Last Updated:January 30, 2026, 23:55 IST
असम को भारत की चाय राजधानी कहा जाता है, जहां 800 से अधिक चाय बागान हैं. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां चाय उद्योग की नींव रखी थी, जो आज विश्व प्रसिद्ध है.

रोज चाय से दिन की शुरुआत करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं, किस राज्य को भारत की चाय राजधानी के रूप में जाना जाता है? नहीं, तो जान लीजिए कि असम को ‘भारत की चाय राजधानी’ के रूप में जाना जाता है. चाय के साथ इस राज्य का रिश्ता गहरा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक है. इस राज्य में सैंकड़ों एकड़ की जमीन पर सिर्फ चाय की खेती होती है.

भारत के कुल चाय उत्पादन का 50% से अधिक हिस्सा असम में उत्पादित होता है. यहां 800 से अधिक चाय बागान भी हैं, जिनमें से कई ब्रिटिश औपनिवेशिक काल से मौजूद हैं. क्योंकि इससे पहले भारतीयों में चाय को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं थी. कहा जाता है कि अंग्रेजों ने ही भारत के लोगों को चाय पीने की आदत लगवायी.

ब्रह्मपुत्र घाटी की खास जलवायु और उपजाऊ मिट्टी इसे चाय की खेती के लिए एकदम सही बनाती है. भरपूर बारिश, नमी वाली सबट्रॉपिकल स्थितियां, और पोषक तत्वों से भरपूर जलोढ़ मिट्टी से गाढ़ी, रिच और माल्टी चाय मिलती है. यही खास स्वाद है जो असम चाय को दुनिया भर में पहचान दिलाता है.
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हालांकि, असम मूल रूप से चाय के लिए प्रसिद्ध नहीं था. अंग्रेजों ने 1820 के दशक में यहां जंगली चाय के पौधे खोजे, जिससे इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पहचान में बदलाव आया.

1800 के दशक के आरंभ में, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने चीन के चाय एकाधिकार को चुनौती देने का प्रयास किया. उन्होंने वनस्पतिशास्त्री रॉबर्ट फॉर्च्यून को एक गुप्त मिशन पर चीन भेजा, जहां से उन्होंने चाय के पौधे और कुशल श्रमिकों की तस्करी करके ब्रिटिश-नियंत्रित भारत, विशेष रूप से असम और दार्जिलिंग पहुंचाया.

हालांकि फॉर्च्यून द्वारा आयातित चीनी चाय के पौधे असम की नम जलवायु में पनपने में संघर्ष कर रहे थे, लेकिन अंग्रेजों ने इस क्षेत्र में जंगली चाय के पौधों को फलते-फूलते पाया. कैमेलिया साइनेंसिस वैरायटी असामिका के रूप में पहचाने गए ये देशी पौधे खेती के लिए आदर्श थे.

1850 के दशक तक भारत में बड़े पैमाने पर चाय के बागान स्थापित हो गए थे. इसके साथ ही असम के विश्व प्रसिद्ध चाय उद्योग की भी नींव पड़ी. चाय के ये बगान सिर्फ व्यापार से ही देश की अर्थव्यवस्था को सपोर्ट नहीं करते बल्कि ये टूरिस्ट डेस्टिनेशन भी है. यहां हर साल टूरिस्ट आते हैं.
First Published :
January 30, 2026, 23:55 IST

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