Lindsey Graham: भारत चुका रहा पुतिन को सपोर्ट देने की कीमत, चीन-ब्राजील नहीं माने तो...US की धमकी

1 hour ago

India US News: गुरूवार को रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलें दागीं जिसमें लगभग 10 लोगों की मौत हो गई और काफी लोग घायल हो गए. इस घटना के बाद सीनेटक लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया और लिखा कि, 'भारत चीन, ब्राजील और अन्य देश जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन का समर्थन कर रहे हैं उन्हें अब कैसा महसूस हो रहा है, उनकी इस खरीद की वजह से बच्चों से साथ-साथ निर्दोष नागरिक भी मारे जा रहे हैं. आगे उन्होंने कहा, भारत पुतिन का समर्थन करने की कीमत चुका रहा है और बाकी देशों को भी जल्द अंजान भुगतना पड़ेगा.

यूक्रेन में कहां हुआ हमला?
यूरो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों से शहर में यूरोपीय संघ के राजनयिक मिशन को भी नुकसान पहुंचा. यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा इसे शहरों और समुदायों पर बड़ा हमला बताया. उन्होंने कहा, बचाव दल एक इमारत से लोगों को बाहर निकाल रहे थे. जेलेंस्की ने X पर लिखा, कम से कम 8 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है जिसमें एक बच्चा भी शामिल है. 'उनके परिवारों और प्रियजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं'.  

क्या रहा भारत का जवाब?
इसी बीच विदेश मंत्री S.Jaishankar ने शनिवार को अमेरिका की आलोचना की और कहा कि उसने भारतीय सामानों पर गलत टैरिफ लगाए हैं. उन्होंने यह बात तब कही जब ट्रंप सरकार ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर जुर्माने के तौर पर टैरिफ 50% से ज्यादा बढ़ा दिया है. जयशंकर ने आगे कहा, हमारी सबसे बड़ी चिंता हमारे किसानों और छोटे उत्पादकों का हित है. इसलिए जब लोग हमारी सफलता या असफलता के बार में बात करते हैं तो हम साफ कहते हैं कि हम कोई समझौता नहीं करेगा.

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टैरिफ बढ़ने का कहां-कहां पड़ेगा असर?
वाणिज्य मंत्रालय ने गुरूवार को कहा कि, अमेरिका द्वारा हाल ही में लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का भारत के निर्यात पर कुछ समय के लिए असर पड़ेगा जैसे कपड़ा, रसायन और मशीनरी के क्षेत्रों में. हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि, भारत के कुल व्यापार और सकल घरेलू उत्पाद पर इसका लंबे ,समय तक कोई खास असर नहीं होगा. 

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने क्या बताया?
वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने ANI को बताया, यह साफ है कि 50 प्रतिशत चैरिफ से व्यापार पर असर पड़ेगा खासकर उन क्षेत्रों पर जिन पर ये कर लगाए गए हैं. अमेरिका में इन सामानों की बिक्री कम हो सकती है. कपड़ा, मशीनरी, रसायन पर इसका कुछ समय के लिए असर पड़ेगा लेकिन इससे लंबे समय तक नुकसान नहीं होगा.

अधिकारी ने क्यों जताई चिंता?
अधिकारी ने ये भी बताया कि, उद्योग से जुड़े संगठन ने चिंता जताई है कि ऑर्डरों में कमी और भुगतान में देरी की वजह से उन्हें पैसों की कमी झेलनी पड़ रही है. अधिकारी ने आगे कहा, कुछ समय के लिए ऑर्डर कम हो जाएंगे और निर्यात से मिलने वाला पैसा भी कम हो जाएगा. इस वजह से, उन्हें पैसों की कमी होगी और अपने काम को चलाने के लिए आर्थिक दबाव झेलना पड़ेगा.

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