Shivaji Jayanti 2026, Chhatrapati Shivaji Maharaj History: आज भारत के महान योद्धाओं में से एक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती है. उन्हें शिवाजी राजे भोसले या सिर्फ महाराज के नाम से भी जाना जाता है. उनका जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था जो पुणे के जुन्नर इलाके में स्थित है. उनके पिता शाहजी राजे भोसले बीजापुर के दरबार में उच्च पद पर थे और मां जीजाबाई राजमाता जिजाऊ ने उनका लालन-पालन किया. युद्ध और प्रशासन की ट्रेनिंग उन्हें दादोजी कोंडदेव से मिली. शिवाजी महाराज ने मुगलों को कांपने पर मजबूर कर दिया था और 1674 में उन्होंने पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी. आइए उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं.
कैसे पड़ा शिवाजी नाम
शिवाजी महाराज का नाम भगवान शिव से नहीं लिया गया, बल्कि एक स्थानीय देवता शिवाई (Shivai)से लिया गया है. वे किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं थे और जात-पात के झगड़ों को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे.
शिवाजी ने बनाई थी नौसेना
शिवाजी महाराज ने बहुत पहले ही नौसेना का गठन किया था. उन्होंने एक शक्तिशाली नौसेना का निर्माण किया इसलिए उन्हें भारतीय नौसेना के जनक के रूप में जाना जाता है. उनका मानना था कि नौसेना विदेशी आक्रमणकारियों डच, पुर्तगाली, अंग्रेज और समुद्री डाकुओं से कोंकण तट की रक्षा करेगी. उन्होंने जयगढ़, विजयदुर्ग, सिन्धुदुर्ग जैसे कई नौसैनिक किले बनवाए. उनके पास चार अलग-अलग प्रकार के युद्धपोत थे.
गुरिल्ला युद्ध और छापेमारी के मास्टर
शिवाजी महाराज गुरिल्ला युद्ध के भी जनक थे. मात्र 15 साल की उम्र में उन्होंने तोरण किले पर कब्जा करके बीजापुर सुल्तान को पहला बड़ा झटका दिया. 1655 तक उन्होंने कोंडन, जवली और राजगढ़ जैसे किलों पर कब्जा कर कोंकण और पश्चिमी घाट पर अपना नियंत्रण बढ़ा लिया. वे पहाड़ों के चूहे कहलाते थे क्योंकि वे इलाके की भूगोलिक स्थिति का पूरा फायदा उठाते थे. छोटे समूहों से छापेमारी करते, दुश्मन पर अचानक हमला करते और धार्मिक स्थानों या आम लोगों के घरों में कभी छापा नहीं मारा.
शिवाजी ने बनाई मराठा सेना
शिवाजी महाराज ने मराठों की पहली पेशेवर सेना बनाई. पहले मराठों की कोई स्थायी सेना नहीं थी. उन्होंने सैनिकों को साल भर वेतन दिया और सेना को कई इकाइयों में बांटा, जहां हर इकाई में 25 सैनिक होते थे.हिंदू और मुस्लिम दोनों को बिना भेदभाव के सेना में शामिल किया जाता था.
महिलाओं का सम्मान
शिवाजी महाराज महिलाओं के सम्मान के कट्टर समर्थक थे.उन्होंने सैनिकों को सख्त हिदायत दी थी कि छापेमारी के दौरान किसी महिला को नुकसान नहीं पहुंचाना है. अगर कोई सैनिक महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करता पकड़ा जाता तो उसे कड़ी सजा मिलती थी.
मुगलों को दिया चकमा
पन्हाला किले की घेराबंदी के दौरान सिद्दी जौहर की सेना ने शिवाजी महाराज को घेर लिया था. उन्होंने चालाकी दिखाई दो पालकियां तैयार कीं. एक में नाई शिवा नहावी को बिठाया जो शिवाजी की तरह दिखता था और उसे बाहर जाने को कहा. दुश्मन उसी पालकी के पीछे भागा और शिवाजी 600 सैनिकों के साथ चकमा देकर सुरक्षित निकल गए.
बीजापुर और मुगलों से टक्कर
बीजापुर के शासक आदिलशाह ने शिवाजी के पिता शाहजी को गिरफ्तार किया था.शिवाजी ने छापेमारी कर पिता को छुड़ाया. बाद में आदिलशाह ने अफजल खां को भेजा जो भाईचारे का नाटक करके शिवाजी को मारना चाहता था, लेकिन शिवाजी ने छिपे बघनखे से अफजल खां को मार दिया और उसकी सेना भाग गई. मुगल बादशाह औरंगजेब ने भी कई बार हमला किया. एक बार मुगल सूबेदार ने लड़ाई में अपना बेटा खोया और खुद की उंगलियां कट गईं. फिर मिर्जा राजा जयसिंह ने 1 लाख सैनिकों के साथ हमला किया. 24 अप्रैल 1665 को व्रजगढ़ किला जीता गया और पुरंदर किले की रक्षा में वीर सेनानायक मुरारजी बाजी शहीद हुए. आखिरकार 22 जून 1665 को पुरंदर की संधि हुई.
शिवाजी का राज्य कैसा था?
शिवाजी महाराज का राज्य तीन मुख्य भागों में बंटा था-पूना से सल्हर तक कोंकण (पेशवा मोरोपंत पिंगले के अधीन), उत्तरी कनारा तक दक्षिणी कोंकण (अन्नाजी दत्तों के अधीन) और दक्षिणी देश के जिले (दत्ताजी पंत के अधीन). राज्य को परगनों और तालुकों में बांटा गया था. उनके पास करीब 250 किले थे, जिनकी मरम्मत पर खर्च करते थे. सिंहगढ़ दुर्ग जीतने के दौरान तानाजी मालुसरे शहीद हुए थे और मशहूर वाक्य आया-गढ़ आला पण सिंह गेला.
कौन थे शिवाजी के गुरू?
शिवाजी महाराज के गुरु समर्थ रामदास थे, जिन्हें हिंदू पद पादशाही के संस्थापक माना जाता है. उन्होंने मराठी में ‘दासबोध’ ग्रंथ लिखा और कश्मीर से कन्याकुमारी तक 1,100 मठ-अखाड़े स्थापित किए. उन्हें हनुमान जी का अवतार माना जाता था क्योंकि वे हनुमान भक्त थे. शिवाजी महाराज अपने गुरु से प्रेरणा लेकर ही बड़े फैसले लेते थे.
शिवाजी का विवाह किससे हुआ था?
शिवाजी महाराज का विवाह 14 मई 1640 को सइबाई निम्बालकर से लाल महल पूना में हुआ था. उनका ज्येष्ठ पुत्र संभाजी था जिन्होंने 1680 से 1689 तक राज किया. संभाजी की पत्नी येसुबाई थी और उनका पुत्र राजाराम उत्तराधिकारी बना.
कुलदेवी ने दी थी तलवार
शिवाजी महाराज की कुलदेवी मां तुलजा भवानी थीं, जिनका मंदिर उस्मानाबाद जिले के तुलजापुर में है. मान्यता है कि देवी ने खुद प्रकट होकर उन्हें तलवार दी थी जो आज लंदन के संग्रहालय में रखी है.छत्रपति शिवाजी महाराज सिर्फ एक योद्धा नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी राजा थे जिन्होंने स्वराज्य की स्थापना की, महिलाओं का सम्मान किया, समावेशी समाज बनाया और सीमित संसाधनों में मुगलों-बीजापुर को टक्कर दी.

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