Economic Survey 2026: सरकार ने खोला सस्ती बिजली का रास्ता, चौबीसों घंटे बनेगी बिजली, मौसम का भी डर नहीं

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Last Updated:January 29, 2026, 15:56 IST

Privatization in Electricity : सरकार ने आर्थिक सर्वे में बताया है कि उसने बिजली सेक्‍टर के निजीकरण का रास्‍ता खोल दिया है. अब इस सेक्‍टर में ज्‍यादा निवेश बढ़ेगा और आने वाले समय में बिजली सस्‍ती हो सकती है.

सरकार ने खोला सस्ती बिजली का रास्ता, चौबीसों घंटे बनेगी बिजली, मौसम का डर नहींसरकार ने बिजली सेक्‍टर के निजीकरण की बात कही है.

नई दिल्‍ली. भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. सरकार ने गुरुवार को आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट पेश की, जिसमें सरकार ने न्यूक्लियर पॉवर जनरेशन को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोल दिया है. अभी तक यह क्षेत्र लगभग पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में था. इसके साथ ही इंश्योरेंस सेक्टर में भी 100% विदेशी निवेश की अनुमति लागू कर दी गई है. यह फैसला भारत के ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक विकास रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

न्यूक्लियर ऊर्जा को स्वच्छ, स्थिर और बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का भरोसेमंद स्रोत माना जाता है. सोलर और विंड जैसी रिन्यूएबल एनर्जी मौसम पर निर्भर होती हैं, जबकि परमाणु ऊर्जा लगातार बेस-लोड बिजली देती है. भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश के लिए यह बेहद जरूरी है कि बिजली की सप्लाई लगातार और सस्ती बनी रहे, ताकि उद्योग, स्टार्टअप और डिजिटल इकोनॉमी को सपोर्ट मिल सके. प्राइवेट सेक्टर के आने से सबसे बड़ा फायदा पूंजी निवेश में तेजी के रूप में दिख सकता है. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सरकार अकेले निवेश नहीं कर पाती. निजी कंपनियां नई टेक्नोलॉजी, बेहतर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और तेज निर्माण क्षमता लेकर आ सकती हैं. इससे नए परमाणु संयंत्र तेजी से बन सकते हैं और उत्पादन क्षमता बढ़ सकती है.

सरकार बनाएगी मजबूत फ्रेमवर्क
सरकार का यह फैसला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सुरक्षा और नियामकीय दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है. परमाणु ऊर्जा से जुड़े सुरक्षा मानक, रेडिएशन नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और दुर्घटना जोखिम जैसे मुद्दे बेहद गंभीर होते हैं. सरकार को मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाना होगा, ताकि निजी कंपनियां केवल मुनाफे के लिए सुरक्षा से समझौता न करें. आर्थिक सर्वे यह भी संकेत देता है कि भारत ने कई सेक्टरों में बड़े संरचनात्मक सुधार किए हैं. GST में बड़ा ओवरहॉल, लेबर कोड्स लागू होना, ग्रीन कवर नियमों में लचीलापन और क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स पर पुनर्विचार जैसे कदम उद्योगों के लिए वातावरण को आसान बना रहे हैं.

सस्‍ती होगी बिजली
ऊर्जा सेक्टर में यह बदलाव भारत को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य में भी मदद करेगा. कोयले पर निर्भरता धीरे-धीरे घट सकती है. इससे पर्यावरणीय दबाव कम होगा और अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करना आसान होगा. आम उपभोक्ता के नजरिए से सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे बिजली सस्ती होगी? इसका जवाब सीधे तौर पर हां नहीं है, लेकिन लंबे समय में जब उत्पादन बढ़ेगा, तकनीक बेहतर होगी और प्रतिस्पर्धा आएगी तो लागत घटने की संभावना बनती है. इसका फायदा उपभोक्‍ताओं को भी मिलेगा.

तीन मोर्चे पर मिलेगा फायदा
कुल मिलाकर न्यूक्लियर सेक्टर का निजीकरण भारत की ऊर्जा नीति में एक नया अध्याय खोल रहा है. अगर यह सही नियमन और पारदर्शिता के साथ लागू हुआ तो यह निवेश, रोजगार और ऊर्जा सुरक्षा तीनों मोर्चों पर बड़ा बदलाव ला सकता है. इस नीति से देश में बिना मौसम के डर के पूरे साल बिजली उत्‍पादन किया जा सकेगा. जब बिजली का उत्‍पादन अच्‍छा होगा तो इसकी सप्‍लाई और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना भी आसान हो जाएगा.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

January 29, 2026, 15:56 IST

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