बिहार का रहने वाला यह आईएएस, कभी सीएम योगी का था पसंदीदा, 360 दिनों बाद क्यों आया लाइम लाइट में?

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कभी सीएम योगी का था पसंदीदा आईएएस, 360 दिनों बाद क्यों आया लाइम लाइट में?

Last Updated:March 15, 2026, 16:08 IST

एक साल के लंबे निलंबन के बाद यूपी कैडर के 2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव बनाए गए हैं. 20 मार्च 2025 को भ्रष्टाचार के आरोप में योगी सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था. कभी अभिषेक प्रकाश यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के गुड बुक में हुआ करते थे. लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप ने उनके करियर पर दाग लगा दिया. इलाहाबाद हाईकोर्ट से साक्ष्यों के अभाव में मिली क्लीन चिट के बाद अब सरकार ने उन्हें सचिव सामान्य प्रशासन के पद पर तैनात किया है. जानिए इस आईएएस पर सीएम योगी ने कितना भरोसा किया था.

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आईएएस अभिषेक प्रकाश क्यों चर्चा में हैं?

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में रविवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला. करीब 360 दिन निलंबन की सजा झेलने के बाद 2006 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को सेवा में बहाल कर दिया गया. उत्तर प्रदेश शासन के नियुक्ति विभाग ने शनिवार को उनकी बहाली का आदेश जारी किया था, जिसके बाद 15 मार्च 2026 से वह अपनी नई भूमिका यानी सचिव, सामान्य प्रशासन के तौर पर काम शुरू करेंगे. अभिषेक प्रकाश के निलंबन की कहानी 20 मार्च 2025 को शुरू हुई थी. उस समय वह राज्य की सबसे महत्वपूर्ण निवेश एजेंसी ‘इन्वेस्ट यूपी’ (Invest UP) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के पद पर तैनात थे. उन पर SAEL Solar P6 प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के प्रतिनिधि विश्वजीत दत्ता ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे. सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर दाग लगने के बाद शासन ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था. जानिए कैसे अभिषेक प्रकाश इस दाग से बाहर आए.

अभिषेक प्रकाश पर शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक बिचौलिए निकांत जैन के जरिए अभिषेक प्रकाश ने करीब 400 करोड़ रुपये के सोलर पावर प्रोजेक्ट की मंजूरी के बदले 5 प्रतिशत लगभग 20 करोड़ रुपये कमीशन की मांग की थी. शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधे पत्र लिखकर इस भ्रष्टाचार की जानकारी दी थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए थे और अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया था.

सीएम योगी का भरोसा और निलंबन का सदमा

अभिषेक प्रकाश को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में गिना जाता था. लखनऊ के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने डिफेंस कॉरिडोर की जमीन अधिग्रहण और कोविड-19 प्रबंधन में जैसा काम किया था, उससे सीएम योगी उनसे काफी प्रभावित थे. इसी भरोसे के चलते उन्हें ‘इन्वेस्ट यूपी’ जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी ताकि वे राज्य में विदेशी और निजी निवेश को गति दे सकें. लेकिन भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आते ही सीएम ने बिना देरी किए उन पर कार्रवाई कर यह संदेश दिया कि नियमों से ऊपर कोई नहीं है.

हाईकोर्ट की क्लीन चिट और बहाली की राह

अभिषेक प्रकाश के लिए राहत की खबर फरवरी 2026 में आई. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया. कोर्ट ने पाया कि भ्रष्टाचार साबित करने के लिए पुलिस के पास कोई पुख्ता सबूत नहीं थे. हैरानी की बात यह रही कि मामले के मूल शिकायतकर्ता विश्वजीत दत्ता ने भी कोर्ट में हलफनामा देते हुए कहा कि यह शिकायत गलतफहमी के कारण हुई थी और वास्तव में किसी धन का लेन-देन नहीं हुआ था. इसके बाद कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में मामला बंद कर दिया, जिससे उनकी बहाली का रास्ता साफ हो गया.

आईएएस अभिषेक प्रकाश की प्रोफाइल

मूल रूप से बिहार के सिवान जिले के रहने वाले अभिषेक प्रकाश का शैक्षणिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है. उन्होंने उत्तराखंड के प्रसिद्ध आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है. साल 2005 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 8वीं रैंक हासिल की थी, जो उनकी प्रतिभा का प्रमाण है.

किन-किन जिलों के डीएम रहे?

अभिषेक प्रकाश लखीमपुर खीरी, बरेली, अलीगढ़, हमीरपुर और लखनऊ जैसे बड़े जिलों में जिलाधिकारी रह चुके हैं. लखनऊ में उनके कार्यकाल को डिफेंस कॉरिडोर की जमीन के विवाद सुलझाने के लिए याद किया जाता है. वह शासन में सचिव औद्योगिक विकास और ‘इन्वेस्ट यूपी’ के सीईओ के पद पर भी तैनात रहे.

भले ही अभिषेक प्रकाश बहाल हो गए हैं और उन्हें सचिव सामान्य प्रशासन जैसी अहम जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन सरकार ने यह साफ किया है कि उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी. वर्तमान में उनकी बहाली को एक प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि किसी भी आईएएस को बिना ठोस आधार के एक साल से अधिक समय तक निलंबित नहीं रखा जा सकता. अब अभिषेक प्रकाश के सामने अपनी बेदाग छवि को दोबारा साबित करने की चुनौती होगी.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...और पढ़ें

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First Published :

March 15, 2026, 16:08 IST

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