2025 में ऑपरेशन सिंदूर ने दोनों देशों को टकराव में ला दिया. कश्मीर में आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला किया. लेकिन आतंकवाद की समस्या हल नहीं हुई. भारत और पाकिस्तान दो परमाणु शक्ति संपन्न दुश्मन हैं. दोनों के बीच रिश्ते बेहद खतरनाक किस्म के हैं. इनके बीच छोटी की बात पर जंग भड़क सकती है, जो कई परोक्ष तौर पर चीन, अमेरिका और रूस तक को खींच सकती है.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें

First Published :

January 27, 2026, 11:56 IST

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