Last Updated:March 16, 2026, 12:42 IST
अनंत सिंह के बाद कौन होगा मोकामा का असली राजा? क्या सूरजभान सिंह की किस्मत चमकेगी या फिर अनंत सिंह का ही जलवा रहेगा? राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए वोट डालने पहुंचे मोकामा विधायक अनंत सिंह ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर सबको चौंका दिया है. उन्होंने एलान किया कि वे उनकी विरासत उनके बच्चे संभालेंगे. क्या अनंत सिंह के चुनाव नहीं लड़ने से सूरजभान सिंह का सिक्का मोकामा में चलेगा?

पटना. मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह एक बार फिर से चर्चा में हैं. बिहार में भूमिहार पॉलिटिक्स के दिग्गजों में से एक अनंत सिंह ने ऐलान किया है कि वह विधानसभा का चुनाव अब नहीं लड़ेंगे. अनंत सिंह के इस फैसले से किस नेता की किस्मत चमकेगी? अनंत सिंह ने अचानक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला क्यों लिया? क्या अनंत सिंह उम्रदराज हो गए हैं? क्या अनंत सिंह का शरीर अब साथ नहीं दे रहा है? या फिर अनंत सिंह सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से नाराज होकर यह फैसला लिया? अनंत सिंह के चुनाव नहीं लड़ने से कौन संभालेगा उनकी विरासत? या फिर मोकामा के एक और बाहुबली सूरजभान सिंह की किस्मत चमकने वाली है?
अनंत सिंह ने सोमवार को राज्यसभा चुनाव में वोट गिराने के बाद कहा, ‘वह अब विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे. उनके बाल-बच्चे अब चुनाव लड़ेंगे.’ अनंत सिंह का राजनीति में आना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था. उन्होंने अपनी विरासत अपने बड़े भाई दिलीप सिंह से हासिल की, जो कभी लालू यादव के राज में मंत्री हुआ करते थे. लेकिन उनकी मौत के बाद अनंत सिंह ने उनकी विरासत को संभाला. अनंत सिंह पहली बार 2005 में जेडीयू के टिकट पर मोकामा से विधायक बने. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2005, 2010, 2015, 2020 और हालिया 2025 के चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की. पिछले विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह ने मोकामा के एक और बाहुबली पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को हराया था.
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अनंत सिंह के बाद कौन करेगा मोकामा पर राज?
अनंत सिंह बिहार के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने निर्दलीय, जेडीयू और राजद तीनों के टिकट पर जीत हासिल की है. दिलचस्प बात यह है कि 2015, 2020 और 2025 में भी जेल में रहते हुए ही चुनाव जीते थे, जो जनता पर उनके पकड़ को दर्शाता है. 9 साल की उम्र में संन्यासी बनने घर छोड़ दिया, लेकिन भाई के प्रभाव और गांव की हिंसा ने उन्हें अपराध की दुनिया में धकेल दिया. 1990s में मोकामा पर कब्जा जमाया. 2005 में राजनीति में कदम रखा. हर बार जेल, गोली, मुकदमे से सामना हुआ लेकिन मोकामा की जनता ने छठी बार भी जेल से ही जिताया.
जब गोलियों से छलनी होने के बाद भी बच गए अनंत सिंह
अनंत सिंह कई जानलेवा हमलों से बचकर बाहर निकले हैं. साल 2004 में भी भी विरोधियों ने खिड़की से गोली चलाई. सीने में गोली लगी. डॉक्टरों ने जीवन की आशा छोड़ दी थी, लेकिन भाई ने डॉक्टर को गन पॉइंट पर धमकाकर ऑपरेशन करवाया औऱ अनंत सिंह बच गए, लेकिन बाद में गिरफ्तार हुए. साल 2025 में सोनू-मोनू गैंग से उनकी लड़ाई हुई. मोकामा में उनके काफिले पर 70-100 राउंड फायरिंग हुई. उन्होंने सोनू-मोनू गैंग पर ‘चोर-किडनैपर है’ कहकर को ललकारा. उन्हें मोकामा और बाढ़ के इलाके में ‘छोटे सरकार’ का नाम दिलाया. उनके पास एके-47 रखने से लेकर घर में अजगर पालने और घोड़ों के शौक तक की कहानियां बिहार के घर-घर में मशहूर हैं.
मोकामा सीट पर अनंत सिंह बनाम सूरजभान परिवार की चुनावी जंग के आसार.
अनंत सिंह ने क्यों लिया यह फैसला?
अनंत सिंह ने सोमवार को साफ कर दिया कि वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह लोकसभा चुनाव की तैयारी करेंगे, तो उन्होंने सीधे तौर पर इनकार नहीं किया लेकिन सारा फैसला नीतीश कुमार पर छोड़ दिया. उन्होंने कहा, ‘हम तो जेल में हैं, नीतीश कुमार हमारे मालिक हैं, जो वो तय करेंगे वही होगा.’ राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अनंत सिंह खुद को लोकसभा के लिए तैयार कर सकते हैं, जबकि अपनी मोकामा सीट से अपने बेटे को चुनावी मैदान में उतारकर नई इबारत लिख सकते हैं.
अनंत सिंह की उम्र अब लगभग 65 साल हो चुकी है. मोकामा के खुद और पत्नी मिलाकर अब तक 6 बार विधायक रह चुके हैं. उन पर हत्या, अपहरण, और आर्म्स एक्ट समेत दर्जनों मामले दर्ज हैं. 2019 में उनके घर से एके-47 और हैंड ग्रेनेड मिलने के मामले में उन्हें सजा भी हुई थी, हालांकि बाद में हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली. नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जन सुराज के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में अनंत सिंह फिलहाल बेऊर जेल में बंद हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या अनंत सिंह के चुनाव नहीं लड़ने से पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की किश्मत चमकने वाली है?
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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर
भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...और पढ़ें
First Published :
March 16, 2026, 12:42 IST

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