मुस्‍कुराइए आपके लखनऊ ने बनाया रिकार्ड, जानकर आप भी खुश होंगे

2 hours ago

Last Updated:January 21, 2026, 19:28 IST

राजधानी लखनऊ ने देश में स्वच्छता के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है. यह राज्य का पहला शहर बन गया जहां ताजा कचरे का डंपिंग पूरी तरह शून्य हो गया है. शहर में प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है. पहले यह कचरा खुले डंपयार्ड में फेंका जाता था.

मुस्‍कुराइए आपके लखनऊ ने बनाया रिकार्ड, जानकर आप भी खुश होंगेदूसरे शहरों के लिए उदाहरण बना लखनऊ.

नई दिल्‍ली. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने देश में स्वच्छता के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है. यह राज्य का पहला शहर बन गया जहां ताजा कचरे का डंपिंग पूरी तरह शून्य हो गया है. स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत लखनऊ नगर निगम ने नगरपालिका ठोस कचरे का 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण हासिल कर लिया है.

शहर में प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है. पहले यह कचरा खुले डंपयार्ड में फेंका जाता था. लेकिन अब इसे पूरी तरह प्रोसेस किया जा रहा है. शिवारी ठोस वेस्‍ट मैनेजमेंट संयंत्र में नया 700 मीट्रिक टन क्षमता वाला यूनिट शुरू हुआ है. पहले से चल रहे दो संयंत्रों के साथ कुल क्षमता अब 2,100 मीट्रिक टन से अधिक हो गई है. इससे शहर में कहीं भी नया कचरा डंप नहीं बढ़ेगा.

लखनऊ नगर निगम ने घर-घर कचरा कलेक्‍ट करने की व्यवस्था को 96.53 प्रतिशत तक मजबूत किया है. स्रोत पर गीला-सूखा कचरा अलग करने का स्तर 70 प्रतिशत से अधिक पहुँच गया. जैविक कचरे से उच्च गुणवत्ता वाली खाद और बायोगैस का उत्पादन हो रहा है. प्लास्टिक. कागज और धातु जैसे सूखे कचरे को रिसाइकल यूनिटों में भेजा जा रहा या RDF (रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल) में परिवर्तित किया जा रहा. यह ईंधन सीमेंट कारखानों और कागज मिलों में ऊर्जा के रूप में उपयोग हो रहा है.

पुराने जमा कचरे (लीगेसी वेस्ट) का भी 69 प्रतिशत प्रसंस्करण पूरा हो चुका है. कुल 18.5 लाख मीट्रिक टन में से 12.86 लाख मीट्रिक टन का वैज्ञानिक निपटान हो गया. इससे RDF, जैव-मिट्टी, निर्माण मलबा और रेत प्राप्त हुई. शिवरी साइट पर 25 एकड़ से अधिक जमीन अब पूरी तरह साफ होकर नई सुविधाओं, पार्कों और खेल मैदानों के लिए तैयार है.

भविष्य की योजना में 15 मेगावाट वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित होगा. यह प्लांट प्रतिदिन 1,000-1,200 टन RDF से बिजली बनाएगा. इससे कचरे का परिवहन कम होगा. प्रदूषण घटेगा और राजस्व भी बढ़ेगा. लखनऊ का यह मॉडल चक्रीय अर्थव्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण है. कचरे को बोझ से बदला गया संसाधन. अन्य सभी शहर इसकी नकल कर सकते हैं.

Location :

Lucknow,Lucknow,Uttar Pradesh

First Published :

January 21, 2026, 19:28 IST

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