115 मीटर लंबा, 4200 टन का महाबली! ये है पानी का नया सुल्तान, स्पीड 40+ KM/घंटा

1 day ago

Last Updated:January 05, 2026, 20:22 IST

Samudra Pratap Ship: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में स्वदेशी पोत 'समुद्र प्रताप' को तटरक्षक बल में शामिल किया. यह भारत का पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज है. 115 मीटर लंबा यह पोत 60% स्वदेशी तकनीक से बना है. यह समंदर में तेल रिसाव रोकने और सुरक्षा के लिए तैनात होगा. इसमें दो महिला अधिकारी भी तैनात की गई हैं.

115 मीटर लंबा, 4200 टन का महाबली! ये है पानी का नया सुल्तान, स्पीड 40+ KM/घंटातटरक्षक बल को मिला सबसे ताकतवर पोत, राजनाथ ने लॉन्च किया 'समुद्र प्रताप'

नई दिल्ली: भारतीय तटरक्षक बल की ताकत अब पहले से कई गुना बढ़ गई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को देश को समर्पित कर दिया है. यह भारत का पहला ऐसा जहाज है जिसे पूरी तरह देश में ही डिजाइन और तैयार किया गया है. यह सिर्फ प्रदूषण नहीं रोकेगा, बल्कि समंदर में दुश्मनों की घुसपैठ और स्मगलिंग पर भी लगाम लगाएगा. 115 मीटर लंबा यह विशाल पोत आधुनिक तकनीक से लैस है. गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित यह शिप ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जीता-जागता उदाहरण है. इसमें 60 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामान का इस्तेमाल हुआ है. खास बात यह है कि इस फ्रंटलाइन पोत पर महिला अधिकारियों की भी तैनाती की गई है. राजनाथ सिंह ने इसे समंदर का रक्षक बताया है. यह आने वाले समय में नीली अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा की बड़ी गारंटी बनेगा.

क्या ‘समुद्र प्रताप’ समंदर में चीन और पाकिस्तान के लिए काल बनेगा?

भारतीय समुद्री सीमा करीब 7,500 किलोमीटर लंबी है. इसकी सुरक्षा करना एक बड़ी चुनौती रही है. ‘समुद्र प्रताप’ के आने से तटरक्षक बल की गश्त करने की क्षमता बढ़ गई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि यह पोत दुश्मनों के मन में डर पैदा करेगा. अगर किसी ने भी भारत की समुद्री सीमा की तरफ आंख उठाई, तो यह उसे करारा जवाब देगा. यह पोत केवल प्रदूषण नहीं रोकता बल्कि यह एक युद्धक प्लेटफार्म की तरह भी काम कर सकता है. इसकी तैनाती से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का दबदबा और बढ़ेगा. समुद्री लुटेरों और स्मगलर्स के खिलाफ भी यह जहाज बेहद प्रभावी साबित होगा. इसकी रफ़्तार और आधुनिक रेडार सिस्टम इसे एक घातक शिकारी बनाते हैं.

Attended the Commissioning Ceremony of Indian Coast Guard Ship Samudra Pratap, India’s first indigenously designed Pollution Control Vessel built by Goa Shipyard Limited.

ICGS Samudra Pratap is an embodiment of India’s mature defence industrial ecosystem; a product of GSL’s… pic.twitter.com/8k357A2uCn

समुद्र प्रताप की वे 5 बड़ी खूबियां क्या हैं जो इसे दुनिया में सबसे अलग बनाती हैं?

इस जहाज की बनावट और ताकत इसे बेहद खास बनाती है.

पहली खूबी इसकी लंबाई और वजन है. यह करीब 115 मीटर लंबा और 4,200 टन वजनी है. दूसरी खूबी इसकी रफ़्तार है. यह 22 नॉट से ज्यादा की स्पीड से समंदर की लहरों को चीर सकता है. तीसरी बड़ी खूबी इसका बहुआयामी होना है. यह एक साथ प्रदूषण नियंत्रण, बचाव अभियान और गश्त कर सकता है. चौथी खूबी इसकी स्वदेशी तकनीक है. इसका 60 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बना है. पांचवीं खूबी इसकी स्टेल्थ और निगरानी क्षमता है. यह कोहरे और खराब मौसम में भी दुश्मन को आसानी से ट्रैक कर सकता है.

ये सभी खूबियां इसे एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ बनाती हैं.

प्रदूषण से जंग के लिए इस जहाज में कौन सी आधुनिक तकनीक लगी है?

समुद्र में तेल का रिसाव एक बड़ी वैश्विक समस्या है. इससे समुद्री जीव और पर्यावरण को भारी नुकसान होता है. ‘समुद्र प्रताप’ को इसी चुनौती से निपटने के लिए बनाया गया है. इसमें तेल के रिसाव को रोकने के लिए आधुनिक स्किमर्स और बूम्स लगे हैं. इसके अंदर एक एडवांस लैब भी बनाई गई है. यह लैब रीयल-टाइम में समुद्री प्रदूषण का विश्लेषण कर सकती है. इसमें बड़े स्टोरेज टैंक भी हैं जो भारी मात्रा में प्रदूषित तेल को स्टोर कर सकते हैं. यह जहाज समंदर की सफाई के लिए एक चलता-फिरता प्लांट है. इसके ऊपर एक हेलीपैड भी मौजूद है. हवा से निगरानी कर यह प्रदूषण के स्रोत का तुरंत पता लगा सकता है. यह तकनीक भारत को समुद्री सुरक्षा में अग्रणी देशों की कतार में खड़ा करती है.

महिला शक्ति और आत्मनिर्भर भारत का संगम कैसे बना यह नया पोत?

‘समुद्र प्रताप’ महिला सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है. इस पोत पर दो महिला अधिकारियों की फ्रंटलाइन पर तैनाती की गई है. रक्षा मंत्री ने इसकी जमकर तारीफ की. आज महिलाएं केवल सहायक नहीं बल्कि युद्ध के मैदान में भी लीडर बन रही हैं. इसके साथ ही यह जहाज ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी सफलता है. इसे गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने 284 करोड़ रुपये की लागत से बनाया है. इसके इंजन से लेकर इसके सेंसर्स तक भारत में ही तैयार हुए हैं. यह दिखाता है कि भारत अब रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर हो रहा है. हम अब केवल खरीदार नहीं बल्कि बड़े जहाजों के निर्माता भी बन गए हैं.

क्या 2026 में समुद्री सुरक्षा के मायने बदल देगा यह स्वदेशी महाबली?

साल 2026 भारत की समुद्री रणनीति के लिए बहुत अहम है. दुनिया का ज्यादातर व्यापार हिंद महासागर के रास्ते ही होता है. ‘समुद्र प्रताप’ जैसे जहाज इस व्यापारिक मार्ग को सुरक्षित रखेंगे. क्लाइमेट चेंज की वजह से समुद्री आपदाएं बढ़ रही हैं. ऐसे में इस पोत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. यह सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशंस में भी बहुत तेज है. डूबे हुए जहाजों या संकट में फंसे मछुआरों को बचाने में यह संजीवनी साबित होगा. राजनाथ सिंह ने भरोसा दिलाया कि हमारे मछुआरे अब बेखौफ होकर काम कर सकते हैं. तटरक्षक बल उनकी सुरक्षा के लिए हर पल तैनात है.

नीली अर्थव्यवस्था की सुरक्षा में ‘समुद्र प्रताप’ की क्या भूमिका होगी?

भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा समुद्र पर निर्भर है. तेल, गैस और मछली पालन जैसे क्षेत्रों से करोड़ों लोगों की आजीविका जुड़ी है. समुद्री प्रदूषण इन सबको तबाह कर सकता है. ‘समुद्र प्रताप’ इस नीली अर्थव्यवस्था का रक्षक बनकर उभरा है. यह सुनिश्चित करेगा कि हमारा समुद्र साफ रहे और संसाधन सुरक्षित रहें. अवैध शिकार करने वाले विदेशी जहाजों पर भी इसकी पैनी नजर रहेगी. यह एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) की सुरक्षा को और पुख्ता करेगा. भारत अब अपनी समुद्री संपदा का दोहन बिना किसी डर के कर सकता है.

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Deepak Verma

दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्‍य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

January 05, 2026, 20:18 IST

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