Last Updated:March 12, 2026, 15:37 IST
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अरागची के बीच हुई तीन दौर की बातचीत ने भारतीय जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की चिंताओं को दूर कर दिया है. MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार रणनीतिक संवाद से समुद्री मार्गों पर भरोसा बढ़ा है. साथ ही, ईरान में मौजूद 9,000 भारतीयों की सुरक्षा के लिए आर्मेनिया और अजरबैजान के वैकल्पिक रास्तों का उपयोग कर उन्हें सुरक्षित निकाला जा रहा है.

पश्चिम एशिया के धधकते हालातों के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी साइलेंट डिप्लोमेसी का लोहा मनवाया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची के बीच पिछले कुछ दिनों में हुई तीन बैक-टू-बैक फोन कॉल्स ने भारत की दो सबसे बड़ी चिंताओं समुद्री व्यापारिक मार्ग (Shipping Safety) और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर जमी बर्फ पिघला दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस कूटनीतिक हलचल की पुष्टि करते हुए संकेत दिए हैं कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए ईरान के साथ सीधा संवाद कर रहा है.
शिपिंग की सुरक्षा और तेल का संकट
लाल सागर और फारस की खाड़ी में जारी तनाव ने भारतीय मालवाहक जहाजों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया था. जयशंकर और अरागची के बीच हुई तीसरी बातचीत का मुख्य केंद्र बिंदु यही था. भारत के लिए यह केवल व्यापार का मामला नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है. ईरान के साथ इस संवाद का सीधा असर यह हुआ है कि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक भरोसेमंद माहौल तैयार हुआ है. वहीं, ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के बीच ईरान के साथ यह समन्वय भारत को तेल संकट की आशंकाओं से कोसों दूर ले जाता है.
ईरान में फंसे भारतीयों के लिए ऑपरेशन कवच
सिर्फ व्यापार ही नहीं भारत सरकार की प्राथमिकता वहां रह रहे अपने नागरिक भी हैं. रणधीर जायसवाल ने बताया कि ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक हैं जिनमें से अधिकांश छात्र हैं. युद्ध जैसी स्थितियों के बीच विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी के बाद बड़ी संख्या में लोग स्वदेश लौट आए हैं. जो लोग अभी भी वहां मौजूद हैं उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है. भारत ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए आर्मेनिया और अजरबैजान के वैकल्पिक रास्तों का उपयोग शुरू कर दिया है जो भारत की आपदा प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है.
भारत का संतुलित ईरान कार्ड
भारत की विदेश नीति की यह सबसे बड़ी खूबसूरती है कि वह एक तरफ इजरायल के साथ गहरे रक्षा संबंध रखता है, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ अपनी ऊर्जा और रणनीतिक जरूरतों को लेकर सीधा संवाद बनाए रखता है. जयशंकर की ये तीन कॉल महज औपचारिकता नहीं थीं बल्कि एक स्पष्ट संदेश था कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों चाहे वो समुद्र में जहाज हों या ईरान की गलियों में भारतीय छात्र से कोई समझौता नहीं करेगा. ईरान का भारत को सुरक्षा का भरोसा देना ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत के बढ़ते रसूख का प्रमाण है.
सवाल-जवाब
जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच चर्चा के मुख्य बिंदु क्या थे?
दोनों नेताओं के बीच तीन बार बातचीत हुई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने पर सबसे अधिक जोर दिया गया.
ईरान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
भारत सरकार आर्मेनिया और अजरबैजान के सुरक्षित रास्तों का उपयोग कर रही है. प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, जो लोग वहां रह गए हैं उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है और लौटने वालों की मदद की जा रही है.
About the Author
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें
Location :
Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
March 12, 2026, 15:16 IST

1 hour ago
