Alaska: कभी रूस का हिस्सा हुआ करता था अलास्का, फिर बिना युद्ध के US कैसे बन गया इस विशाल भूखंड का 'मालिक'

2 weeks ago

How America Captured Alaska: रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज अलास्का में मिलने वाले हैं. दिलचस्प बात ये है कि जिस अलास्का में आज दोनों नेताओं की मुलाकात होनी है, वह किसी जमाने में रूस का हिस्सा हुआ करता था. उस वक्त रूस एक विशाल साम्राज्य हुआ करता था, जिसका दबदबा दूर-दूर तक था. फिर रूस के हाथ से यह बेशकीमती हिस्सा कैसे निकल गया और US इस विशाल भूखंड का मालिक बन गया. उसने बिना युद्ध के रूस से अलास्का कैसे हथिया लिया. आइए आज आप को इस बारे में इतिहास से अवगत करवाते हैं. 

रूस को कैसे मिला था अलास्का?

रूस में 18वीं शताब्दी में ज़ार पीटर द ग्रेट का शासन था. उसने 1725 में डेनिश नाविक विटस बेरिंग को अलास्का तट की खोज के लिए भेजा. बेरिंग ने 1741 में अपनी दूसरी कामचटका यात्रा के दौरान अलास्का की मुख्य भूमि को देखा. इस दौरान, उनके दल ने समुद्री ऊदबिलाव की प्रचुरता देखी, जिनके फर का व्यापार उस समय बहुत मूल्यवान था. 

रूस वापस लौटकर उसने यह बात सम्राट जार को बताई. इसके बाद जार के आदेश पर 1740 के दशक से, रूसी व्यापारी और फर शिकारी अलास्का में समुद्री ऊदबिलाव के फर के व्यापार के लिए पहुंचने लगे. इसके बाद ग्रिगोरी शेलिखोव ने 1784 में कोडियाक द्वीप पर थ्री सेंट्स बे में पहली स्थाई रूसी बस्ती स्थापित की. वर्ष 1799 में रूसी सरकार ने रूसी-अमेरिकी कंपनी (RAC) को चार्टर (अधिकार पत्र) प्रदान किया, जिसे अलास्का में व्यापार और प्रशासन का एकाधिकार मिला.

महंगा पड़ रहा था सप्लाई भेजना

धीरे-धीरे रूस ने अलास्का के सिटका, कोडियाक और कुछ अन्य स्थानों पर व्यापारिक चौकियां स्थापित कीं. हालांकि अलास्का में रूसी जनसंख्या कभी भी 400-800 से अधिक नहीं रही. इस विशाल भूखंड का अधिकांश हिस्सा स्थानीय अलास्का वासियों जैसे एल्यूट, त्लिंगित, युपिक के नियंत्रण में रहा. इसके बाद रूसी रूढ़िवादी चर्च ने मिशनरी कार्य शुरू स्थानीय लोगों को ईसाई बनाने का मिशन चलाया, ताकि वे उनका विरोध न कर सके. 

अलास्का को अपने नियंत्रण में बनाए रखने के लिए रूस को नियमित रूप से वहां पर आपूर्ति और सैन्य समर्थन भेजना पड़ता था, जो सेंट पीटर्सबर्ग से हजारों मील दूर होने के कारण बहुत महंगा और मुश्किल काम था. फिर भी ज्यादा से ज्यादा भूभाग की चाह में रूसी सम्राटों ने उसे रूसी साम्राज्य का हिस्सा बनाए रखा. 

19वीं सदी में कमजोर हो गया रूस

19वीं सदी में रूसी साम्राज्य को कई झटके लगने शुरू हुए. 1853-1856 के क्राइमिया युद्ध में रूस की हार ने उसे आर्थिक रूप से काफी कमजोर कर दिया था. इस युद्ध में ब्रिटेन, फ्रांस और तुर्की के गठबंधन ने रूस को परास्त किया, जिसके कारण उसे भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा.

इसके साथ ही 1850 के दशक तक अलास्का में अत्यधिक शिकार की वजह से समुद्री ऊदबिलाव की आबादी लगभग खत्म हो गई, जिसके चलते उसके व्यापार पर निर्भर रूसी-अमेरिकी कंपनी घाटे में चली गई. इसके चलते उस वक्त रूसियों को अलास्का फायदे के बजाय नुकसान का सबब ज्यादा नजर आने लगा.

ब्रिटेन के हमले की आशंका ने बढ़ाई टेंशन

रूस के लिए एक समस्या और भी थी. अलास्का की सीमा कनाडा से सटी हुई थी. जिस पर ब्रिटेन का कब्जा था. उस वक्त ब्रिटेन दुनिया की प्रमुख आर्थिक और सैन्य शक्ति हुआ करता था. जिसका दुनिया के कई दर्जन देशों पर कब्जा था. रूस को डर था कि भविष्य में कोई युद्ध होने पर ब्रिटेन उसके अलास्का इलाके को आसानी से इसे हड़प सकता है. लिहाजा ब्रिटेन उसे हड़पे, उससे पहले ही रूस ने उसे बेचकर मुनाफा कमा लेने का फैसला किया. 

रूस ने अलास्का को बेचने के लिए यूएस का नाम तय किया. इसकी वजह ये थी उस वक्त अमेरिका और ब्रिटेन एक दूसरे के प्रतिद्वंदी हुआ करते थे. ऐसे में रूस को लगा कि अगर वह अलास्का को यूएस को दे देगा तो यह क्षेत्र में ब्रिटिश प्रभाव को संतुलित करेगा और फिर ब्रिटेन उसकी ओर आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करेगा. 

और बिना युद्ध किए अमेरिका को मिल गया अलास्का

रूस ने इस संबंध में अमेरिका से बात शुरू की, जो इस क्षेत्र के फायदों को देखते हुए डील के लिए सहमत हो गए. आखिरकार कई वर्षों तक चली बातचीत के बाद 30 मार्च 1867 को, दोनों पक्षों ने उस वक्त 7.2 मिलियन डॉलर में अलास्का खरीद पर समझौता कर लिया. यह प्रति एकड़ लगभग 2 सेंट की लागत थी.18 अक्टूबर 1867 को सिटका में औपचारिक रूप से अलास्का का हस्तांतरण हुआ. इस दौरान रूसी झंडा उतारकर अमेरिकी झंडा फहराया गया. 

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