Bolivia evo morales disappearance: बोलिविया के पूर्व राष्ट्रपति और देश के सबसे बड़े समाजवादी नेताओं में गिने जाने वाले एवो मोरालेस करीब एक महीने से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं. उनकी गैरमौजूदगी ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है. समर्थकों में चिंता है और विरोधी इस पर सवाल उठा रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी तरह तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.
जनवरी की शुरुआत के बाद से मोरालेस न तो किसी कार्यक्रम में दिखे हैं और न ही अपनी रोज की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय नजर आए हैं. सोमवार को वह उस कार्यक्रम में भी नहीं पहुंचे, जिसमें वह हर साल छात्रों के स्वागत के लिए जाते हैं. रविवार को उनका साप्ताहिक रेडियो कार्यक्रम भी लगातार चौथी बार नहीं आया है. वर्षों से वह बिना रुके इस कार्यक्रम को करते रहे हैं.
मानव तस्करी का लगा है आरोप
जनवरी के पहले हफ्ते से मोरालेस ने अपने संगठन और कोका पत्ती उगाने वाले किसानों के साथ होने वाली बैठकें भी छोड़ दी हैं. उनका सोशल मीडिया लगभग बंद सा हो गया है. जबकि पिछले एक साल से वह गिरफ्तारी वारंट से बचते हुए भी लगातार जनसभाओं में बोलते रहे थे. वह समर्थकों से मिलते रहे थे. मीडिया को इंटरव्यू दे रहे थे. यहां तक कि उन्होंने पिछले साल एक अनोखे तरीके से चुनाव प्रचार भी किया था.
मोरालेस पर मानव तस्करी और नाबालिग से जुड़े गंभीर आरोप हैं. वह इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं. उनका कहना है कि यह सब उन्हें राजनीति से बाहर करने के लिए किया जा रहा है.
कहा हैं एवो मोरालेस?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एवो मोरालेस आखिर हैं कहां. उनके करीबी लोग इस बारे में कोई साफ जवाब नहीं दे रहे हैं. सार्वजनिक तौर पर सिर्फ इतना कहा जा रहा है कि वह डेंगू से ठीक हो रहे हैं. डेंगू मच्छरों से फैलने वाली बीमारी है. इसके लक्षण आमतौर पर एक हफ्ते में खत्म हो जाते हैं. किसान संगठनों से जुड़े नेता डाइटर मेंडोसा ने कहा कि मोरालेस को पूरी तरह आराम करने को कहा गया है. लेकिन उन्होंने कोई और जानकारी नहीं दी है.
दूसरी तरफ उनके राजनीतिक विरोधियों को 2019 की घटनाएं याद आ रही हैं. उस समय विवादित चुनाव के बाद भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे. सेना के दबाव में मोरालेस को इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद वह पहले मैक्सिको गए थे. फिर अर्जेंटीना में शरण ली थी.
छोड़ चुके हैं देश?
अब एक बार फिर विपक्ष दावा कर रहा है कि मोरालेस देश छोड़ चुके हैं. दक्षिणपंथी सांसद एडगर जेगारा ने बिना सबूत के कहा कि मोरालेस मैक्सिको में हैं. उन्होंने सरकार से यह साबित करने की मांग की कि मोरालेस देश के भीतर ही हैं. पुलिस प्रमुख जनरल मिर्को सोकोल ने कहा कि मोरालेस आधिकारिक रास्तों से देश से बाहर नहीं गए हैं. हालांकि उन्होंने यह भी साफ नहीं किया कि मोरालेस इस समय कहां हैं. पत्रकारों के फोन और मैसेज का भी मोरालेस की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है. इसी बीच समर्थकों और विरोधियों के बीच तनाव और बढ़ गया है.
ट्रंप की नीतियों का असर
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बोलिविया की राजनीति तेजी से राइट विंग की ओर झुक रही है. पिछले अक्टूबर में देश में मध्यमार्गी नेता रोड्रिगो पाज राष्ट्रपति बने हैं. ये बदलाव पूरे लैटिन अमेरिका में चल रही राजनीतिक धारा का हिस्सा माना जा रहा है. कई देशों में दक्षिणपंथी नेता सत्ता में आए हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का भी इस क्षेत्र की राजनीति पर असर देखा जा रहा है. मोरालेस के दौर में अमेरिका से रिश्ते बेहद खराब थे. वह खुलकर अमेरिका विरोधी रुख रखते थे. उन्होंने 2008 में अमेरिकी राजदूत और मादक पदार्थ विरोधी एजेंसियों को देश से बाहर निकाल दिया था.
मोरालेस के शासन के दौरान रूस ने बोलिविया के ऊर्जा और लिथियम क्षेत्रों में निवेश किया था. चीन की कंपनियों को सड़कों और बांधों के बड़े ठेके मिले थे. ईरान ने ड्रोन तकनीक देने की पेशकश की थी. लेकिन अब राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज इस दिशा को बदलना चाहते हैं. उनकी सरकार ने अमेरिकी पर्यटकों के लिए वीजा की शर्तें हटा दी हैं. अमेरिका से आर्थिक मदद और कर्ज पर बातचीत शुरू की गई है. लंबे समय बाद अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसी को दोबारा बोलिविया में काम करने की इजाजत देने की तैयारी भी की जा रही है.
कब दिखे थे आखिरी बार?
डीईए की वापसी की खबर से खास तौर पर बोलिविया के उष्णकटिबंधीय इलाकों में बेचैनी है. यहां कोका की खेती होती है. 1990 के दशक में अमेरिका समर्थित ड्रग युद्ध के दौरान किसानों को जबरन अपनी फसल नष्ट करनी पड़ी थी. उस दौर की यादें आज भी लोगों के मन में हैं. कोका पत्ती से कोकीन बनती है.
लेकिन यही पत्ती बोलिविया की संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से भी जुड़ी हुई है. चापारे इलाके के किसान बताते हैं कि उन्होंने मोरालेस को आखिरी बार 8 जनवरी को देखा था. उसी दिन इलाके के ऊपर एक सैन्य हेलीकॉप्टर उड़ता दिखाई दिया था. इससे लोग डर गए थे कि कहीं मोरालेस को पकड़ने का अभियान तो नहीं चल रहा है.
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