Russia Ukraine War Latest Update: अमेरिका के बड़बोले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों दुनिया को डराने के लिए टैरिफ-टैरिफ का खेल खेल रहे हैं लेकिन सच बात ये है कि उनकी कोई नहीं सुन रहा है. एक और भारत ने ट्रंप की धमकी में आने से साफ इनकार कर दिया है. वही रूस भी अमेरिका की परवाह किए बिना यूक्रेन पर ताबड़तोड़ खतरनाक मिसाइलों से हमले बोल रहा है. रशियन मीडिया नेटवर्क आरटी के मुताबिक, रूसी सेना ने गुरुवार रात अपनी सबसे घातक हाइपरसोनिक एयर-लॉन्च किंजल मिसाइलों समेत लंबी दूरी वाले हथियारों से यूक्रेन के सैन्य ठिकानों पर हमले किए.
हथियार डिपो को बनाया निशाना
आरटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों में यूक्रेन के कई हथियार डिपो और हवाई अड्डों को निशाना बनाया गया. वहीं यूक्रेन की सेना ने दावा किया कि उसने आने वाले अधिकांश रूसी ड्रोन और मिसाइलों को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से रोक लिया. हालांकि उसने यह बात स्वीाकार की कि उसके 13 स्थानों पर रूसी मिसाइल और ड्रोन गिरने में कामयाब रहे, जिससे भारी नुकसान हुआ है.
रशियन टुडे की रिपोर्ट में कथित तौर पर एक हमला सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया. ऑनलाइन प्रसारित फुटेज में दिख रहा था कि यूक्रेन की राजधानी कीव में एक ही स्थान पर दो मिसाइलें गिरीं. जिस जगह पर यह अटैक हुआ, उसकी पहचान ज़िल्यांस्काया स्ट्रीट पर स्थिति यूक्रेनी रक्षा कंपनी उक्रस्पेकसिस्टम्स के कार्यालय के रूप में की गई. अटैक के तुरंत बाद पुलिस ने उस दफ्तर को घेर लिया और किसी भी अनजान शख्स को अंदर नहीं जाने दिया.
उड़ा दिया ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट
रूसी खुफिया सेवा के मुताबिक, इस यूक्रेनी रक्षा कंपनी की स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी. उसमें लंबी दूरी के पीडी-2 सहित मानव रहित हवाई वाहनों यानी ड्रोन का निर्माण होता था. इन ड्रोन को कथित तौर पर मॉस्को समेत रूस के भीतरी इलाकों में हमला करने के लिए भी इस्तेमाल किया गया था.
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि रूस ने कीव में तुर्की की रक्षा कंपनी बायरकटार की ओर से संचालित एक ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर भी हमला किया. पिछले छह महीनों में अपनी तरह का चौथा हमला था. जिसमें यूक्रेन में काम कर रही दूसरे देश की कंपनियों को निशाना बनाया गया.
पश्चिमी देशों पर लगाया फंडिंग का आरोप
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, रूस की संघीय सुरक्षा सेवा ने कहा कि उसने सेना के साथ मिलकर यूक्रेन के सैपसन बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को निशाना बनाकर एक अभियान चलाया था. इस अभियान के दौरान यूक्रेन को भारी नुकसान पहुंचाया गया. रूस का कहना है कि पश्चिमी देशों से मिले हथियारों और धन की वजह से यूक्रेन छद्म शक्ति के रूप में युद्ध लड़ रहा है. हालांकि कीव का यह प्रयास टिकाऊ नहीं है और यूक्रेनी हितों के बजाय विदेशी हितों को पूरा करता है.
रूस का यह आरोप तब सामने आया है, जब पिछले हफ़्ते, यूक्रेनी मीडिया ने फ्लेमिंगो नामक एक क्रूज़ मिसाइल के उत्पादन लॉन्चिंग की सूचना दी. इस मिसाइल की अनुमानित मारक क्षमता 3,000 किलोमीटर और पेलोड 1,000 किलोग्राम तक है. इस हथियार की तस्वीरें FP-5 प्रणाली से मिलती-जुलती दिखाई दीं, जिसका ब्रिटिश-यूएई रक्षा कंपनी मिलानियन ग्रुप ने बनाया है. इस मिसाइल को इस साल की शुरुआत में अबू धाबी में एक हथियार प्रदर्शनी में किया गया था.
(एजेंसी ANI)