Last Updated:January 30, 2026, 12:14 IST
Budget session, Economic Survey 2025-26, Explainer: बजट से ठीक पहले इकोनॉमी सर्वे पेश किया जाता है. इस बार के इकोनॉमी सर्वे में PISA पर एक बड़ा सुझाव दिया गया है जिसके बाद सवाल यह है कि आखिर PISA क्या है और इसमें भारत की स्थिति क्या है? तो आइए जानते हैं कि PISA का फुलफॉर्म क्या होता है और इसके मायने क्या है जिसकी इतनी चर्चा हो रही है.
Budget session, Economic survey, Economic Survey 2025-26, Explainer, What is the rank of India in PISA: इकोनॉमिक सर्वे में पीसा क्या है?Budget session, Economic Survey 2025-26, Explainer: आजकल स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को लेकर काफी चर्चा होती है. रट्टा मारकर पास होना या असली समझ के साथ आगे बढ़ना ये बड़ा सवाल है.बजट से पहले केंद्र सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले इकोनॉमी सर्वे (Economic Survey 2025-26)ने इसी पर एक बड़ा सुझाव दिया है.इस सर्वे में कहा गया है कि भारत में PISA जैसा असेसमेंट क्लास 10 के अंत में शुरू करना चाहिए.जिसके बाद PISA चर्चा में है.आइए जानते हैं कि PISA क्या है और ये क्यों जरूरी है और इसके क्या फायदे हो सकते हैं?
क्या है PISA का फुलफॉर्म और ये क्या होता है?
PISA का फुल फॉर्म है प्रोग्राम फार इंटरनेशनल स्टूडेंट अससेमेंट (Programme for Student Assessment). ये OECD (Organisation for Economic Cooperation and Development)द्वारा हर तीन साल में किया जाने वाला एक इंटरनेशनल टेस्ट है. इसमें 15 साल के बच्चों जो आमतौर पर क्लास 9-10 में होते हैं की रीडिंग, मैथ्स और साइंस में स्किल्स चेक की जाती हैं.
PISA में क्या टेस्ट होता है?
ये रट्टा मारने वाला एग्जाम नहीं है. ये देखता है कि बच्चा अपनी नॉलेज और स्किल्स को रियल लाइफ सिचुएशंस में कैसे अप्लाई कर सकता है. जैसे- कोई न्यूज आर्टिकल पढ़कर उसका मतलब समझना, मैथ्स की प्रॉब्लम को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर सॉल्व करना या साइंस के कॉन्सेप्ट से प्रैक्टिकल सॉल्यूशन निकालना.
भारत ने PISA में कब-कब हिस्सा लिया?
भारत ने सिर्फ एक बार हिस्सा लिया था 2009 में. तब हम 73 देशों में से 72वें नंबर पर थे. उसके बाद से भारत ने फिर से पार्टिसिपेट नहीं किया है.लेटेस्ट अपडेट्स के मुताबिक 2025 के PISA में भी भारत ने हिस्सा नहीं लिया.
हमारे यहां के एग्जाम्स में क्या कमी है?
स्कूलों के इंटरनल और बोर्ड एग्जाम ज्यादातर कंटेंट याद करने (rote learning) पर फोकस करते हैं. ये सर्टिफिकेशन और प्रमोशन के लिए होते हैं, लेकिन लर्निंग गैप्स यानी ये पता लगाना कि बच्चा कहां कमजोर है को ठीक करने के लिए डायग्नोस्टिक इविडेंस नहीं देते. ASER और NAS जैसे सर्वे भी कुछ सुधार दिखाते हैं, लेकिन स्ट्रक्चरल इश्यूज बने रहते हैं जैसे रीजनल और सोशियो-इकोनॉमिक डिस्पैरिटी.
Economic Survey 2025-26 ने क्या सुझाव दिया है?
सर्वे कहता है कि भारत में PISA जैसा असेसमेंट क्लास 10 के अंत में शुरू किया जाए.ये एक स्टैंडर्डाइज्ड, कॉम्पिटेंसी-बेस्ड टेस्ट होगा जो स्टेट्स, स्कूल टाइप्स (सरकारी/प्राइवेट) और अलग-अलग सोशियो-इकोनॉमिक ग्रुप्स को एक ही स्केल पर कंपेयर करेगा.
इसके क्या फायदे हो सकते हैं?
– स्कोर के पीछे की वजह समझ आएगी- बच्चे कहां गलती करते हैं, क्या कन्फ्यूजन है?
– ये डेटा पॉलिसीमेकर्स को टारगेटेड इंटरवेंशन्स जैसे स्पेशल ट्रेनिंग,रिसोर्सेज के लिए मदद देगा.
– टीचर्स और स्कूलों को फीडबैक मिलेगा जिससे पढ़ाई बेहतर हो सकेगी.
– स्टेट्स और स्कूल्स में कॉम्पैरिजन से सुधार की स्पीड बढ़ेगी.
– अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ऐसे असेसमेंट से लर्निंग आउटकम्स में सुधार हुआ है.
– कुल मिलाकर रट्टा से हटकर रियल स्किल्स पर फोकस आएगा जो NEP 2020 के भी अनुरूप है.
ये सुझाव स्कूल एजुकेशन को सिर्फ पास-फेल से आगे ले जाकर असली लर्निंग पर शिफ्ट करने का है. अगर लागू हुआ तो बच्चों की पढ़ाई ज्यादा प्रैक्टिकल और उपयोगी बन सकती है.
About the Author
Dhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर
न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. न्यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्सेस स्टोरी की खबरों पर. करीब 15 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व ...और पढ़ें
First Published :
January 30, 2026, 12:06 IST

1 hour ago
