BNP and India: बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी मुखिया तारिक रहमान को बधाई दी है. वहीं पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने भी तारिक रहमान को बधाई देते हुए दावा किया बीएनपी सरकार का पाकिस्तान के साथ दोस्ताना रवैया रहेगा. इस्लामाबाद के इस दावे का आधार ये बताया जा रहा है कि तारिक रहमान की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का रुख पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक रहा था.
कौन है तारिक रहमान?
बांग्लादेश के पहले सैन्य शासक और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर, 1965 को हुआ था. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी - Bangladesh ist Party) की स्थापना 1 सितंबर 1978 को राष्ट्रपति जियाउर रहमान द्वारा ने की थी, जिसका मकसद बहुदलीय लोकतंत्र बहाल करने और 'बांग्लादेशी राष्ट्रवाद' के आधार पर देश को नए सिरे से एकजुट करना था.
शेख हसीना की सरकार के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते अच्छे नहीं रहे थे. शेख हसीना की अगुवाई वाली अवामी सरकार भारत को अपना दोस्त मानती थी तो बीएनपी को पाकिस्तान का करीबी माना जाता था. अवामी लीग सरकार में 1971 के युद्ध में बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी के खिलाफ साजिश करने के आरोप में कई पाकिस्तान और जमात ए इस्लामी बांग्लादेश समर्थकों को मौत की सजा दी गई थी. लेकिन अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों में सरगर्मियां बढ़ीं. आज बीएनपी ने दो तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल किया तो नई दिल्ली और ढाके के बीच कई नई संभावनाओं ने जन्म लिया है.
बीएनपी-अवामी लीग और भारत से रिश्ते
पूर्वी पाकिस्तान के अनगिनत बंगाली मुसलमानों के कत्ल के बाद भारत के दखल से 1972 में पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए और पूर्वी पाकिस्तान आजाद होकर बांग्लादेश बन गया. शेख मुजीबुर्रहमान की अगुवाई में अवामी लीग की सरकार बनी. शेख़ हसीना की सरकार के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते अच्छे नहीं रहे थे. अवामी लीग सरकार में 1971 के युद्ध में बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी के ख़िलाफ़ साजिश करने के आरोप में कई पाकिस्तान और जमात समर्थकों को मौत की सजा दी गई थी.
लेकिन अगस्त 2024 में शेख़ हसीना सरकार के पतन के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों में सरगर्मियां बढ़ने लगी.
बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बीच आपसी रिश्तों की अहमियत
बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के करीब डेढ़ साल के भारत विरोधी और हिंदुओं के कत्ल-ओ-गारत (जान-माल के नुकसान) से भरे कार्यकाल में नई दिल्ली और ढाका के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी. 12 फरवरी को हुए आम चुनावों के बाद मतगणना के रुझानों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार बनने की संभावनाओं के बीच भारत सरकार अलर्ट मोड पर थी. बांग्लादेश में यूनुस की कट्टरपंथी अंतरिम सरकार की विदाई यानी बीएनपी के सत्ता में आने जैसे राजनीतिक बदलाव के बीच भारत ने 'एक्ट एट ईस्ट' और 'नेबर्स फर्स्ट' पॉलिसी पे जोर देते हुए फौरन बांग्लादेश के साथ रिश्ते सुधारने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई. पीएम मोदी ने दो तिहाई से ज्यादा बहुमत पाने वाली बीएनपी के नेता तारिक रहमान को बधाई दी.
X पर एक पोस्ट में, मिस्टर मोदी ने लिखा, 'मैं बांग्लादेश में पार्लियामेंट्री चुनावों में बीएनपी को अहम जीत दिलाने के लिए पार्टी चीफ तारिक रहमान को दिल से बधाई देता हूं. इस संदेश में पीएम मोदी ने ये भी कहा, 'ये जीत 'बांग्लादेश के लोगों का आपके नेतृत्व पर भरोसा' दिखाती है. भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा. मैं आपके साथ मिलकर हमारे कई तरह के रिश्तों को मजबूत करने और विकास के हमारे साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए काम करने का इंतज़ार कर रहा हूं.'
बीएनपी ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ
पीएम मोदी का संदेश मिलते ही बीएनपी ने सकारात्मक रुख दिखाया. बीएनपी स्टैंडिंग कमेटी के मेंबर और चीफ इलेक्शन कोऑर्डिनेटर नजरुल इस्लाम खान ने ज़ी न्यूज़ के सहयोगी चैनल WION से बाचतीच में कहा,'हम अपनी पार्टी की तरफ से पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करते हैं, हमें भरोसा है कि तारिक रहमान की अगुवाई में दोनों देशों के लोगों के आपसी रिश्ते भी पहले जैसे मजबूत होंगे. लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान यानी जनादेश स्वीकार करना चाहिए, जैसा प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री मोदी हमेशा से करते आए हैं.

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