Rubber Farming In Darbhanga: बिहार के पारंपरिक खेती वाले बेल्ट मिथिला में अब 'सफेद सोना' यानी रबड़ उगाने की तैयारी शुरू हो गई है. दरभंगा के युवा किसान सौरभ कुमार ने एक ऐसा बिजनेस मॉडल पेश किया है. जो आने वाले समय में यहां के किसानों की किस्मत बदल सकता है. उन्होंने मुजफ्फरपुर और पटना से रबड़ के पौधे लाकर मधुबनी में एक सफल प्रयोग किया है. जिसका विस्तार अब वे दरभंगा में करने जा रहे हैं. रबड़ की खेती एक दीर्घकालिक और उच्च रिटर्न देने वाला निवेश है. सौरभ बताते हैं कि रबड़ के पेड़ से निकलने वाले सफेद दूध (लेटेक्स) को प्रोसेस कर रबड़ तैयार किया जाता है. एक एकड़ में लगे पेड़ों से सालाना 1500 से 2000 किलोग्राम तक रबड़ प्राप्त किया जा सकता है. पिछले 3 सालों के प्रयोग ने साबित कर दिया है कि मिथिला की मिट्टी रबड़ के पौधों के विकास के लिए पूरी तरह उपयुक्त और स्वस्थ है. गाड़ियों के टायर, पाइप और विभिन्न औद्योगिक सामानों में रबड़ की भारी मांग है. फिलहाल बिहार अपनी जरूरतों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर है, ऐसे में स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होना किसानों के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं है. अगर यह मॉडल बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो दरभंगा न केवल अनाज बल्कि इंडस्ट्रियल रॉ मटेरियल का भी बड़ा हब बन सकता है.
Video: बिहार में अब खेतों में उगेगा 'सफेद सोना', एक एकड़ से होगी लाखों की कमाई
1 hour ago
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