Customs Regulations Regarding Antique Coins: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 3 सिक्कों की वजह से एक पैसेंजर को अरेस्ट कर लिया गया. यह पैसेंजर लंदन से वर्जिन अटलांटिक एयरलाइंस की फ्लाइट VS-354 से मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा था. कस्टम की तलाशी में इस पैसेंजर के कब्जे से तीन सिक्के बरामद किए गए. तीन सिक्कों में दो सिक्के सोने के और एक चांदी का था. कस्टम का दावा है कि जांच के दौरान जब्त किए गए सिक्के बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक महत्व वाले हैं, जो अलग-अलग कालखंडों से जुड़े हुए हैं. ये सिक्के भारतीय इतिहास की समृद्ध विरासत को भी दर्शाते हैं.
पैसेंजर से बरामद हुए सिक्कों में क्या है खास?
पहला सिक्का ईस्ट इंडिया कंपनी के बंगाल प्रेसिडेंसी की मोहर है, जिसे 12.37 ग्राम सोने से तैयार किया गया है. इस सिक्के की ढलाई मुर्शिदाबाद मिंट में हुई थी. यह सिक्का मुगल सम्राट शाह आलम II के नाम पर जारी किया गया था और उस पर एएच 1202 / आरवाई 19 दर्ज है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस तरह के गोल्ड मोहर ऐतिहासिक और कलेक्टर्स मार्केट में काफी हाई वैल्यू रखते हैं. मुंबई एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम की टीम के अनुसार, 8 ग्राम सोने से बना दूसरा कॉइन एंशिएंट कुशान एम्पायर के शासक हुषिश्का का गोल्ड दिनार है. कुशान काल भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दौर माना जाता है, और उस समय जारी किए गए गोल्ड दिनार अपनी कला, डिजाइन और ऐतिहासिक महत्व के कारण बेहद कीमती माने जाते हैं. यह कॉइन भी न्यूमिस्मैटिक वैल्यू के लिहाज से काफी अहम है. चांदी से बना तीसरा कॉइन 11.44 ग्राम का है. यह मुगल बादशाह जहांगीर के दौर का चांदी से तैयार किया गया सिक्का है, जिस पर कर्क राशि की तस्वीर गुदी हुई है. जहांगीर द्वारा जारी किए गए जोडिएक सीरीज के सिक्के दुनिया भर में मशहूर हैं और कलेक्टर्स के बीच इनकी काफी डिमांड रहती है. यह खास सिल्वर कॉइन अहमदाबाद मिंट में ढाला गया था.समझिए भारत में एंटीक कॉइन्स से जुड़े नियम
भारत में एंटीक कॉइन किसे माना जाता है?
भारत में 100 वर्ष से पुराने सिक्कों को कानूनी तौर पर एंटीक्विटी यानी प्राचीन वस्तु माना जाता है. ऐसे सिक्के केवल संग्रहणीय वस्तु नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा माने जाते हैं. इसलिए इन पर सामान्य मुद्रा या कलेक्शन आइटम की तरह नहीं, बल्कि एंटीक्विटीज एंड आर्ट ट्रेजर्स एक्ट, 1972 के तहत विशेष कानून लागू होता है. इनके रखने या ट्रांसपोर्ट करने को लेकर भी नियम निर्धारित हैं.
क्या 100 साल से पुराने सिक्कों को भारत से बाहर ले जाया जा सकता है?
नहीं, सामान्य परिस्थितियों में 100 वर्ष से अधिक पुराने भारतीय सिक्कों का निर्यात पूरी तरह प्रतिबंधित है. यह प्रतिबंध एंटीक्विटीज़ एंड आर्ट ट्रेज़र्स एक्ट, 1972 और फेमा नियमों के तहत लागू होता है. बिना अनुमति ऐसे सिक्कों को विदेश ले जाना या भेजना अवैध माना जाता है. केवल विशेष मामलों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के महानिदेशक की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है, जो बहुत सीमित परिस्थितियों में ही दी जाती है.
क्या एंटीक सिक्कों का एएसआई में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है?
हां, 100 वर्ष से अधिक पुरानी वस्तुओं या सिक्कों को अपने पास रखने के लिए एएसआई या संबंधित सरकारी प्राधिकरण के साथ पंजीकरण कराना आवश्यक माना जाता है. रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि वस्तु वैध रूप से प्राप्त की गई है और उसका रिकॉर्ड सरकारी सिस्टम में मौजूद है. रजिस्ट्रेशन होने से मालिक के पास कानूनी स्वामित्व का प्रमाण रहता है और भविष्य में जांच या विवाद की स्थिति से बचा जा सकता है.
विदेश यात्रा के दौरान एंटीक कॉइन्स साथ ले जाने पर क्या नियम लागू होते हैं?
यदि कोई व्यक्ति अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान एंटीक सिक्के साथ ले जाता है, तो उसे कस्टम अधिकारियों को इसकी जानकारी देना अनिवार्य है. साथ ही स्वामित्व प्रमाणपत्र, मूल्यांकन रिपोर्ट और अन्य वैध दस्तावेज दिखाने होते हैं. बिना घोषणा या दस्तावेज के ऐसे सिक्के मिलने पर कस्टम विभाग उन्हें तुरंत जब्त कर सकता है और तस्करी से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई भी हो सकती है.
क्या विदेश से एंटीक कॉइन्स भारत लाए जा सकते हैं?
हां, विदेश से एंटीक कॉइन्स भारत लाए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए कड़े दस्तावेजी नियमों का पालन करना जरूरी होता है. कस्टम में डिक्लेयर करना अनिवार्य है और मूल देश से जारी निर्यात लाइसेंस या वैध अनुमति दिखानी पड़ सकती है. भारत में लाने के बाद ऐसे सिक्कों का एएसआई में रजिस्ट्रेशन भी आवश्यक हो सकता है. दस्तावेजों की कमी होने पर कस्टम विभाग जब्ती की कार्रवाई कर सकता है.
क्या भारत में एंटीक कॉइन्स की खरीद-बिक्री की अनुमति है?
भारत के भीतर पुराने सिक्कों की खरीद-बिक्री की अनुमति है, लेकिन यह पूरी तरह नियमों के अधीन होती है. सिक्के प्रचलन में नहीं होने चाहिए और उनके स्रोत व स्वामित्व के दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए. 100 वर्ष से अधिक पुराने सिक्कों के मामले में एंटीक्विटीज़ एंड आर्ट ट्रेज़र्स एक्ट, 1972 के प्रावधान लागू होते हैं. यदि विदेशी खरीदार को बेचना हो, तो अतिरिक्त लाइसेंस और सरकारी अनुमति की आवश्यकता पड़ सकती है.
फेमा (FEMA) नियम एंटीक सिक्कों पर कैसे लागू होते हैं?
फेमा के तहत सामान्य रूप से सीमित मूल्य तक विदेशी मुद्रा या सिक्के देश से बाहर ले जाने की अनुमति होती है, जिसकी सीमा लगभग 25,000 रुपये प्रति व्यक्ति है. लेकिन 100 वर्ष से अधिक पुराने भारतीय सिक्के इस सामान्य श्रेणी में नहीं आते. उन्हें एंटीक्विटी माना जाता है और उनके निर्यात पर अलग से पूर्ण प्रतिबंध लागू होता है, इसलिए फेमा की सामान्य सीमा यहां लागू नहीं होती.
बिना दस्तावेज एंटीक कॉइन्स मिलने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
यदि किसी व्यक्ति के पास बिना वैध दस्तावेज या अनुमति के एंटीक सिक्के पाए जाते हैं, खासकर एयरपोर्ट या सीमा जांच के दौरान, तो कस्टम अधिकारी उन्हें जब्त कर सकते हैं. मामले की गंभीरता के आधार पर तस्करी, अवैध निर्यात या सांस्कृतिक संपत्ति संरक्षण कानूनों के तहत जांच शुरू हो सकती है. दोष सिद्ध होने पर जुर्माना, कानूनी कार्रवाई और अन्य दंडात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं.

1 hour ago
