Dr Prefix Row: क्या फिजियोथेरेपिस्ट नाम के आगे Dr लिख सकते हैं? इस कोर्ट ने सुनाया फैसला, जान लें नए नियम

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Last Updated:January 24, 2026, 14:12 IST

Physiotherapists Dr Prefix Row: फिजियोथेरेपिस्ट के लिए ऐतिहासिक जीत! अब वे अपने नाम के आगे शान से 'Dr.' प्रीफिक्स लगा सकेंगे और बिना किसी रेफरल के स्वतंत्र प्रैक्टिस कर सकेंगे. कोर्ट के इस फैसले से फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में करियर बनाने वालों को समाज में नया रुतबा और आजादी मिलेगी.

क्या फिजियोथेरेपिस्ट Dr लिख सकते हैं? इस कोर्ट ने सुनाया फैसला, जानें नए नियमDr Prefix Row: फिजियोथेरेपिस्ट और एलोपैथी डॉक्टर में बहुत अंतर है

नई दिल्ली (Physiotherapists Dr Prefix Row). मेडिकल जगत से आई एक खबर ने देशभर के हजारों फिजियोथेरेपिस्ट के चेहरों पर मुस्कान ला दी है. लंबे समय से चली आ रही कानूनी और सामाजिक बहस पर विराम लगाते हुए फिजियोथेरेपिस्ट को उनके नाम के आगे ‘डॉक्टर’ (Dr.) का इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई है. केरल हाई कोर्ट और विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य निकायों के रेफरेंस के बाद अब स्पष्ट होता जा रहा है कि फिजियोथेरेपी केवल सहायक चिकित्सा नहीं, बल्कि स्वतंत्र और अनिवार्य चिकित्सा पद्धति है.

यह फैसला उन मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए बड़ी जीत है, जो फिजियोथेरेपी को अपना करियर चुनते हैं लेकिन समाज में ‘डॉक्टर’ के दर्जे के लिए संघर्ष करते थे. इस ऐतिहासिक निर्णय का दूसरा पहलू ‘स्वतंत्र प्रैक्टिस’ का अधिकार है. अब फिजियोथेरेपिस्ट को किसी जनरल फिजिशियन के प्रिस्क्रिप्शन या रेफरल का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी. वे स्वतंत्र रूप से मरीजों का निदान और उपचार कर सकेंगे. करियर के नजरिए से देखें तो यह बदलाव इस प्रोफेशन की गरिमा को एमबीबीएस के बराबर खड़ा करता है.

नाम के आगे ‘Dr.’ लिखने का कानूनी आधार

केरल हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिजियोथेरेपिस्ट क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत आते हैं और उन्हें अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में मरीजों का इलाज करने का पूरा अधिकार है. कोर्ट के अनुसार, अगर कोई फिजियोथेरेपिस्ट अपनी डिग्री और योग्यता के आधार पर डॉक्टर शब्द का इस्तेमाल करता है तो इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए. हालांकि, उन्हें अपनी स्पेशलाइजेशन (Physiotherapist) का स्पष्ट उल्लेख करना होगा, जिससे कि जनता के बीच कोई भ्रम न रहे.

स्वतंत्र प्रैक्टिस: अब रेफरल की मजबूरी खत्म

अब तक फिजियोथेरेपिस्ट को अक्सर ‘टेक्नीशियन’ की तरह देखा जाता था, जिन्हें डॉक्टरों के निर्देश पर काम करना होता था. लेकिन नए नियमों और अदालती फैसलों के बाद वे अब स्वतंत्र रूप से अपना क्लिनिक चला सकते हैं. वे मरीजों की जांच कर सकते हैं, फिजियोथेरेप्यूटिक निदान (Diagnosis) कर सकते हैं और ट्रीटमेंट प्लान तैयार कर सकते हैं. यह न केवल फिजियोथेरेपिस्ट के लिए बल्कि मरीजों के लिए भी राहत की बात है.  इससे इलाज की प्रक्रिया तेज और सस्ती होगी.

करियर और सैलरी पर क्या होगा असर?

इस मान्यता के बाद फिजियोथेरेपी (BPT/MPT) कोर्सेज की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है.

रुतबा: समाज में डॉक्टर के रूप में पहचान मिलने से इस प्रोफेशन की तरफ युवाओं का रुझान बढ़ेगा. कमाई: स्वतंत्र प्रैक्टिस के अधिकार से फिजियोथेरेपिस्ट की आय में भारी वृद्धि होगी क्योंकि वे सीधे तौर पर कंसल्टेशन फीस ले सकेंगे. सरकारी नौकरी: स्वास्थ्य सेवाओं में अब फिजियोथेरेपिस्ट को अधिक अधिकार और सम्मानजनक पद मिलने का रास्ता साफ होगा.

फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन सर्जरी नहीं कर सकते और न ही एलोपैथिक दवाएं लिख सकते हैं. उनका कार्यक्षेत्र फिजिकल थेरेपी, रिहैबिलिटेशन और एक्सरसाइज तक सीमित रहेगा.

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Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें

First Published :

January 24, 2026, 14:12 IST

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