Last Updated:March 06, 2026, 17:57 IST
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध का असर अब वैश्विक सोने के कारोबार पर भी साफ दिखने लगा है. उड़ानें बाधित होने से दुबई में बड़ी मात्रा में सोना फंस गया है. स्थिति यह है कि ट्रेडर्स इसे अंतरराष्ट्रीय कीमत से कम पर बेचने को मजबूर हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है.

नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट में बढ़ती जंग का असर अब दुनिया के गोल्ड मार्केट पर भी साफ दिखाई देने लगा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि दुबई में बड़ी मात्रा में सोना फंस गया है और उसे बाजार में डिस्काउंट पर बेचना पड़ रहा है. उड़ानों पर असर और सुरक्षा जोखिम बढ़ने से सप्लाई चेन बाधित हो गई है. ऐसे में ट्रेडर्स अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए सोने को अंतरराष्ट्रीय कीमत से कम पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं.
उड़ानें बाधित होने से फंसा सोना
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण कई देशों के एयरस्पेस पर असर पड़ा है. दुबई जैसे बड़े ट्रेडिंग हब से सोने की खेप आमतौर पर यात्री विमानों के कार्गो हिस्से में भेजी जाती है. लेकिन मिसाइल हमलों और सुरक्षा खतरे के कारण कई उड़ानें रद्द या सीमित कर दी गई हैं. इसका नतीजा यह हुआ कि बड़ी मात्रा में सोना दुबई में ही अटक गया. कुछ खेपों को सप्ताह के बीच में उड़ानों से भेजा गया, लेकिन कई शिपमेंट अभी भी रुके हुए हैं.
ट्रेडर्स दे रहे 30 डॉलर तक का डिस्काउंट
स्थिति ऐसी हो गई है कि कई ट्रेडर्स सोने को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमत से करीब 30 डॉलर प्रति औंस तक कम पर बेचने की पेशकश कर रहे हैं. आमतौर पर सोना लंदन के वैश्विक बाजार की कीमतों के आसपास बिकता है, लेकिन मौजूदा हालात में स्टोरेज और फाइनेंसिंग का खर्च लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में व्यापारी लंबे समय तक माल रोकने के बजाय कम कीमत पर बेचकर जोखिम कम करना चाह रहे हैं.
भारत की सप्लाई पर भी असर की आशंका
दुबई एशिया के कई देशों के लिए सोने का अहम निर्यात केंद्र है और भारत इसके बड़े खरीदारों में शामिल है. विशेषज्ञों का कहना है कि शिपमेंट में देरी के कारण भारत में फिजिकल गोल्ड की उपलब्धता पर कुछ समय के लिए असर पड़ सकता है. हालांकि फिलहाल भारत में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, क्योंकि साल की शुरुआत में बड़ी मात्रा में सोने का आयात हुआ था. लेकिन अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो आगे चलकर सप्लाई में दिक्कत आ सकती है.
लॉजिस्टिक खर्च और सप्लाई चुनौतियां बढ़ीं
युद्ध के कारण सिर्फ उड़ानों पर ही असर नहीं पड़ा है, बल्कि लॉजिस्टिक खर्च भी तेजी से बढ़ गया है. सोने को सड़क मार्ग से दूसरे देशों के एयरपोर्ट तक ले जाना जोखिम भरा और जटिल माना जा रहा है. इसके अलावा रिफाइनरियों को कच्चा सोना यानी डोरे बार हासिल करने में भी दिक्कत आ रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक नए कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रांसपोर्ट और इंश्योरेंस की लागत 60 से 70 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है, जिससे गोल्ड ट्रेडिंग का पूरा गणित बदल गया है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
March 06, 2026, 17:57 IST

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