‘परीक्षा पर चर्चा’ के बहाने नई पीढ़ी को जीवन के पाठ पढ़ा रहे हैं मोदी!

1 hour ago

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोर्ड परीक्षा शुरु होने के पहले आज देश भर के छात्रों से संवाद किया, अपने खास कार्यक्रम ‘परीक्षा पर चर्चा’ के दौरान. मोदी न सिर्फ पढ़ाई और परीक्षा से जुड़े बेहतरीन टिप्स बच्चों को देते नजर आए, बल्कि जीवन में किन चीजों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए, इसकी भी सीख देते रहे. मोदी की कोशिश परीक्षा के बहाने नई पीढ़ी को सही दिशा में ले जाने की है. दिल्ली में लोक कल्याण मार्ग के अपने आधिकारिक आवास के लॉन में ही आजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर देशी- विदेशी अतिथियों से मिलते नजर आते हैं. लेकिन आज ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम के प्रसारण के दौरान करोड़ों छात्रों और उनके परिवार वालों को इस लॉन में मोदी के साथ कोई बड़ी सेलेब्रिटी नहीं, बल्कि देश के अलग- अलग हिस्सों से आए हुए स्कूली छात्र और छात्राएं नजर आए. कभी खड़े होकर, तो कभी बैठकर, तल्लीनता से इन स्कूली छात्रों के साथ घंटे भर तक गपशप करते रहे मोदी. थीम भले ही परीक्षा हो, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर बच्चों का मार्गदर्शन करते दिखे, वो भी हल्के- फुल्के अंदाज में. बातचीत सुनकर ऐसा लगे मानो घर का कोई गार्जियन अपने बच्चों को समझा रहा हो, वो भी दोस्ताना अंदाज में.

मोदी को संवाद में महारत हासिल है, सार्वजनिक जीवन में पिछले पांच दशक के दौरान उनकी कामयाबी इस बात की भली- भांति पुष्टि करती है. अपनी अनूठी शैली के जरिये मोदी पहले गुजरात और 2014 से देश भर के लोगों का भरोसा लगातार जीतते आ रहे हैं, और अपनी प्रशासनिक यात्रा के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं. लेकिन उनकी प्राथमिकता सिर्फ सत्ता में बने रहना नहीं है, महज देश का विकास या उसे आर्थिक महाशक्ति बनाना ही नहीं है, बल्कि संस्कार सिंचन भी है, युवा पीढ़ी को तैयार करना भी है. ये बात साफ तौर पर पता चल रही थी, जब परीक्षा पर चर्चा करते हुए मोदी को लोग अपने मोबाइल या टीवी स्क्रीन पर देख रहे थे.

‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम के नौंवे संस्करण का प्रसारण था आज. लेकिन ये संस्करण पहले के तमाम संस्करणों से बेहतर, और प्रायोगिक, किशोरों का अपने पर भरोसा बढ़ाने वाला, पहले से ज्यादा समावेशी. आज जिसने भी इस कार्यक्रम को देखा, वो ये नहीं भूल सकता कि किस तरह से मोदी एक दिव्यांग छात्रा को अपने साथ लेकर आगे बढ़ रहे थे, या फिर ये कि कितने सोच- विचार के साथ देश भर के अलग- अलग हिस्सों के बच्चों को अपने साथ संवाद के लिए उन्होंने बुलाया था.

‘परीक्षा के तनाव से न डरो, एआई को बनाओ अपना साथी’ (Photo : PIB)

बच्चों के साथ इस संवाद के दौरान मोदी सांस्कृतिक पाठ भी पढ़ा रहे थे. असम सहित नॉर्थ ईस्ट के ज्यादातर हिस्सों में सांस्कृतिक सम्मान और पहचान के तौर पर इस्तेमाल होने वाला गमछा सभी बच्चों के गले में था. एक समय नॉर्थ ईस्ट घनघोर उपेक्षा का शिकार था, मोदी ने पिछले बारह साल के अपने शासन के दौरान इसे देश की मुख्यधारा में ला दिया है, न सिर्फ आर्थिक तौर पर, बल्कि सांस्कृतिक तौर पर भी, संवाद के तौर पर भी, संचार के तौर पर भी. पूरे देश के लोग आज नॉर्थ ईस्ट में जा रहे हैं, नॉर्थ ईस्ट के लोग देश के हर हिस्से में सम्मान पा रहे हैं, न कि उपेक्षा के शिकार, जैसा पहले होता रहा है. किशोरों के गले में दिखने वाला ये गमछा, मोदी की तरफ से उनमें राष्ट्रीय एकता के भाव भरने का ही प्रयास था.

मोदी इस संवाद क दौरान बच्चों के बीच सहज थे, बच्चों को ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वो देश के उस प्रधानमंत्री के साथ संवाद कर रहे हैं, जो देश- विदेश में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है, लोकप्रियता के शिखर पर लंबे समय से है, जिसकी बात दुनिया भी बड़े गौर से सुनती है.

यहां मोदी बच्चों की बात गौर से सुन रहे थे और फिर उनके सवालों का अनूठे अंदाज में जवाब दे रहे थे. उनकी बात बड़ी ही आसानी से बच्चों को समझ में आ रही थी, ये उनके हाव-भाव से साफ दिख रहा था. परीक्षा पर चर्चा करते हुए मोदी देश के ज्वलंत मुद्दों पर भी अपनी बात रख रहे थे, खास तौर पर वो मुद्दे, जिनसे देश का किशोर और युवा वर्ग प्रभावित हो रहा है.

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ऐसा ही एक मुद्दा रहा गेमिंग से जुड़ा हुआ. हाल ही में दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक खौफनाक वाकया हुआ, जहां गेम खेलते- खेलते तीन बच्चियों ने अपने घर की बालकनी से छलांग लगा ली, जीवनलीला समाप्त कर ली. इस दर्दनाक हादसे का ध्यान पीएम मोदी का था, इसलिए वो गेमिंग को लेकर अपनी बात रखते नजर आए, युवा पीढ़ी को संदेश देते नजर आए. मोदी ने कहा,

गेम से कोई परहेज न करो, लेकिन इसे एक स्किल के तौर पर देखो, जिसे सिखना चाहिए, लेकिन गेम खेलते- खेलते सट्टेबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जुएबाजी की लत व्यक्ति को बर्बाद कर देती है.

दुविधा में फंसे छात्रों को मोदी ने दी सीधी सलाह (Photo : PIB)

मोदी की ये सीधी और सहज बात है, किशोर और युवा मोदी की इस बात पर ध्यान दे सकते हैं, अपने को बर्बाद होने से बचा सकते हैं, परिवार को बर्बाद होने से बचा सकते हैं क्योंकि इस तरह के मामले बड़े पैमाने पर आ रहे हैं, जहां बच्चों ने गेम की आड़ में सट्टेबाजी की बुरी आदत डाल ली और इस चक्कर में न सिर्फ वो, बल्कि उनके परिवार भी बर्बाद हो गये.

पीएम मोदी भला बच्चों से चर्चा करते हुए एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का मुद्दा कैसे छोड़ सकते थे. पूरी दुनिया में एआई की चर्चा है, लोग इसका क्या असर होगा, कितना असर होगा, दुनिया इससे कितनी बदल जाएगी, इसकी चर्चा करते हुए इसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं. मोदी ने एआई से डरने, घबराने, अवसर कम होने की चिंता से जूझने की जगह बच्चों को ये बताते नजर आए कि इसका इस्तेमाल कर बच्चे कैसे अपनी पढ़ाई ही नहीं, काम को भी आसान बना सकते हैं. परीक्षा के समय में ध्यान कैसे बनाए रखें या फिर मार्क्स जरूरी हैं या स्किल्स, या फिर प्री- बोर्ड में अच्छा स्कोर कैसे हासिल हो या सिलेबस का जो हिस्सा छूट जाता है, उसे कैसे कवर करें, इन तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए मोदी शिक्षकों को भी सीख देते नजर आए. मोदी ने कहा कि शिक्षक छात्रों की स्पीड से एक कदम आगे रहें, अगर वो पचास कदम आगे चले जाएंगे, तो बच्चे पीछे छूट जाएंगे.

बारहवीं के बच्चे, जो खास तौर पर इंजीनियरिंग या मेडिकल से जुड़े प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं, उनके मन में हमेशा ये सवाल रहता है कि वरीयता किसे दें वो. मोदी की साफ सलाह, पहले बोर्ड की परीक्षा दे लें, फिर प्रतियोगी परीक्षा की चिंता करें. बोर्ड की तैयारी अच्छी होगी, तो प्रतियोगिता को भी पार करना आसान होगा. मोदी पहले भी इस तरह के दुविधापूर्ण सवालों पर छात्रों का मार्गदर्शन करते रहे हैं, इस विषय पर उनकी एक किताब तक है, Exam Warriors नाम से.

दिल्ली में बच्चों के बीच ‘गार्जियन’ बने मोदी. (Photo : PIB)

जाहिर है, चाहे सामने बिठाकर संवाद हो या फिर अपनी किताब के जरिये, ये टिप्स वो व्यक्ति दे रहा है बच्चों को, जिसने दुनिया के सबसे बड़े प्रजातंत्र में लोकप्रियता की परीक्षा चुनावी मापदंड के आधार पर ही नहीं जीती है, बल्कि देश के लोगों के दिल में जगह बनाकर भी जीती है. मोदी खुद उन करोड़ों बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो देश के पिछड़े, गरीब परिवारों से आते हैं.

गुजरात के महेसाणा जिले के एक छोटे से कस्बे वडनगर में एक गरीब परिवार के अंदर जन्म लेने वाले मोदी ने लक्ष्य के प्रति फोकस, मेहनत की पराकाष्ठा और अहर्निश प्रयास के जरिये ही वो कामयाबी हासिल की है, जिसका दुनिया लोहा मानती है. इसलिए मोदी अगर छात्रों से इन मूल्यों को अपनाने की सलाह देते हैं, तो वो उन पर भरोसा करते हैं, उनकी सीख याद रखते हैं.

मोदी अक्सर कहते हैं कि वो खुली आंखों से सपने देखते हैं, इसलिए उनके सपने हकीकत में तब्दील होते हैं. इस देश की नई पीढ़ी से भी वो यही उम्मीद करते हैं, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने का जो सपना उन्होंने देखा है, वो हकीकत में तब्दील हो. इसलिए इन किशोरों के साथ संवाद के दौरान वो कहते हैं कि सपने न देखना एक अपराध है, लेकिन वो सपने को सिर्फ गुनगुनाते नहीं रहें, कंफर्ट जोन में नहीं रहे. इससे काम नहीं चलेगा, बल्कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मेहनत करनी होगी, रफ्तार बनाए रखने होगी.

पीएम मोदी की ‘परीक्षा पर चर्चा’ (Photo : PIB)

खुद मोदी की रफ्तार अपने सबसे बड़े लक्ष्य को हासिल करने के दौरान धीमी नहीं पड़ने वाली, वो अपने जीवन के 75 साल बीत जाने का ख्याल भी नहीं कर रहे है, वो तो अगले पचीस सालों में क्या करना है, इसकी सोच रहे हैं और यही बात वो अपने साथ बैठे छात्रों से भी कर रहे हैं.

जाहिर है, मोदी को करोड़ों किशोरों और युवाओं से काफी उम्मीद है, बड़ी उम्मीद है. किशोर और युवा अगर ठान लें, तो वो कोई भी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं, ये बात मोदी को पता है. इसलिए वो उनके साथ परीक्षा पर चर्चा के बहाने जीवन और समाज संवाद कर रहे हैं, ताकि भारत की नई पीढ़ी अपनी भरपूर उर्जा के साथ बड़े लक्ष्य को हासिल कर सके, देश को नई ऊंचाई पर ले जा सके.

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