Last Updated:February 23, 2026, 09:09 IST
JNU ABVP Left Clash: जेएनयू की वाइस चांसलर शांतिश्री पंडित के 'विक्टिम कार्ड' वाले बयान पर विवाद इतना बढ़ा कि रविवार आधी रात को एबीवीपी और लेफ्ट विंग में खूनी झड़प हो गई. लाठी-डंडों और पथराव में कई छात्र घायल हुए हैं. छात्र अब वीसी के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं और कैंपस में भारी तनाव है.

नई दिल्ली (JNU ABVP Left Clash). जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में एक बार फिर आधी रात को खूनी संघर्ष हुआ. रविवार देर रात कैंपस में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी (Left) छात्र संगठनों के बीच जबरदस्त भिड़ंत हुई. लेफ्ट संगठनों से जुड़े छात्र VC शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के इस्तीफे की मांग को लेकर मशाल जुलूस निकाल रहे थे. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ABVP के छात्रों ने उन पर हमला किया, जबकि एबीवीपी ने दावा किया कि लेफ्ट विंग के छात्रों ने लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों को निशाना बनाया.
इस पूरी लड़ाई की मुख्य जड़ कुलगुरु शांतिश्री पंडित का हालिया इंटरव्यू है, जिसमें उन्होंने दलितों और अश्वेतों लेकर कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें छात्र ‘जातिवादी’ और ‘अपमानजनक’ मान रहे हैं. जेएनयू में पिछले कई दिनों से कुलगुरु के खिलाफ माहौल गरमाया हुआ था, जिसने रविवार रात को हिंसक रूप ले लिया. लाठी-डंडों और पथराव के बीच कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिससे कैंपस में एक बार फिर सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस छिड़ गई है.
कौन हैं कुलगुरु शांतिश्री धुलिपुडी पंडित?
शांतिश्री धुलिपुडी पंडित जेएनयू की पहली महिला कुलगुरु (Vice-Chancellor) हैं. उन्होंने साल 2022 में इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी. वे खुद जेएनयू की छात्रा रह चुकी हैं और अपने कार्यकाल के दौरान कई बार अपने बयानों और फैसलों को लेकर विवादों में रही हैं. उन्हें अक्सर दक्षिणपंथी विचारधारा के करीब माना जाता है, जिससे कैंपस के वामपंथी संगठनों के साथ उनका टकराव बना रहता है.
जेएनयू वीसी के इस्तीफे की मांग क्यों हो रही है?
ताजा विवाद 16 फरवरी 2026 को जारी हुए पॉडकास्ट इंटरव्यू से शुरू हुआ. इसमें वीसी ने UGC के इक्विटी नियमों पर चर्चा करते हुए कहा- आप हमेशा पीड़ित बनकर या विक्टिम कार्ड खेलकर तरक्की नहीं कर सकते. जैसा अश्वेतों के लिए हुआ, वैसा ही यहां दलितों के लिए लाया गया. छात्र संगठनों (SFI, AISA, JNUSU) का कहना है कि यह बयान जातिवादी है और दलित समाज के संघर्षों का अपमान भी. उन्होंने इसे ‘वोक कल्चर’ के नाम पर संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया और वीसी के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी.
आधी रात का बवाल: जेएनयू में क्या और क्यों हुआ?
रविवार रात (22 फरवरी) को जेएनयू छात्र संघ ने कुलगुरु के खिलाफ ‘समता जुलूस’ निकाला था. छात्र साबरमती ढाबे से वीसी आवास की ओर मार्च कर रहे थे.
लेफ्ट का आरोप: उनका दावा है कि जब मार्च शांतिपूर्वक चल रहा था, तब एबीवीपी के सदस्यों ने उन पर पथराव किया और लाठी-डंडों से हमला किया. ABVP का दावा: उनका कहना है कि लेफ्ट के छात्रों ने ‘इस्तीफे’ की आड़ में लाइब्रेरी में घुसकर उन छात्रों को पीटा जो शांति से अपनी पढ़ाई कर रहे थे. देर रात करीब 1:30 बजे साबरमती ढाबे और लाइब्रेरी के पास दोनों गुट आमने-सामने आ गए, जिससे मारपीट की नौबत आ गई.घायल छात्र और पुलिस की भूमिका
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में रविवार रात हुई झड़प में 10 से ज्यादा स्टूडेंट्स घायल हुए हैं. बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं. घायलों को एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है. दिल्ली पुलिस कैंपस के बाहर मुस्तैद रही, लेकिन जेएनयू की स्वायत्तता (Autonomy) के नियमों के कारण पुलिस प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद ही अंदर की स्थिति को कंट्रोल करने के प्रयास किए गए. जेएनयू प्रशासन की अनुमति के बिना दिल्ली पुलिस वहां एंटर नहीं कर सकती थी.
जेएनयू विवाद बढ़ने पर वीसी शांतिश्री पंडित ने सफाई दी कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. उन्होंने कहा किसी को भी स्थायी रूप से ‘पीड़ित’ की श्रेणी में नहीं रखना चाहिए.
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With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें
First Published :
February 23, 2026, 09:09 IST

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