Last Updated:January 22, 2026, 16:02 IST
हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड के सेब किसानों को तुर्की, ईरान, यूएसए, न्यूजीलैंड जैसे देशों से आयातित सेब और घटती ड्यूटी से भारी नुकसान हो रहा है. सेब की गुणवत्ता पर भी सवाल हैं.

अगर आपको लगता है कि जो सेब आप खा रहे हैं वो कल ही पेड़ से टूटा है, तो आप गलत हो सकते हैं. वाशिंगटन से लेकर तुर्की तक, गैस के जरिए ‘जिंदा’ रखे गए इन सेबों की उम्र आपकी सोच से कहीं ज्यादा है. ऊपर से ये हमारे अपने किसानों की फसल का बाजार खा रहे हैं. हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड में जो सेब पैदा हो रहा है, उसकी कीमत किसानों को सही नहीं मिल पा रही क्योंकि भारत में सेब का आयात तेजी से बढ़ रहा है. चलिए इसे सेहत और इकोनॉमी पर इसकी मार, दोनों एंगल से समझते हैं.
हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड के करीब 5 लाख परिवार सेब की खेती से जुड़े हैं. भारत की एप्पल इकोनॉमी ₹17,000 करोड़ की है. सस्ता विदेशी आयात, घटती ड्यूटी और पिछड़ती तकनीक हमारे किसानों को पीछे धकेल रही है. इस पूरे प्रोसेस को हिमाचल फ्रूट, वेजिटेबल्स एंड फ्लावर ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश चौहान आसान भाषा में समझाते हैं.
”देखिये ऐसा है, दुनिया के लगभग 44 देशों से भारत में सेब इम्पोर्ट होता है. भारत में सेब की जो कुल खपत है, उसमें लगभग 4 लाख मीट्रिक टन अभी इम्पोर्ट हो रहा है. भारत के अपने उत्पादन की बात करें, तो हिमाचल प्रदेश का उत्पादन 6 लाख मीट्रिक टन से लेकर 9-10 लाख मीट्रिक टन तक रहता है. कश्मीर का उत्पादन 12 लाख से लेकर 22 लाख मीट्रिक टन तक है. उत्तराखंड भी अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और लगभग 1 लाख मीट्रिक टन के आसपास पहुंच गया है. आजकल जो इम्पोर्टेड एप्पल आता है, उसमें सबसे ज्यादा तुर्की, ईरान, यूएसए, न्यूजीलैंड और चिली जैसे 5-6 मुख्य देश हैं. फुजी सेब की सबसे ज्यादा पैदावार चीन में होती है, लेकिन वहां से सीधे आने पर रोक है. फिर भी वह नेपाल और भूटान के रास्ते इनडायरेक्टली भारत आ रहा है. चूंकि ‘साफ्टा’ (SAFTA – साउथ एशियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) के तहत आने वाले देशों पर इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं लगती, इसलिए वहां से ‘अवैध डंपिंग’ हो रही है. ईरान का सेब भी पहले सीधे आता था, लेकिन अभी कुछ समय से रुका है; हालांकि वह भी अवैध रास्तों से पहुंच ही जाता है.”
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Dushyant KumarAssociate Editor
मैं नेटवर्क-18 में एसोसिएट एडिटर हूं। News18 ऐप में बतौर लीड काम कर रहा हूं। कंटेंट स्ट्रैटेजी बनाने के साथ-साथ डिजिटल मीडिया और न्यूज़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नए प्रयोगों पर काम कर रहा हूं। अपनी पसं...और पढ़ें
First Published :
January 22, 2026, 16:02 IST
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