Last Updated:August 06, 2025, 18:53 IST
Ajab Gajab: तमिलनाडु की सेल्वा बृंदा ने 22 महीनों में 300 लीटर मां का दूध दान किया, जिससे हजारों समयपूर्व जन्मे और बीमार बच्चों की जान बची. उनके इस योगदान को एशिया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिली.

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा और साथ ही गर्व भी महसूस करेगा. यहां कट्टूर इलाके में रहने वाली 33 साल की सेल्वा बृंदा नाम की महिला ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो हर किसी के बस की बात नहीं. उन्होंने अपने मां बनने के अनुभव को एक बड़ी समाजसेवा में बदल दिया. बृंदा ने लगातार 22 महीनों तक मां का दूध (ब्रेस्ट मिल्क) दान किया और इसका फायदा हजारों नवजात बच्चों को मिला.
मां का दूध बना ज़िंदगी की डोर
अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक बृंदा ने अब तक 300 लीटर से ज्यादा मां का दूध दान किया है. यह दूध उन नवजात बच्चों के लिए दिया गया, जो या तो समय से पहले पैदा हुए थे या फिर किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. ऐसे बच्चों को जन्म के बाद मां का दूध नहीं मिल पाता, जो उनकी ज़िंदगी के लिए बहुत ज़रूरी होता है. लेकिन बृंदा के इस योगदान की वजह से इन बच्चों की जान बच सकी.
अस्पताल के मिल्क बैंक को दिया गया सारा दूध
बृंदा ने ये दूध महात्मा गांधी मेमोरियल सरकारी अस्पताल (MGMGH) के मिल्क बैंक को दिया. ये अस्पताल तिरुचिरापल्ली में है और यहां का मिल्क बैंक उन नवजातों के लिए दूध इकट्ठा करता है, जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पाता.
अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल 2023 से फरवरी 2025 के बीच बृंदा ने कुल 300.17 लीटर दूध इस बैंक को दान किया. यह आंकड़ा अपने आप में बहुत बड़ा है, क्योंकि एक आम महिला इतनी ज्यादा मात्रा में दूध दान नहीं कर पाती.
आधे से ज्यादा दूध अकेले बृंदा ने दिया
अस्पताल प्रशासन ने एक और चौंकाने वाली जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान जितना भी दूध इस मिल्क बैंक में दान किया गया, उसका करीब 50 फीसदी अकेले बृंदा ने ही दिया. यानी पूरे साल में जितना दूध इकट्ठा हुआ, उसका आधा हिस्सा सिर्फ एक महिला की वजह से आया. यह किसी भी अस्पताल के लिए एक बहुत बड़ी मदद थी.
कैसे मिली प्रेरणा?
सेल्वा बृंदा को इस नेक काम के लिए एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) ने प्रेरित किया था. जब उन्होंने पहली बार सुना कि मां का दूध दान करने से बहुत से नवजात बच्चों की जान बचाई जा सकती है, तो उन्होंने इस काम की शुरुआत की. इसके बाद वो रुकें नहीं. उन्होंने इसे अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना लिया और लगभग दो साल तक लगातार दूध दान करती रहीं.
रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज हुआ नाम
बृंदा के इस अनोखे योगदान को सिर्फ अस्पताल या डॉक्टरों ने ही नहीं सराहा, बल्कि उन्हें ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में भी जगह मिली है. यह सम्मान किसी भी आम इंसान के लिए बहुत बड़ा होता है. रिकॉर्ड बुक्स में उनका नाम इसलिए दर्ज किया गया क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में मां का दूध दान करना अपने आप में एक रिकॉर्ड है.
First Published :
August 06, 2025, 18:53 IST