उधर गाजा में बोर्ड ऑफ पीस पर अड़े ट्रंप, इधर UN को और मजबूत करने में जुटे मोदी, समझें डिप्लोमेसी

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Last Updated:January 23, 2026, 07:26 IST

PM Modi UN Diplomacy: गाजा युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां 'बोर्ड ऑफ पीस' के जरिए तात्कालिक समाधान पर जोर दे रहे हैं. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र को मजबूत बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. ब्राजील के राष्ट्रपति लूला से बातचीत के बाद UN सुधार की मांग और तेज हुई है. G4 देशों ने चेतावनी दी है कि सुधारों में देरी से वैश्विक संकट और गहराएगा.

उधर गाजा में बोर्ड ऑफ पीस पर अड़े ट्रंप, इधर UN को और मजबूत करने में जुटे मोदीगाजा में ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस मॉडल और दूसरी ओर मोदी की UN सुधार रणनीति. (फाइल फोटो Reuters)

नई दिल्ली: दुनिया इस वक्त दो बड़े संकटों और दो अलग-अलग तरह की डिप्लोमेसी को एक साथ देख रही है. एक तरफ गाजा में जारी युद्ध है, जहां रोज बेकसूर जानें जा रही हैं. वहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ‘बोर्ड ऑफ पीस’ जैसे तात्कालिक समाधान पर जोर दे रहे हैं. उनका फोकस तुरंत युद्ध रुकवाने और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने पर है. दूसरी तरफ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं जो शॉर्ट टर्म डील से आगे की सोच रहे हैं. उनका जोर संयुक्त राष्ट्र को मजबूत करने पर है, ताकि भविष्य में ऐसे संघर्षों को रोका जा सके. भारत लंबे समय से UN में सुधार का पक्षधर रहा है. पीएम मोदी से लेकर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर तक अलग-अलग मंचों से UN में सुधार की वकालत करते रहे हैं. एक तरफ अमेरिका पावर अपने हाथ में रखना चाहता है तो दूसरी तरफ भारत तमात देशों के प्रतिनिधित्व की बात करता है.  भारत चाहता है कि विकासशील देश भी यूएन का हिस्सा बने. इसी कड़ी में पीएम मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के बीच बातचीत हुई है. वहीं ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस को संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. बोर्ड ऑफ पीस क्या संयुक्त राष्ट्र की जगह लेगा यह आशंका लगातार लोगों के मन में उठ रही है. इस बीच पीएम मोदी UN को मजबूत करने में जुट गए हैं.

पीएम मोदी की डिप्लोमेसी किसी एक युद्ध तक सीमित नहीं है. यह पूरी वैश्विक व्यवस्था को बदलने की कोशिश है. ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा से बातचीत इसी रणनीति का हिस्सा है. दोनों नेता मानते हैं कि मौजूदा संयुक्त राष्ट्र और खासकर सुरक्षा परिषद आज की दुनिया की सच्चाई को नहीं दर्शाती. ग्लोबल साउथ की आवाज कमजोर है. अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका को सही प्रतिनिधित्व नहीं मिला है. ऐसे समय में ट्रंप और मोदी की सोच का फर्क साफ दिखता है. एक व्यक्ति-केंद्रित समाधान. दूसरा संस्थागत सुधार. यही डिप्लोमेसी का असली कंट्रास्ट है.

Glad to speak with President Lula. We reviewed the strong momentum in the India-Brazil Strategic Partnership, which is poised to scale new heights in the year ahead. Our close cooperation is vital for advancing the shared interests of the Global South. I look forward to welcoming…

मोदी-लूला बातचीत: ग्लोबल साउथ पर फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के बीच हालिया बातचीत केवल द्विपक्षीय नहीं थी. यह वैश्विक राजनीति का संकेत थी. पीएम मोदी ने X पर लिखा कि भारत-ब्राजील स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप आने वाले समय में नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी. दोनों नेताओं ने साफ कहा कि ग्लोबल साउथ के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना जरूरी है. यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब UN सुधार की मांग तेज हो चुकी है.

UNSC सुधार क्यों जरूरी हो गया है?

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 की दुनिया के हिसाब से हुई थी. लेकिन 2026 की दुनिया बिल्कुल अलग है. आज सबसे ज्यादा संघर्ष एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में हैं. लेकिन फैसले लेने की ताकत अब भी कुछ पुराने देशों के पास है. यही वजह है कि UN की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं. भारत समेत कई देश मानते हैं कि मौजूदा सुरक्षा परिषद न तो प्रतिनिधित्वपूर्ण है और न ही प्रभावी.

(फाइल फोटो)

G4 देशों की चेतावनी और प्रस्ताव

G4 देशों भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान ने साफ चेतावनी दी है कि सुधारों में देरी से इंसानी पीड़ा और बढ़ेगी. इधर भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने UN में कहा कि हर दिन अनगिनत बेगुनाह जानें जा रही हैं और अब हर पल की कीमत है. G4 ने टेक्स्ट-बेस्ड नेगोशिएशन और तय टाइमलाइन के साथ सुधार प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की है.

G4 मॉडल के अहम प्वाइंट

सुरक्षा परिषद का आकार 15 से बढ़ाकर 25 या 26 किया जाए. छह नई स्थायी सीटें जोड़ी जाएं. अफ्रीका को दो स्थायी सीटें दी जाएं. एशिया-पैसिफिक को दो सीटें, GRULAC और WEOG को एक-एक. 4 या 5 नई अस्थायी सीटें. छोटे द्वीपीय देशों को बेहतर प्रतिनिधित्व. धर्म के आधार पर सीटों का विरोध.

यूएफसी की रुकावट और भारत का जवाब

UN सुधार प्रक्रिया में ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ यानी UFC समूह लगातार रुकावट डाल रहा है. यह समूह स्थायी सीटों के विस्तार का विरोध करता है. भारत ने बिना नाम लिए UFC पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रक्रिया को रोकना सुरक्षा परिषद की नाकामी में भागीदारी है. पी. हरीश ने स्पष्ट कहा कि अफ्रीका के ऐतिहासिक अन्याय को दूर किए बिना UN की विश्वसनीयता बहाल नहीं हो सकती.

ट्रंप बनाम मोदी: दो अलग रास्ते

डोनाल्ड ट्रंप गाजा में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के जरिए तुरंत समाधान चाहते हैं. उनका तरीका पर्सनल इन्फ्लुएंस और शॉर्ट टर्म डील पर आधारित है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लॉन्ग टर्म सोच के साथ UN जैसी संस्थाओं को मजबूत करना चाहते हैं. एक तरफ तात्कालिक शांति. दूसरी तरफ स्थायी वैश्विक व्यवस्था. दोनों जरूरी हैं लेकिन असर तय करेगा कि दुनिया किस रास्ते पर चलती है.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें

First Published :

January 23, 2026, 07:12 IST

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