Trade Deal: भारत ही होगा US का सहारा, अमेरिकी कंपनियों का बनेगा मैन्युफैक्चरिंग हब, डील के बाद एक और गुडन्यूज

3 hours ago

Last Updated:February 11, 2026, 05:58 IST

India-US Trade Deal: अमेरिका और भारत के बीच व्यापार के रिश्ते अब नई ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं. दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति जता दी है. इस डील में कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करने का फैसला हुआ है, जिससे दोनों तरफ का व्यापार आसान और सस्ता होगा. इस डील के ठीक बाद एक और अच्छी खबर आई है.

भारत ही होगा US का सहारा, बनेगा मैन्युफैक्चरिंग हब, डील के बाद एक और गुडन्यूजZoom

भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा

India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील हो चुकी है. अब एक और अच्छी खबर आई है. भारत अब अमेरिकी कंपनियों का सहारा बनेगा. जी हां, खुद अमेरिका का कहना है कि भारत अब चीन से निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए नया ठिकाना होगा. अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमिसन ग्रीर के मुताबिक, चीन से बाहर निकलने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक नया अड्डा हो सकता है. कारण कि यहां लोग हैं और मैनुफैक्चरिंग कैपेसिटी है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के लिए इंपोर्ट के मामले में भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है.

दरअसल, फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जैमिसन ग्रीर ने ये बातें कहीं. जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहें तो क्या भारत सही जगह है, तो उन्होंने साफ कहा कि हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन अमेरिका में हों या जितना हो सके घर के पास हों. लेकिन जब ग्लोबलाइजेशन से हटते हैं तो सप्लाई चेन को बदलना पड़ता है. भारत इसके लिए एक अच्छा रास्ता हो सकता है. वहां बहुत सारे लोग हैं, मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता है.’

भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा
उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘हम चाहते हैं कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और अमेरिकी वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां हमें दूसरे देशों से आयात करना हो, वहां भारत एक अच्छा स्रोत हो सकता है,बशर्ते व्यापार संतुलित और निष्पक्ष हो.’ अमेरिका का यह बयान भारत के लिए बड़ा संदेश है. अमेरिका अब भारत को चीन का विकल्प मान रहा है. भारत की युवा आबादी, बढ़ती फैक्ट्री क्षमता, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की नीतियां इसे आकर्षक बनाती हैं. कई अमेरिकी कंपनियां पहले से ही भारत में प्लांट लगा रही हैं. ऐपल, गूगल, अमेजन, टेस्ला जैसे नाम इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं.

इससे क्या फायदा होगा?
इस डील के बाद दोनों देशों को फायदा होगा. भारत को अमेरिकी बाजार में ज्यादा निर्यात का मौका मिलेगा, रोजगार बढ़ेंगे, टेक्नोलॉजी आएगी. वहीं, अमेरिका को सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन मिलेगी, चीन पर निर्भरता कम होगी. कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका का भारत पर भरोसा बढ़ता जा रहा है. साउथ एशिया में भारत अब अमेरिका का विश्वसनीय साथी बन रहा है. न सिर्फ ऊर्जा में, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में भी.

भारत बनेगा अमेरिका का नया बिजनेस अड्डा

क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है?
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर या ग्रीयर ने मंगलवार को कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद को पहले ही धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया है और अमेरिका एवं अन्य स्रोतों से ऊर्जा की खरीद को फिर से बढ़ा रहा है. ‘फॉक्स बिजनेस’ के साथ इंटरव्यू में इस सवाल पर कि क्या भारत वास्तव में रूसी तेल खरीदना बंद कर रहा है, ग्रीयर ने कहा: ‘संक्षिप्त उत्तर हां है. उन्होंने पहले ही रूसी ऊर्जा उत्पादों की अपनी खरीद को कम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने अन्य स्रोतों से खरीद को फिर से बढ़ाना शुरू कर दिया है.'

सप्लाई चेन पर ग्रीर का पूरा बयान क्या है?
फॉक्स न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिकी कंपनियां चीन से सप्लाई चेन हटाना चाहती हैं, तो क्या भारत सही जगह होगी, तो इस पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एम्बेसडर जैमीसन ग्रीर ने कहा, ‘हम जानते हैं कि कई कंपनियां पहले से ही उस दिशा में जा रही हैं. हम चाहते हैं कि सप्लाई चेन यहां यूनाइटेड स्टेट्स में हों और जितना हो सके घर के पास हों. हम जानते हैं कि जब आप ग्लोबलाइज़ेशन से हटते हैं और जब आप एक ज़्यादा मज़बूत और सुरक्षित इकॉनमी की ओर बढ़ते हैं, तो हमारे देश के सामने आने वाली सभी चुनौतियों का एक प्रोसेस होता है. किसी न किसी पॉइंट पर आपको सप्लाई चेन को इधर-उधर करना ही होगा; भारत इसके लिए एक रास्ता हो सकता है. उनके पास वहां बहुत सारे लोग हैं, उनके पास मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी है. बेशक, हम यह पक्का करना चाहते हैं कि अमेरिकन मैन्युफैक्चरिंग सबसे पहले और सबसे ज़रूरी हो और अमेरिकन वर्कर सबसे पहले हों, लेकिन जहां तक हम दूसरे देशों से इंपोर्ट करना चाहते हैं, भारत एक अच्छा सोर्स हो सकता है, जब तक यह बैलेंस्ड और फेयर हो.'

भारत पर अब कितना टैरिफ है?
भारत और अमेरिका ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे. ट्रेड डील के साथ ही अमेरिका ने भारत का टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. एडिशनल टैरिफ भी हटा दिया है.

About the Author

Shankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...और पढ़ें

First Published :

February 11, 2026, 05:51 IST

homebusiness

भारत ही होगा US का सहारा, बनेगा मैन्युफैक्चरिंग हब, डील के बाद एक और गुडन्यूज

Read Full Article at Source