Last Updated:January 20, 2026, 18:14 IST
महाराष्ट्र के पालघर में ट्रैफिक आदेश का गुजराती अनुवाद जारी होने पर राजनीतिक हंगामा शुरू हो गया है. कांग्रेस और शिवसेना-यूबीटी ने इसे मराठी अस्मिता पर हमला बताया है. प्रशासन का कहना है कि यह केवल गुजरात के वाहन चालकों की सुविधा के लिए था. विपक्षी नेताओं ने इसे राज्य पर बाहरी भाषा थोपने की साजिश करार दिया है.
क्या महाराष्ट्र पर थोपी जा रही है गुजराती? पालघर प्रशासन के एक आदेश ने खड़ा किया बड़ा सियासी बवंडर (सांकेतिक फाइल फोटो : पीटीआई)मुंबई/अहमदाबाद: महाराष्ट्र के पालघर में जिला प्रशासन द्वारा गुजराती भाषा में जारी एक नोटिफिकेशन ने राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. पालघर कलेक्टर ने 19 और 20 जनवरी को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी के एक मोर्चे को देखते हुए हाईवे पर यातायात प्रतिबंधों का आदेश दिया था. प्रशासन का दावा है कि मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर गुजरात से आने वाले वाहन चालकों की सुविधा के लिए इस आदेश का गुजराती अनुवाद बॉर्डर के गांवों में लगाया गया था. हालांकि विपक्षी दलों कांग्रेस और शिवसेना-यूबीटी ने इसे मराठी अस्मिता का अपमान बताया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य पर गुजराती भाषा थोपने की कोशिश की जा रही है. संजय राउत ने इसे एक गंभीर मुद्दा बताते हुए मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मूल आदेश मराठी में ही था. इस विवाद ने एक बार फिर महाराष्ट्र और गुजरात के बीच भाषाई और राजनीतिक तनाव को हवा दे दी है.
पालघर में गुजराती भाषा में नोटिफिकेशन जारी करने की असली वजह क्या थी?
प्रशासन ने इस विवाद पर अपनी सफाई पेश की है. अधिकारियों के मुताबिक सीपीआई-एम के विरोध प्रदर्शन के कारण हाईवे पर ट्रैफिक रोकना बेहद जरूरी था. बड़ी संख्या में वाहन चालक गुजरात से महाराष्ट्र में प्रवेश करते हैं. उनकी सुविधा के लिए गुजरात की तरफ के अधिकारियों ने आदेश का अनुवाद करवाया था. इसे अचड जैसे सीमावर्ती गांवों में प्रदर्शित किया गया था. प्रशासन का उद्देश्य केवल ट्रैफिक नियमों की जानकारी देना था. अधिकारियों ने कहा कि मराठी भाषा का अपमान करने का उनका कोई इरादा नहीं था.
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए क्या गंभीर आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने इसे एक सोची-समझी शुरुआत बताया है. उन्होंने दावा किया कि पालघर से शुरू होकर अब गुजराती भाषा पूरे राज्य पर थोपी जाएगी. संजय राउत ने सवाल पूछा कि क्या पालघर को पड़ोसी राज्य का हिस्सा मान लिया गया है. उन्होंने इसे बुलेट ट्रेन और वधवन पोर्ट जैसी परियोजनाओं से जोड़कर देखा है. नाना पटोले ने तो मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की साजिश का आरोप भी मढ़ दिया है. इन नेताओं का कहना है कि यह मराठी संस्कृति को खत्म करने की कोशिश है.
क्या प्रशासनिक स्पष्टीकरण के बाद शांत हो जाएगा महाराष्ट्र का भाषाई विवाद?
वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि मूल आधिकारिक आदेश मराठी भाषा में ही जारी हुआ था. अनुवाद केवल गुजरात से आने वाले यात्रियों की समझ के लिए किया गया था. इसमें मराठी भाषा के अपमान या उसे कमतर आंकने की कोई बात नहीं है. सीमावर्ती क्षेत्रों में अक्सर सूचनाएं दो भाषाओं में दी जाती हैं. लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर गरमा-गरमी कम होने का नाम नहीं ले रही है.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़...और पढ़ें
Location :
Mumbai,Maharashtra
First Published :
January 20, 2026, 18:07 IST
क्या महाराष्ट्र पर थोपी जा रही है गुजराती? एक आदेश से खड़ा हुआ बड़ा सियासी बवंडर

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