Last Updated:February 21, 2026, 13:30 IST
Amit Shah CRPF Raising Day: गृह मंत्री अमित शाह CRPF के 87वें स्थापना दिवस समारोह में शिरकत करते हुए कई बातों का उल्लेख किया. उन्होंने अर्धसैनिक बल के जवानों की शहादत को याद करते हुए कहा कि CRPF ने जम्मू-कश्मीर से लेकर नक्सल प्रभावित इलाकों और पूर्वोत्तर में शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई.

गुवाहाटी. गृह मंत्री अमित शाह ने असम में आयोजित सीआरपीएफ (Central Reserve Police Force – CRPF) के 87वें स्थापना दिवस परेड को संबोधित करते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा में अर्धसैनिक बल के योगदान की सराहना की. उन्होंने CRPF के 2200 से अधिक शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश की शांति और एकता बनाए रखने में बलिदान देने वाले जवानों का योगदान अविस्मरणीय है. गृह मंत्री ने कहा कि लगभग 11-12 वर्ष पहले देश के तीन प्रमुख अशांत क्षेत्र (पूर्वोत्तर, नक्सल प्रभावित इलाके और जम्मू-कश्मीर) लगातार हिंसा की चपेट में रहते थे. उस समय बम धमाकों और गोलीबारी की घटनाएं आम थीं, लेकिन आज इन क्षेत्रों में स्थिति काफी हद तक शांतिपूर्ण है. उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में 700 से अधिक जवानों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 736 और जम्मू-कश्मीर में करीब 500 जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, जबकि लगभग 250 जवानों ने देश के अन्य हिस्सों में बलिदान दिया.
अमित शाह ने कहा कि देश के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक पूर्वोत्तर में इस (CRPF) परेड का आयोजन होना गौरव का विषय है. गृह मंत्री ने कहा कि जब भी कहीं अशांति की खबर मिलती है और वहां सीआरपीएफ के जवानों की मौजूदगी होती है, तो देशवासियों को भरोसा और सुरक्षा का एहसास होता है. गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली के लिए सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के योगदान को विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि माओवाद (जिसने लंबे समय तक देश के कई हिस्सों को जकड़ रखा था) उसे खत्म करने में सीआरपीएफ और कोबरा कमांडो की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है.
’31 मार्च तक देश नक्सल मुक्त’
अमित शाह ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक देश को माओवाद की समस्या से पूरी तरह मुक्त कर देगी. उन्होंने कहा कि एक समय देश के 12 राज्यों और अनेक जिलों में माओवाद का गहरा प्रभाव था, लेकिन सरकार के ठोस संकल्प और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से स्थिति तेजी से बदली है. उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इतनी जटिल और चुनौतीपूर्ण समस्या को कुछ वर्षों के भीतर नियंत्रित करना सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता है. गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक बदलावों (अनुच्छेद 370 हटाना) के बाद भी बड़े पैमाने पर अशांति नहीं हुई और एक भी गोली चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जिसमें सीआरपीएफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी लगभग समाप्त – गृह मंत्री
अमित शाह ने बताया कि क्षेत्र में पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं और अब वहां उद्योगों के साथ विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. इस बदलाव में Border Security Force (बीएसएफ), सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस का बड़ा योगदान रहा है. पूर्वोत्तर राज्यों में शांति स्थापित करने के प्रयासों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में हाल ही में हुई जातीय हिंसा को नियंत्रित करने में भी सीआरपीएफ की निर्णायक भूमिका रही. उन्होंने कहा कि जब भी देश के किसी हिस्से में संकट उत्पन्न होता है, सीआरपीएफ के जवान सबसे आगे रहकर स्थिति को संभालते हैं. अपने संबोधन के अंत में गृह मंत्री ने दोहराया कि सीआरपीएफ के जवानों के पराक्रम और समर्पण के बल पर देश जल्द ही माओवाद से पूरी तरह मुक्त होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा.
About the Author
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
Guwahati,Kamrup Metropolitan,Assam
First Published :
February 21, 2026, 13:27 IST

1 hour ago
