DNA: ईरान Vs अमेरिका..नया अपडेट क्या? खलीफा के एटम बम से डर गए ट्रंप?

2 hours ago

Iran Atom Bomb: आचार्य चाणक्य ने कहा है कि 'जिसका राज्य भीतर से अशांत हो, वह बाहर युद्ध छेड़कर जनता को भ्रमित करता है.' घरेलू विफलताओं से ध्यान हटाने की इसी रणनीति पर इस समय ट्रंप काम कर रहे हैं. अमेरिका में गृहयुद्ध जैसी स्थिति है. सरकार के खिलाफ लोग सड़क पर हैं. ट्रंप प्रशासन की नीति के विरुद्ध अपने ही लोग युद्ध लड़ रहे हैं. लेकिन खुद ट्रंप खलीफा के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी में हैं.

बज सकती है तबाही की घंटी

अमेरिकी नौसेना का सबसे विध्वंसक बेड़ा ईरान के अहाते में आकर खड़ा हो चुका है. आशंका जताई जा रही है किसी भी वक्त तेहरान में तबाही की घंटी बज सकती है. हालांकि ऐसी आशंका पिछले चार दिनों से जताई जा रही है. इस बीच अब दावा किया जा रहा है कि खलीफा ने परमाणु शक्ति हासिल कर ली है. यानी ईरान ने एटम बम बना लिया है. सवाल है कि क्या इसलिए ट्रंप ने ईरान पर अटैक को एक्सटेंड कर दिया है? क्या ईरान की एटमी ताकत के कारण ही ट्रंप नई रणनीति पर काम कर रहे हैं? अब हम इन्हीं सवालों का जवाब जानेंगे और ईरान पर अमेरिकी हमले की देरी की इनसाइड स्टोरी का विश्लेषण करेंगे.

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— Zee News (@ZeeNews) January 26, 2026

क्या ईरान ने बना लिया एटम बम?

जब ट्रंप ईरान पर जोरदार हमले की तैयारी कर रहे हैं, तब युद्ध की आहट के बीच बड़ा डेवलपमेंट हुआ है. ईरान की मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि ईरान ने अपना परमामु बम 90 प्रतिशत तक बना लिया है. अगले 36 घंटे के अंदर खामेनेई ईरान को परमाणु संपन्न देश घोषित कर सकते हैं.

ये इस लिहाज से भी बहुत बड़ी ख़बर है कि क्योंकि इससे पहले दूसरे देश भी आशंका जता चुके हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर चुका है. इजरायल भी ऐसी आशंका जता चुका है. अब महाविनाशक युद्ध के मुहाने पर खड़े ईरान की मीडिया की ओर से ऐसा ही दावा किया जा रहा है. ये दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान के पास  हथियार-ग्रेड यूरेनियम बनाने की क्षमता है और ईरान के एटमी शक्ति को लेकर सबसे बडा संकेत ये है कि सारी तैयारी होने के बावजूद ट्रंप ने ईरान पर स्ट्राइक में देरी कर दी है.

ईरान के पास पहले से ही ऐसी मिसाइलें हैं जो  10 से 20 किलोटन तक परमाणु बम ले जाने में सक्षम है. उसके पास सिर्फ एटम बम नहीं था. हम आपको ईरान की कुछ ऐसी मिसाइलों के नाम बताना चाहेंगे जिससे वो अपने दुश्मन पर एटमी अटैक कर सकता है.

ईरान के पास शहाब-3 नाम की मिसाइल है,जिसकी रेंज 2 हजार किलोमीटर तक है और ये एटम बम ले जाने में सक्षम भी है.  

ईरान के पास खैबर शेखन हाइपरसोनिक मिसाइल भी है, जिसकी रेंज 2 हजार किलोमीटर तक है. सेज्जिल नाम की मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल भी ईरान के पास है, जिसकी रेंज 2 हजार किलोमीटर के करीब है.

इसके अलावा फतह 2 हाइपरोसोनिक मिसाइल भी ईरान के पास है जो एटम बम ले जाने में सक्षम है. लेकिन उसकी रेंज 14 सौ से 15 सौ किलोमीटर तक ही है.

ईरान पर अगर आफत आई. अगर अमेरिका ने सीधा हमला किया तो संभव है कि ईरान अपने इन मिसाइलों के जरिए एटम बम का प्रयोग कर सकता है. क्योंकि जब बात अस्तित्व पर आएगी तो खलीफा कोई भी फैसला ले सकता है. ईरान के पास ऐसी कोई भी मिसाइल नहीं है जो सीधे अमेरिका को टारगेट कर सके. इसलिए वो अमेरिका के सहयोगी देश या फिर मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस को ठिकाना बना सकता है. इसकी धमकी पहले भी ईरान दे चुका है. ईरान दीवार पर पोस्टर लगाकर ऐसा संदेश दे चुका है. अगर ईरान ने ऐसा किया तो उसकी एटमी तबाही के केंद्र में कौन-कौन देश होगा, वो भी हम आपको बताना चाहेंगे.

ईरान की जद में पूरा इजरायल

ईरान का पहला लक्ष्य इजरायल होगा. ईरानी एटमी मिसाइल की रेंज में पूरा इजरायल है. इसके अलावा ईरान के जानी दुश्मन सऊदी अरब भी टारगेट पर हो सकता है. जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत को भी ईरान नुकसान पहुंचा सकता है.

अमेरिका मिडिल ईस्ट के अपने सहयोगी देश इराक, जॉर्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को सूचित कर दिया है कि ईरान पर हमला जल्द ही शुरू होगा. अमेरिका के कुछ घातक विमान इन देशों में गुप्त स्थान पर भी एक्टिव कर दिए गए हैं. इजरायल का दावा है कि ईरान पर हमले की स्थिति में संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और ब्रिटेन ने अमेरिकी सेना को रसद और खुफिया सहायता देने की तैयारी भी कर ली है.

अमेरिका के सहयोगियों को टारगेट करेगा ईरान

अमेरिकी राजनीतिज्ञ और राजनयिक रहे हेनरी किसंजर का मानना था कि 'अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दुश्मन से ज़्यादा उसके सहयोगी महत्वपूर्ण होते हैं.' इसलिए खलीफा अमेरिका के सहयोगी देशों को ही टारगेट करने करने का आदेश देगा.

अमेरिका जिस तरह की तैयारी कर रहा है, उससे भी स्पष्ट है कि अमेरिकी अटैक शुरू होने के बाद ईरान के पास काउंटर अटैक का आखिरी विकल्प ही बचेगा और अगर ईरान को एटमी अटैक करना ही पड़ा तो वो अमेरिका सैन्य अड्डों को भी पूरी तरह तबाह कर देगा.

कतर के बेस पर अटैक कर सकता है ईरान

कतर का अल उदैद एयर बेस, जहां पर 10 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, वहां ईरान एटमी अटैक कर सकता है. नौसेना सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन और कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस भी ईरान के टारगेट पर हो सकता है. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात का अल धफ्रा एयर बेस और सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयर बेस को भी ईरान बर्बाद कर सकता है.

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