Bangladesh Elections 2026: दुनिया में पहला Gen-Z चुनाव! क्‍या बांग्‍लादेश में भारत की जगह चीन की हनक बढ़ेगी?

1 hour ago

12 फरवरी को बांग्‍लादेश में आम चुनाव होने जा रहे हैं. इसको दुनिया का पहला Gen-Z चुनाव इसलिए कहा जा रहा है क्‍योंकि 2024 में इस युवा वर्ग के विद्रोह के कारण शेख हसीना की सत्‍ता का पतन हो गया था और उनको बांग्‍लादेश छोड़कर भारत आने के लिए विवश होना पड़ा था. बांग्‍लादेश के चुनाव पर दुनिया के तमाम बड़े देशों के साथ एशिया के दोनों दिग्‍गज देशों भारत और चीन की पैनी नजर है.  

ड्रैगन का दांव

चीन, बांग्‍लादेश के मौजूदा हालात को अपने लिए अनुकूल मानता है. उसको लगता है कि भारत का दबदबा यहां कम हुआ है. लिहाजा अपने संबंध बढ़ाने के लिए उसने ढाका में अपने निवेश और कूटनीतिक पहुंच को बढ़ा दिया है. हाल ही में भारत के साथ बांग्लादेश के बॉर्डर के पास एक ड्रोन फैक्ट्री बनाने के लिए एक डिफेंस डील साइन की है. चीनी दूतावास के फेसबुक पोस्ट के मुताबिक, चीनी राजदूत याओ वेन को अक्सर बांग्लादेशी नेताओं, अधिकारियों और पत्रकारों से मिलते हुए देखा जाता है. वे अरबों डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और दोनों देशों के बीच दूसरे सहयोग पर बात करते हैं. 

Add Zee News as a Preferred Source

चीन एक दशक से ज्‍यादा समय से बांग्लादेश का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर रहा है, जिसका सालाना दो-तरफ़ा ट्रेड लगभग $18 बिलियन है और कुल ट्रेड में चीनी सामान का इंपोर्ट लगभग 95% है. हसीना के जाने के बाद से चीनी कंपनियों ने बांग्लादेश में करोड़ों डॉलर का इन्वेस्टमेंट भी किया है.

नई दिल्ली के थिंक टैंक सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के सीनियर फेलो कॉन्स्टेंटिनो जेवियर ने कहा, 'चीन खुले तौर पर और पर्दे के पीछे, दोनों जगह अपना असर लगातार बढ़ा रहा है, और भारत-बांग्लादेश रिश्तों में संकट से फायदा उठा रहा है.' 'चीन अमेरिका के घटते जुड़ाव और ट्रंप के टैरिफ वॉर का भी फायदा उठा पाया है और खुद को एक ज्‍यादा भरोसेमंद इकोनॉमिक पार्टनर के तौर पर खड़ा कर पाया है.'

एनालिस्ट्स का कहना है कि बांग्लादेश के चीन के साथ रिश्ते मज़बूत होते रहने की उम्मीद है क्योंकि यह ज़्यादा बड़े इकोनॉमिक फायदे देता है. इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के थॉमस कीन ने कहा, 'अगर ढाका और नई दिल्ली चीजों को पटरी पर नहीं ला पाते हैं, तो बांग्लादेश में अगली सरकार के लिए बीजिंग के साथ पूरी रफ़्तार से आगे बढ़ने के ज्‍यादा फायदे होंगे.' 

भारत को इग्‍नोर करना मुश्किल

हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि चीन के साथ गहरा जुड़ाव स्वचालित रूप से भारत को बाहर नहीं करता है. बांग्लादेश को चीन और भारत दोनों की जरूरत है और इसका मतलब भारत के साथ रिश्ते तोड़ना नहीं है. ढाका यूनिवर्सिटी की लैलुफर यास्मीन ने कहा, 'बांग्लादेश को चीन और भारत दोनों की जरूरत है और आपको इसे प्रैक्टिकल नजरिए से सोचना होगा. हालांकि चीन के साथ रिश्ते बेहतर हो सकते हैं लेकिन सत्ता में आने वाली कोई भी पार्टी भारत को नजरअंदाज करने की नासमझी नहीं करेगी.' 

बांग्लादेश जिसके तीन तरफ भारत और दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है, व्यापार, ट्रांजिट और सुरक्षा सहयोग के लिए उस पर निर्भर है. नई दिल्ली को अपनी सीमा को मैनेज करने के लिए ढाका के साथ स्थिर रिश्तों की जरूरत है. हसीना ने बांग्लादेश में मौजूद भारत विरोधी विद्रोहियों पर नकेल कसने में मदद की थी. 

सरकारी डेटा से पता चलता है कि राजनीतिक मतभेद के बावजूद, सालाना द्विपक्षीय व्यापार लगभग $13.5 बिलियन पर स्थिर रहा है जिसमें बांग्लादेश को भारतीय बिक्री का दबदबा है. हालांकि भारत ने 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी  दिलाने में मदद की थी, लेकिन लंबे समय से चली आ रही शिकायतों में पानी के बंटवारे के झगड़े, बॉर्डर पर हत्याएं और इस बात पर गुस्सा शामिल है कि कई बांग्लादेशी भारत को हसीना के नापसंद शासन को सही ठहराते हुए देखते हैं. 

नेशनल सिटिजन पार्टी के नेताओं ने जो जमात के साथ जुड़ा एक Gen Z-समर्थित ग्रुप है, भारत के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है. NCP चीफ नाहिद इस्लाम ने कहा, “यह सिर्फ चुनावी बयानबाजी नहीं है.” 'नई दिल्ली का दबदबा युवाओं में गहराई से महसूस किया जाता है, यह चुनाव के मुख्य मुद्दों में से एक है.'

Read Full Article at Source